जयललिता- अभिनेत्री से मुख्यमंत्री तक का सफर

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  • अभिनय से राजनीति में आई तमिलनाडु की वर्तमान मुख्यमंत्री जयललिता का पूरा नाम सेल्वी जे. जयललिता है.
  • जयललिता का जन्म 24 फ़रवरी 1948 को एक ‘अय्यर’ परिवार में, मैसूर राज्य (जो कि अब कर्नाटक का हिस्सा है) के मांडया जिले के पांडवपुरा तालुक के मेलुरकोट गांव में हुआ था। उनके दादा तत्कालीन मैसूर राज्य में एक सर्जन थे।
  • मैसूर में जन्मीं जयललिता के पिता वकील थे। उनका जन्म नाम कोमालावल्ली था। आयंगर रिवाज में दो नाम रखे जाते हैं। इसलिए दूसरा नाम जयललिता रखा।
  • उनके दादा मैसूर के महाराजा के यहां मेडिकल सर्जन थे। महाराजा जयचमराजेंद्र वुडेयार के साथ खुद के संबंध दिखाने के लिए परिवार के हर सदस्य का नाम जय से शुरू करते थे।
  • महज 2 साल की उम्र में ही उनके पिता जयराम, उन्हें, मां संध्या (real name Vedavalli) और बड़े भाई जयकुमार को अकेला छोड़ चल बसे। पिता की मृत्यु के पश्चात उनके परिवार को आर्थिक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा था।

Mysore to KollywoodAt birth, Jayalalitha was also known as Komalavalli. The ‘Jaya’ in her name was a prefix everyone in her family used—her father was Jayaram and her brother Jayakumar—to emphasise their connection to  the Mysore palace, the then king being Jayachamarajendra Wodeyar. Her grandfather had been the palace surgeon to the rulers of Mysore. Jayalalitha lost her father when she was two. In some autobiographical sketches she wrote in the 1970s for a Tamil magazine, she recalls vividly the image of her father’s corpse. He had died in mysterious circumstances, having squandered away her grandfather’s considerable wealth. Later, the family moved to Bangalore, where her maternal grandparents lived. Her mother Vedavalli, an independent-minded woman, did not want to be a burden on her parents, so she started working as a typist. Then Vedavalli’s sister Vidyavathi, who was an air hostess and had got some breaks in films, encouraged her to also come to Chennai to try her luck in Kollywood, which she did, taking the screen name Sandhya. She always kept in mind that she had to bring up the children well and they should lead good lives, perhaps because of the awareness that her father-in-law had been a prosperous professional and would have wanted that very much. She put Jayalalitha and her brother in school, first in Bangalore and then in Madras.

  • जयललिता मात्र दो वर्ष की ही थी. ऐसे में जयललिता की माता, अपने बच्चों को लेकर अभिभावकों के पास बैंगलोर आ गई थीं और टायपिस्ट का काम किया।

Rich legacy: (Clockwise from centre) Sarasa and Chitra Visveswaran; withJ. Jayalalitha and her mother Sandhya; Padma Subrahmanyan; C.V. Chandrasekar; Narasimhachari and Vasanthalakshmi; Sailaja; the Dhananjayans and Sudharani Raghupathy.Photos: By special arrangement, Kalaniketan Balu and archives.

Jayalalitha and her mother Sandhya

  • जयललिता की मौसी Vidyavathi(एक एयर होस्टस बाद में अभिनेत्री Ambujam के नाम से मशहूर) ने बहन को फिल्मों में काम करने के लिए चेन्नई बुला लिया। जयललिता की मां ‘संध्या’ के नाम से फिल्मी पर्दे पर आईं।
  • देखते ही देखते वह संध्या के नाम से मशहूर- हो दक्षिण भारतीयों फिल्मों का एक जाना-माना चेहरा बन गईं. आर्थिक हालात सुधर जाने के कारण जयललिता की प्रारंभिक शिक्षा बैंगलोर के एक संभ्रांत स्कूल बिशप कॉटन गर्ल्स हाई स्कूल (Bishop Cotton Girls’ School) में संपन्न हुई.
  • फिल्मों में काम करने वालों को इज्जत नहीं मिलती थी- लेकिन अपनी मजबूरी की वजह से जयललिता की मां ने फिल्मों में काम तो किया लेकिन बेटी जयललिता को फिल्मी माहौल से दूऱ रखने के लिए चेन्नई भेज दिया। आगे की पढ़ाई जयललिता ने प्रेजेंटेशन चर्च पार्क कांवेंट स्कूल, चेन्नई (Sacred Heart Matriculation School (popularly known as Church Park Presentation Convent) से पूरी की।
  • पढ़ाई के साथ-साथ संगीत और नृत्य में रूचि- खूबसूरत जयललिता को पढ़ाई के साथ संगीत में रूचि थी, वो बहुत अच्छा नृत्य कर सकती हैं।

13 साल की होते ही जयललिता की लाइफ ने बदली करवट जब वो 13 साल की हुईं तभी उनकी लाइफ ने करवट बदली, जो उनके जीवन का अहम मोड़ बन गया। ‘संध्या’ की फिल्म के एक निर्माता की नजर जयललिता पर पड़ी और उन्होंने उन्हें हिरोईन बनने का ऑफर दिया। जिसे उनकी मां ने स्वीकार कर लिया और जयललिता ने फिल्मों के लिए हां बोल दिया और वो हिरोईन बन गईं। मात्र 15 साल की उम्र में पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि के बेटे शंकर गिरि की इंग्लिश फिल्म ‘एपिस्टल’ में भी काम किया।

First FrameJayalalitha wanted to pursue her studies and even got her friend to get an application for Stella Maris College and obtained a seat there. But by then, her mother had persuaded her to join films, on assurance from producers stunned by Jayalalitha’s looks that shooting would take place only during summer vacation and the young woman wouldn’t miss classes.

जयललिता वकील बनना चाहती थीं- लेकिन मां के कहने पर 1964 में पढ़ाई बीच में छोड़ी और फिल्मी दुनिया में आ गईं।

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An early photograph of Jayalalitha from when she was new to films.

15 साल की उम्र में बनीं अभिनेत्री उनके खूबसूरत अदायगी और मदमस्त काया की खबर दूसरे राज्यों में पहुंची और जयललिता देखते-देखते ही तमिल के अलावा तेलुगू, कन्नड और हिंदी फिल्मों की पॉपलुर हस्ती बन गईं। जयललिता ने हिन्दी फिल्मों में भी काम किया। इनमें धर्मेंद्र के साथ ‘इज्जत’ मुख्य है। जयललिता तमिल सुपरस्टार एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) से बहुत प्रभावित रही हैं। लेकिन नजदीकियों की वजह से जयललिता का जितना नाम हुआ उससे कहीं ज्यादा उन्हें बदनामी भी झेलनी पड़ी। Her first film had already been done when she was 15 and still in school—Chinnada Gombe, a Kannada film(Debut) directed by B.R. Panthulu. Her first Tamil film was Vennira Aadai (1965), directed by Sridhar, and when MGR saw the rushes of this movie, he decided he wanted her to co-star in his Adimai Penn (1969). This is how her connection with MGR began, when she was still a teenager. Initially, Jayalalitha threw tantrums, saying she wanted to be a doctor or a lawyer, not an actor. But her mother said their finances were not as good as she thought it was. That decided it.

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Jayalalitha at a birthday party

फिल्मों से नाम कमाया- जब वे मात्र 15 साल की थीं, तभी उनकी मां ने उन्हें फिल्मों में जाने के लिए प्रेरित किया। इसी उम्र में उन्होंने कन्नड़ भाषा की फिल्म ‘Chinnada Gombe'(1964) में काम किया। अगले ही साल यानी 1965 में उन्होंने तमिल सिनेमा में फिल्म ‘Vennira Aadai’ से एंट्री मारी। इसी साल तेलुगु सिनेमा में ‘Manushuru Mamathalu’ से अपनी अदाओं का जलवा दिखाना शुरु किया।

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Jayalalitha with MGR & Shoban Babu

जयललिता ने लगभग 130 फिल्मों में काम किया. उन्होंने तमिल के अलावा तेलुगु, कन्नड़ और हिन्दी फिल्मों में भी काम किया है. जयललिता ने धर्मेंद्र सहित कई अभिनेताओं के साथ काम किया लेकिन उनकी ज्यादातर फिल्में शिवाजी गणेशन और एमजी रामचंद्रन के साथ ही आईं. एमजी रामचंद्रन के साथ उन्होंने 28 फिल्में कीं।

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पहली अभिनेत्री जिसने तमिल सिनेमा में पहला स्कर्ट: जयललिता ने अपने फ़िल्मी करियर में 130 फ़िल्में की हैं। 1961 में अंग्रेजी फिल्म ‘Episite’ से अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली जयललिता 1980 तक लगातार साउथ इंडस्ट्री पर राज करती रही हैं। गौरतलब है कि तमिल सिनेमा में स्कर्ट पहनने की शुरुआत जयललिता ने ही की थी।

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बॉलीवुड में की है एक फिल्म: धर्मेन्द्र के साथ की हिन्दी फिल्म… जयललिता ने अपने फ़िल्मी करियर में कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया है। उन्हें खासतौर से तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों के लिए जाना जाता है, लेकिन साल 1968 में उन्होंने हिंदी फिल्म ‘इज्ज़त’ में भी काम किया है। इस फिल्म में धर्मेन्द्र ने उनके साथ मुख्य भूमिका अदा की थी।

धर्मेन्द्र के साथ की हिन्दी फिल्म

तीन बार मिल चुका है फिल्मफेयर: जयललिता की गिनती साउथ सिनेमा की सबसे खूबसूरत एक्ट्रेसेस में होती थी। उनके शानदार अभिनय के लिए उन्हें तीन बार फिल्मफेयर के बेस्ट एक्ट्रेस (साउथ) के अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है।

  • पहला फिल्मफेयर उन्हें शिवाजी गणेशन की तमिल फिल्म ‘PattikadaPattanama'(1972) के लिए मिला था।
  • इसी साल तेलुगु फिल्म ‘Sri Krishna Satya’ (1972) के लिए उन्हें दूसरा फिल्मफेयर मिला।
  • साल 1973 में तमिल फिल्म ‘Suryakanthi’ के लिए तीसरा फिल्मफेयर मिला था।

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जयललिता को दिए गए सम्मान

  • वर्ष 1972 में तमिलनाडु सरकार द्वारा जयललिता को कलईममानी अवार्ड दिया गया.
  • वर्ष 1991 में मद्रास यूनिवर्सिटी द्वारा जयललिता को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई.
  • 1992 में डॉ. एम.जी.आर यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस द्वारा जयललिता को डॉक्टरेट की उपाधि दी गई.

जयललिता विविध प्रतिभासंपन्न महिला हैं. उन्हें मोहिनी अट्टम, कथकली जैसे नृत्यों का भी बहुत अच्छा ज्ञान है. वह अंग्रेजी समेत दक्षिण भारत की लगभग हर भाषा को बोल और समझ सकती हैं. राजनीति और फिल्मों में अभिनय करने के अलावा जयललिता को लिखने, तैराकी, घुड़सवारी का भी शौक है. जयललिता द्वारा अंग्रेजी और तमिल भाषा में लिखे गए कई लेख और नॉवेल अब तक प्रकाशित हो चुके हैं. 

Jayalalithaa Sings A Hindi Song – Rare Video

https://www.youtube.com/watch?v=jvsqnSyPSwU

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Izzat 1968, Hindi Movie

https://www.youtube.com/watch?v=grF7nFvTicM

https://www.youtube.com/watch?v=8WDk6_YMq8w

Vairam, 1974 Tamil Movie

https://www.youtube.com/watch?v=jU6sLnHbID4

Pattikatu Ponnaiah, 1973 Tamil Movie

https://www.youtube.com/watch?v=g_JtlNtI8QE

Raman Thediya Seethai, 1972 Tamil Movie

https://www.youtube.com/watch?v=ic3PPT3QfoQ

https://www.youtube.com/watch?v=HM8yBZ-Ya3M

https://www.youtube.com/watch?v=3NJwjO7-Aes

https://www.youtube.com/watch?v=BWsX8Zsq6-o

 

Kudiruntha Koil, 1968 Tamil Movie

https://www.youtube.com/watch?v=tJ2BqpP4xM8

MGR’s Funeral

https://www.youtube.com/watch?v=uDb5N9ifgxA

राजनीति में एंट्री

किया नई पार्टी का गठन

जयललिता और एमजी रामचंद्रन… पहले प्यार, फिर तकरार… और फिर आखिर में आ ही गए साथ

जयललिता ने एमजीआर के साथ 28 फिल्मों में काम किया था. जयललिता और एमजीआर की परदे के साथ-साथ असल जिंदगी में भी केमिस्ट्री बहुत अच्छी थी. एमजीआर तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थे और भारतीय राजनीति के सम्मानित नेताओं में थे.

आल इंडिया अन्ना द्रमुक पार्टी का गठन- एमजी रामचंद्रन ने आखिरकार 1972 को आल इंडिया अन्ना द्रमुक पार्टी का गठन किया। कहा जाता है कि उस समय क्षेत्रीय दलों की मान्यता खत्म करने पर विचार हो रहा था। इसीलिए एमजीआर ने अपने दल को राष्ट्रीय नाम दिया। उन्होंने झंडे में भी ज्यादा परिवर्तन नहीं किया। केवल बीच मे अन्नादुरई की एक तस्वीर लगा दी। आल इंडिया द्रमुक पार्टी का गठन करने के बाद उन्होंने पार्टी के प्रचार का एक सघन अभियान चलाया।

तमिल राजनीति में बनाई पैठ

  • कांग्रेस की साया एमजीआर को अपने साथ ज्यादा दिन नहीं रख पाई। अन्नादुरई से प्रभावित होकर वह 1952 में डीएमके की उस धारा से जुड़ गए जो तमिल द्रविड़ का शंखनाद कर रही थी। एमजीआर शुरू में हिंदुवादी थे। लेकिन राजनीति की शुरुआत उन्होंने उस डीएमके के साथ की जिसे तर्कवादी पार्टी मानी जाती थी। ऐसा दल जो तमिल अस्मिता के लिए खड़ा हुआ। जहां शुरु में सीधे उत्तर भारत या उच्च जातियों के विरोधी स्वर भी उठते थे। हालांकि एमजीआर ने अपनी लाइन को कभी उग्र नहीं होने दिया। फिल्मों की अपनी लोकप्रियता को जब वह राजनीतिक मंच पर लाए तो उन्हें वंचितों के लिए कहते सुना गया।
  • इस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर उन्होंने 1967 और 1971 में विधानसभा में भी उन्होंने प्रतिनिधित्व किया। अन्नादुरई के निधन के बाद डीएमके में करुणानिधि और वीआर नेदुनसेझियान के बीच पार्टी संघर्ष में एमजीआर ने करुणानिधि का साथ दिया। उन्हें पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया। लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब करुणानिधि उनको पार्टी में उनके स्तर के मुताबिक कम तवज्जो देने लगे। यह माना जाने लगा कि करुणानिधि अपने बेटे मुका मूदू को आगे ला रहे हैं। एमजीआर और उनके साथियों को अपनी उपेक्षा का आभास होने लगा। इस विरोध को एमजीआर का पार्टी विरोध माना गया। उधर अन्ना दुरई की याद में आयोजित एक सभा में एमजीआर ने सीधे-सीधे पार्टी पर भ्रष्टाचार और अनियमितता होने का आरोप लगाया। साथ ही पार्टी के बड़े नेताओं और मंत्रियों को अपनी संपत्ति का खुलासा करने की नसीहत भी दी। इसे पार्टी के खिलाफ माना गया। आखिरकार पहले की तय योजना के तहत एमजीरामचंद्रन को पार्टी से निकाल दिया गया।

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पहले अभिनेता थे जो किसी राज्य में मुख्यमंत्री बने- आखिरकार 1977 में वह अपनी पार्टी को चुनाव जिताकर लाए। वह पहले अभिनेता थे जो किसी राज्य में मुख्यमंत्री बने। यही नहीं उस समय उनकी पार्टी से सांसद कैबिनेट मंत्री भी बने। 1980 में इंदिरा गांधी के जरिए उनकी सरकार को बर्खास्त करने का फैसला भी जनता को रास नहीं आया। जब फिर चुनाव हुए तो एमजी रामचंद्रन को चुनौती देने वाला कोई नहीं था। 1984 का राजनीतिक पटल और था। इस बार कांग्रेस ने यहां आल इंडिया अन्ना द्रमुक के साथ समझौता किया था। एमजीआर फिर तीसरी बार चुनाव जीत कर आए।

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एमजीआर जयललिता को लेकर राजनीति में आए- कहा जाता है कि 1977 में तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री रामचंद्रन जयललिता को राजनीति में लेकर आए थे, लेकिन खुद जयललिता इस बात से इनकार करती हैं। 1982 में उन्होंने रामचंद्रन की पार्टी ऑल इंडिया अन्ना ड्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIADMK) ज्वाइन कर ली। 1983 में उन्हें प्रचार समिति का सचिव बनाया गया और यही वह साल था जब वे पहली बार तिरुचेंदूर विधानसभा सीट से विधायक चुनी गईं। जयललिता की धाराप्रवाह अंग्रेजी के कारण रामचंद्रन चाहते थे कि वे राज्यसभा में आएं और 1984 से 1989 में वे बतौर राज्यसभा सदस्य संसद में अपनी जगह बनाए रहीं। 1989 में जयललिता ने तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष की नेता के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली और 24 जून को वे पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हुईं। MGR introduced her to AIADMK in 1981 and made her the party’s propaganda secretary in 1983. He sent her to the Rajya Sabha in 1984.  MGR was hospitalised in October 1984, and since then Jayalalitha has steered the AIADMK, controlling a split in the party and outbidding MGR’s wife Janaki, when MGR died in 1987. Jayalalithaa rode the sympathy wave and was elected to the assembly in 1989 and became the first woman leader of the opposition. In 1991, following Rajiv Gandhi’s assassination, Jayalalithaa was propelled to victory and became the first elected woman chief minister of Tamil Nadu.

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एमजीआर के साथ रिश्तों को लेकर झेली जलालतकहा जाता है कि एमजी रामचंद्रन और जयललिता एक-दूजे से प्रेम करते थे लेकिन एमजी रामचंद्रन विवाहित थे और दो बच्चों के पिता थे, जिसकी वजह से उनकी और जयललिता की शादी नहीं हो सकती थी, इसलिए दोनों के रिश्तों को नाम नहीं मिला। Poison TonguesJayalalitha and MGR became a popular pair despite their inter-generational age difference—31 years. He was born in 1917, she in 1948. On the suggestion of C.N. Annadurai (founder of the DMK), their first film was shot in Goa, because of the anti-Hindi agitations in Tamil Nadu. She also paired with other stars like Sivaji Ganesan, but it was with MGR that the chemistry worked. But there were forces around MGR that didn’t want her to be paired with him. They felt MGR was becoming obsessed with her. They brought in other actors. They also started a slander campaign against Jayalalitha, saying she was arrogant. They accused her of not following the rules: people would be waiting for hours to meet MGR but “this little girl”, this “woman who was born yesterday”, would walk straight into his room. They also thought MGR’s do-gooder image would be sullied by his dalliance with Jayalalitha, so they worked towards breaking the relationship.

जयललिता कहती रहीं एमजी रामचंद्रन मेरे सिर्फ मेंटर हैं- हालांकि सार्वजिनक रूप से जयललिता ने हमेशा कहा कि एमजी रामचंद्रन उनके मेंटर हैं और इससे ज्यादा और कुछ नहीं, वो जब 16 साल की थीं तब उनसे मिली थीं और उस समय एमजी रामचंद्रन की उम्र 42 साल थी। ऐसे में हमारे बीच में अफेयर जैसी बातें कहां आ सकती हैं। हालांकि तत्कालीन समय में मीडिया ने जयललिता के लिए एमजी रामचंद्रन की ‘Mistress’  जैसे शब्द का प्रयोग किया था।

पहले प्यार, फिर तकरार… और फिर आखिर में आ ही गए साथ

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The Chalice BreaksAround 1970, due to the persistent efforts of some people, MGR drifted away from Jayalalitha and started acting with other heroines, like Lata and Manjula. She too started pairing with other heroes, including Shoban Babu, a Telugu star with whom she developed a close relationship, which however did not lead to marriage. This was her first rift with MGR. As to marriage, Jayalalitha says she has never been against marriage per se. Perhaps the man she may have wanted to settle down with was already married, although it was not uncommon in the Tamil film industry for married men to take another wife.

Image Manager– For 10 years, there was no connection between MGR and Jayalalitha; he entered politics and became chief minister in ’77. It is widely believed that MGR brought her into politics; she has disputed this in an interview, saying she entered politics by choice. MGR thought Jayalalitha might make a good propaganda secretary for the AIADMK. Karunanidhi, the orator, was becoming a difficult opposition leader, always maligning MGR in his speeches, and MGR wanted a counter, someone who could speak well and pull crowds, and he was never in doubt about Jayalalitha’s talent. He sent his speechwriter Sholai to train her. She was formally appointed propaganda secretary in 1983. She was a great success in her new role. MGR had tried out actors like Nirmala, but it hadn’t worked. It is only Jayalalitha who became a successful representative of MGR.

Ms Memorious- Jayalalitha used to address MGR’s speechwriter as “Mr Sholai”. The ‘Mr’ honorific was quite strange in the Tamil world those days. The first time Sholai met her, he says, he went with a speech ready. She asked him to read it. Then she asked him to repeat it once again. She made him repeat it thrice. After that, she repeated it verbatim, not missing a single word. Sholai was simply astonished. (This chimes with the apocryphal story of a national politician quoting Shakespeare to jibe at her, only to be amazed at her repartee: she quoted back from exactly where he had left off.) Sholai also remembers she had a vineyard in Hyderabad and a bungalow on Mahabalipuram road, but would tell him she didn’t want anything and wanted to sell everything. She wore no jewellery either. Given the corruption charges that engulfed her during her first term as CM, this comes across as surprising.

Ammu Aggrieved– As propaganda secretary, Jayalalitha became a roaring success. Seniors in the party and the coterie around MGR didn’t like this. They again got down to using rumour and character assassination as weapons. Jayalalitha’s story is about how difficult it is for a woman to survive in politics. It is also about how one woman transformed herself to survive in that atmosphere. MGR, too, wielded tremendous control over her. In fact, he got her to stop writing about her life in a Tamil magazine. Under the influence of some party officials, he again started distancing himself from her even though she tried very hard to legitimise her relationship with him. But the cadres loved her.

एमजीआर की तबियत खराब, अम्मू ने मांगी माफी- लेकिन उनकी तबियत भी बिगड़ती रही। अब वह अपनी पार्टी का ठीक से प्रचार भी नहीं कर पा रहे थे। एक समय उन्होंने आल इंडिया द्रमुक पार्टी की सफलता के लिए लोगों से प्रार्थना करने की अपील भी की। लेकिन लोगों में और पार्टी में उनकी लोकप्रियता इस कदर थी कि जब एक बार उन्होंने इस्तीफा देने का मन बनाया तो सारे मंत्रियों ने उन्हें अपने इस्तीफे सौंप दिए थे। उनकी लोकप्रियता ही थी कि उनकी तबियत खराब होने और उन्हें अस्पताल ले जाने की बात सुनकर हजारों लोग अस्पताल के बाहर जमा हो गए। उनके दस प्रशंसकों ने आत्मदाह किया और कइयों ने आत्मदाह करने की कोशिश की। MGR fell ill. He was shifted in 1984 to the US and Jayalalitha had very little information about his illness. Even when he came back from the US after treatment, he didn’t meet her or call her. MGR was her only anchor in politics. She grew desperate and wrote a series of letters to him, which strangely got leaked. It started circulating among her political opponents. In those letters, she tells him how she “yearns” to meet him, asks if he has “forgotten” or “forsaken” her, argues that he is not being fair to her and wonders if he doesn’t know how much his “Ammu” (a pet name) loves him.

तमिल पत्रिका कुमुदममें प्रकाशित कुछ आत्मकथात्मक लेख

Rare pics of Jayalalitha in her hot avtaar

मनमतिरंडु सोलरायन’ (मैं अपने दिल की भड़ास निकाल रही हूं)- जयललिता के शुरुआती जीवन की आधिकारिक जानकारी केवल 1970 के दशक के अंतिम दौर में व्यापक पहुंच वाली तमिल पत्रिका ‘कुमुदम’ में प्रकाशित आत्मकथात्मक लेखों की शृंखला से जुटाई जा सकती है। ‘मनमतिरंडु सोलरायन’ (मैं अपने दिल की भड़ास निकाल रही हूं) शीर्षक वाले इस आलेख शृंखला में उनकी शुरुआती जीवन के बारे में बताया गया है।

घोर गरीबी का सामना किया- इनमें जानकारी दी गई है कि उनका परिवार घोर गरीबी का सामना कर रहा था, नतीजतन उनकी मां को उन्हें सिनेमा जगत भेजना पड़ा। इस पूरी शृंखला में उनकी शुरुआती जीवन की मुश्किलों और पीड़ा का वर्णन किया गया है। नृत्य, संगीत और अभिनय सीखने की मजबूरी और थकान की कहानी और यह भी कि दरिद्रता की वजह से कैसे उनके पिता की मौत हो गई।

जयललिता को क्रिकेट पसंद कुमुदम में प्रकाशित आलेखों से यह भी पता चलता है कि जयललिता को क्रिकेट पसंद है।

पहला क्रश- एक इंटरव्यू में बोलीं थी जयललिता: मैं जब छोटी थी तब क्रिकेट का टेस्ट मैच देखने जाया करती थी. उस वक्त मैं नारी कॉन्ट्रैक्टर (क्रिकेट खिलाड़ी) को पसंद करती थी. इसके बाद मुझे शम्मी कपूर पर भी बहुत ज्यादा क्रश था. मगर हमारी कभी मुलाकात नहीं हुई.

पसंदीदा गाने और फिल्म- जयललिता: मेरी पसंदीदा फिल्म्स में शम्मी कपूर की फिल्म ‘जंगली’ है. उस फिल्म का ‘याहू…’ सॉन्ग मुझे काफी अच्छा लगता है. इसके अलावा फिल्म ‘दो आखें बारह हाथ’ का सॉन्ग ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’, ‘आ जा सनम मधुर चांदनी से हम’ भी काफी पसंद है.

मनमतिरंडु सोलामुदियाले’ (मैं दिल की बात कहने में असमर्थ हूं) इसके बाद जब उन्होंने एमजीआर (एम जी रामचंद्रन) के साथ अपने संबंधों का जिक्र शुरू किया, वह शृंखला एकाएक खत्म हो गई। इस शृंखला का अंतिम आलेख ‘मनमतिरंडु सोलामुदियाले’ (मैं दिल की बात कहने में असमर्थ हूं) शीर्षक से प्रकाशित हुआ था। यह उस समय की बात है, जब एमजीआर ने हस्तक्षेप किया और उनसे कहा कि वह लिखना बंद करें।

मेरे जीवन का एक तिहाई हिस्सा मेरी मां से प्रभावित रहा और दो तिहाई हिस्सा एमजीआर से

जयललिता ने एक बार बड़ी तीखी टिप्पणी की थी, ‘मेरे जीवन का एक तिहाई हिस्सा मेरी मां से प्रभावित रहा और दो तिहाई हिस्सा एमजीआर से। लेकिन अब वह सब खत्म हो गया। जीवन का बाकी बचा हिस्सा खुद के लिए है।

राजनीतिक लड़ाई की शुरूआत

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पार्टी की कमान एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन की जगह जयलिलता के हाथ आई- 1987 में एमजीआर का देहांत हुआ। उनकी पत्नी जानकी रामचंद्रन और जयललिता के बीच हुए सत्ता संघर्ष और पार्टी पर अधिकार की लड़ाई में आखिर जयललिता कामयाब हुई। जानकी रामचंद्रन ने स्वयं कुछ समय बाद अपनी पार्टी को आल इंडिया अन्ना द्रमुक में विलीन कर दिया। इसके बाद वह गुमनामी में ही रहीं।

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जयललिता और एमजी रामचंद्रन का रिश्ते पर विवाद- लेकिन राम चंद्रन की मौत के वक्त जिस तरह से एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन ने जयललिता के साथ व्यवहार किया था और उन्हें उनके पार्थव शरीर से दूर रखा था उससे साफ हो गया था कि वाकई में जयललिता और राम चंद्रन के रिश्ते में वो नजदीकियां थीं जिन्हें उनकी पत्नी स्वीकार नहीं कर सकती थीं। अपने अपमान के बाद भी जयललिता ने एमजीआर के पार्थव शरीर के दर्शन किये थे और ऐसा रूप धारण किया था जैसे कि किसी विधवा का होता है।

बीमार एमजीआर से मिलने नहीं दिया गया… एमजीआर की शवयात्रा के काफिले से भगा दियाइस बीच एमजीआर गंभीर रूप से बीमार हो गए, लेकिन जयललिता को उनसे मिलने की अनुमति नहीं थी। वह तमिलनाडु तभी वापस जा सकीं, जब वर्ष 1987 में एमजीआर का निधन हो गया। राज्य की जनता ने भी उन्हें सहानुभूतिवश तभी समर्थन दिया, जब एमजीआर की शवयात्रा के काफिले से उन्हें जबरन भगा दिया गया।

14 साल तक गहनों से दूर उन्होंने तय किया कि वे कभी ज्वेलरी नहीं पहनेंगी। यह उस महिला का फैसला था, जो हीरे जडि़त गोल्ड ज्वेलरी पहनने, 10 हजार से अधिक साडिय़ां और 750 जोड़ी सैंडल रखतीं थीं। 14 साल तक वे गहनों से दूर रहीं। 2011 में गहने पहनना फिर शुरू किया।

एमजीआर की पत्नी से छीनी राजनीतिक विरासत– वर्ष 1987 में द्रमुक संस्थापक के निधन के बाद एमजीआर की पत्नी जानकी के समर्थकों ने जयललिता का जमकर विरोध किया लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और राजनीतिक विरासत छीन कर हासिल की। इससे पार्टी का विभाजन हो गया। पार्टी महासचिव होने के नाते वह वर्ष 1989 में तमिलनाडु के निर्वाचन क्षेत्र बोदिनायकनूर से राज्य विधानसभा चुनावों के लिए खड़ी हुईं। चुनाव में जीतने के बाद वह राज्य विधानसभा की पहली नेता विपक्ष बनी। No Longer a FollowerAfter MGR’s death in 1987, Jayalalitha, a Brahmin, a Srirangam Iyengar to be precise, became the head of a party that had its roots in anti-Brahmin sloganeering. To get into the shoes of MGR was no joke. But she incredibly brought the party under her absolute control. MGR’s wife Janaki, who was chief minister for a brief while, could not win the elections after his death. But Jayalalitha’s faction won a number of seats. It did not mean anything to the voters that Janaki was MGR’s wife. To them, Jayalalitha was his heir, though MGR never openly declared her so. In fact, he never named anyone, famously saying once, like Napoleon, “After me, the deluge.”

पहली बार बनी विपक्ष की नेता

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एमजीआर की विधवा जानकी रामचंद्रन से एमजीआर की विरासत को लेकर उन्होंने लड़ाई छेड़ दी. जब एमजीआर की मृत्यु के बाद जानकी रामचंद्रन मुख्यमंत्री बनीं तो एआइएडीएमके का विभाजन हो गया. Janaki was selected as the Chief Minister on 7 January 1988 with the support of 96 members and she won the confidence motion in the house, following irregularities by the speaker P.H. Pandian, who dismissed six members to ease her victory. However, the Indian Central Government under Rajiv Gandhi used Article 356 of the Constitution of India to dismiss the Janaki-led government and impose President’s rule on the State. Jayalalithaa fought the subsequent 1989 elections on the basis of being MGR’s political heir.

विपक्षी डीएमके पार्टी ने इस विभाजन का फ़ायदा उठाया और 1989 के चुनाव में उसकी जीत हुई.

She was elected to the Tamil Nadu Legislative Assembly in 1989 as a representative of the Bodinayakkanur (State Assembly Constituency). This election saw the Jayalalithaa-led faction of the AIADMK win 27 seats and Jayalalithaa became the first woman to be elected Leader of the Opposition. In February 1989, the two factions of ADMK merged and they unanimously accepted Jayalalithaa as their leader and the “Two leaves” symbol of the party was restored.

विधानसभा में झेला अपमान

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वर्ष 1989 में, जब करुणानिधि की पार्टी द्रमुक सत्ता में थी, जयललिता ने करुणानिधि के बजट भाषण में व्यवधान डालने की कोशिश की थी। उनकी शिकायत थी कि मुख्यमंत्री के आदेश पर प्रदेश की पुलिस जनता को प्रताडि़त कर रही है। इस पर करुणानिधि ने कहा कि जयललिता अपने विधायकों को उकसाकर असंसदीय काम कर रही हैं। सभा के सदस्य कक्ष के मेजों पर रखे माइक्रोफोन, चप्पलें और किताबें एक-दूसरे पर फेंकने लगे। बजट के कागजात फाड़ दिए गए और अध्यक्ष ने सभा स्थगित कर दी। इसके बाद जब जयललिता कक्ष से बाहर निकलने लगीं तो द्रमुक के तत्कालीन सार्वजनिक कार्य मंत्री दुरई मुरुगन ने उनकी साड़ी पकड़कर फाडऩे की कोशिश की। जयललिता ने तब घोषणा की थी कि वह तब तक विधानसभा के कक्ष में प्रवेश नहीं करेंगी, जब तक स्त्री गरिमा की रक्षा सुनिश्चित नहीं की जाएगी, फिर भी बाद में उन्होंने विधानसभा के सत्रों में हिस्सा लिया। लेकिन अब, जबकि वह मुख्यमंत्री हैं फोर्ट सेंट जॉर्ज वह भवन बन गया है जो राजनीतिक प्रतिशोध का प्रतिनिधित्व करता है। यही वजह रही कि जब उन्होंने नए भवन में जाने से इनकार कर दिया तो ज्यादा आश्चर्य नहीं हुआ। On 25 March 1989, quoted as one of the worst incidents to have happened in the Tamil Nadu Legislative Assembly, there was heavy violence inside the house among the ruling DMK party members and the opposition. There were Jayalilatha tearing the budget report to be read by the ruling party. Mikes were broken and shoes were thrown by Jayalalithaa. At the peak of the situation, when Jayalalithaa was about to leave the house, which is seen by a section of the media as “not until I enter the house as a Chief Minister”. Though some sections of media term it as a theatrics launched by Jayalalithaa, it got a lot of media coverage and sympathy from the public. During the 1989 general elections, the ADMK allied with the Congress party and had a significant victory. The ADMK, under her leadership, won the by-elections in Marungapuri, Madurai East and Peranamallur assembly constituencies.

पहली बार मुख्यमंत्री बनी

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लेकिन जयललिता ने अपनी हार से विचलित हुए बगैर मज़बूती से पार्टी को चलाया. तमिलनाडु में श्रीलंका के तमिल चरमपंथियों की बढ़ती गतिविधियों को मुद्दा बनाकर उन्होंने 1991 में विधानसभा चुनाव लड़ा. 1991 में राजीव गांधी की हत्या हुई. इसके बाद चुनाव में जयललिता ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, जिसका उन्हें फायदा पहुंचा. लोगों में डीएमके के प्रति जबरदस्त गुस्सा था क्योंकि लोग उसे लिट्टे का समर्थक समझते थे. मुख्यमंत्री बनने के बाद जयललिता ने लिट्टे पर पाबंदी लगाने का अनुरोध किया, जिसे केंद्र सरकार ने मान लिया. हालांकि हिंदूवादी समझी जाती हैं लेकिन उन्होंने शिव सेना और बीजेपी की कार सेवा के खिलाफ बोला. In 1991, following the assassination of Rajiv Gandhi days before the elections, her alliance with the Indian National Congressenabled her to ride the wave of sympathy that gave the coalition victory. The ADMK alliance with the Congress won 225 out of the 234 seats contested and won all 40 constituencies in the centre. Re-elected to the assembly, she became the first elected female chief minister and the youngest ever chief minister of Tamil Nadu, serving the full tenure from 24 June 1991 to 12 May 1996.

बतौर मुख्यमंत्री उनका कार्यकाल कुछ इस प्रकार है:-

  1. पहला कार्यकाल- 24 जून 1991 से 12 मई 1996 तक
  2. दूसरा कार्यकाल- 14 मई 2001 से 21 सितंबर 2001 तक
  3. तीसरा कार्यकाल- 2 मार्च 2002 से 12 मई 2006 तक
  4. चौथा कार्यकाल- 16 मई 2011 से 27 सितंबर 2014 तक
  5. पांचवां कार्यकाल- 23 मई 2015 से 5 दिसंबर 2016 (मत्यु तक)

आयरन लेडी-

  • पार्टी के अंदर और सरकार में रहते हुए मुश्किल और कठोर फैसलों के लिए मशहूर जयललिता को तमिलनाडु में आयरन लेडी और तमिलनाडु की मार्गरेट थैचर भी कहा जाता है.

कठोर फैसले-

  • 2001 में वह दोबारा सत्ता में आईं. तब उन्होंने लॉटरी टिकट पर पाबंदी लगा दी.
  • हड़ताल पर जाने की वजह से दो लाख कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकाल दिया,
  • किसानों की मुफ्त बिजली पर रोक लगा दी, राशन की दुकानों में चावल की कीमत बढ़ा दी,
  • 5000 रुपये से ज्यादा कमाने वालों के राशन कार्ड खारिज कर दिए,
  • बस किराया बढ़ा दिया और मंदिरों में जानवरों की बलि पर रोक लगा दी.

Bigger than the Master– Till her first big victory in the polls, she wasn’t very confident of winning votes on her own. She always thought MGR was the talisman. She would say, “Vote for MGR, let’s bring back MGR’s rule.” But the 1991 landslide victory, in alliance with the Congress, gave her blinding self-confidence. From then, she saw herself as the winning face of the party. It came as a revelation to many that she had gradually pushed MGR to the background. There was always this fear inside her that without MGR she was a nobody. She had been terrified of being alienated from him, but now she had overcome her fears. This led to overconfidence and made her go berserk during her first term as chief minister. The gigantic cut-outs, people falling at her feet, the controversial wedding of her foster son, the scams—all this happened during her first term. She behaved maturely in her second term.

Keeping out the past– I like to see Jayalalitha’s life as a mansion in which she kept shutting one door after the other. She completely disassociated herself from her brother’s family, her aunts and all her remaining blood relatives. Even her sister-in-law was unable to explain to me why she did so. In some of her writing of the early 1970s, she speaks fondly of her brother. But she no longer maintains contacts with family or friends from the early times.

She underwent another important transformation. When she entered politics, she completely deglamorised herself. It was as if she wanted to shut the door on the “actress” chapter of her life. I don’t know if, in her very private moments, she relives those memories. I wonder because she is also a creative person, having written a novel in Tamil, and therefore cannot be devoid of sensitivity. It is intriguing, therefore, how she may be dealing with her memories of being an actress and with memeories of people from her early years. Friends have tried to contact her, but she has not responded. They have gone to her house to invite her to the weddings of sons or daughters, but she has never responded.

People with a film star past are usually never without make-up. Not Jayalalitha. No hint or trace that she was once a glamorous star. This adds to my theory about her shutting doors on the past. She knew early on that women or film stars were not respected. Politicians used to often say that, after all, she was an actress, and when she gave her first political speech in Cuddalore, she faced taunts of “cabaret dancer”. One has to link her deglamorisation with those humiliations.

The Banyan Tree– Jayalalitha’s only friend is Sashikala. When they met, Sashikala was running a video cassette shop, and Jayalalitha would borrow videos on rental. Somehow, she took a liking to her. Nobody knows how their relationship became so strong. In fact, only Sashikala can write a biography of Jayalalitha. She has remained loyal to her, not turning approver against Jayalalitha even when she was jailed. Jayalalitha has said that Sashikala came to help her and has become more than a sister. She says people with a family have a lot of relatives to take care of them, but she doesn’t have any. Sashikala had filled the gap. Sashikala even sacrificed her husband Natarajan for Jayalalitha’s sake. But that’s a different story.

Survivor Queen– As I studied Jayalalitha’s life, I started empathising with her. I started looking at it from a gender perspective. As a woman, I could see how she must have felt betrayed. In the film world, they tried to destroy her by not allowing her to be paired with MGR; they tried that again when she entered politics. These things wouldn’t have happened if she were not a woman. We should remember that she came to politics without a pedigree. I realised as I talked to people about her how difficult it must have been for a woman to survive in the crude, male-dominated and sexist politics of Tamil Nadu. She once described her feelings with passion during an election campaign: “I stand before you having come swimming in the fire of life.”

Political Career

  • 1983 Appointed propaganda secretary of AIADMK
  • 1984 Nominated to the Rajya Sabha. MGR hospitalised in the US following a stroke. He also undergoes a kidney transplant. Jayalalitha writes to then prime minister Rajiv Gandhi and Tamil Nadu governor, S.L. Khurana, saying she should be made interim chief minister in MGR’s absence. This upsets MGR.
  • 1985 MGR returns from the US
  • 1986 Forms Jayalalitha Peravai (Conference), a parallel outfit. Sacked from her AIADMK post.
  • 1987 MGR passes away.
  • 1988 AIADMK splits into two factions. One backs MGR’s widow Janaki and the other, Jayalalitha. Jaya elected MLA.
  • 1989 Alleges her saree was pulled in the assembly by DMK minister
  • 1991 Wins general elections in alliance with the Congress. Made Tamil Nadu CM.
  • 1992 Acid thrown at IAS officer Chandralekha, allegedly over SPIC disinvestment, hits national headlines. Lawyer Shanmuga Sundaram of DMK brutally beaten up in 1993.
  • 1995 Presides over controversial lavish wedding of foster-son V. Sudhakaran, bosom buddy Sashikala’s nephew
  • 1996 Loses power to the DMK
  • 2001 Did not contest elections because of her entanglement in corruption cases. But AIADMK returns to power with a huge majority; becomes chief minister. After SC strikes down her appointment, O. Paneerselvan named interim CM.
  • 2003 Supreme Court acquits her. Contests mid-term poll and wins. Becomes CM again.
  • 2004 Case filed against The Hindu for breach of privilege of state assembly turns into a freedom of expression issue
  • 2004 Shankaracharya of the Kanchi Kamakoti Peetham arrested after the murder of a math ex-accountant
  • 2006 Loses the elections. DMK comes to power.

Goddess, Me

  • Senior leaders routinely prostrate themselves at her feet, notwithstanding their age and political standing
  • Newspaper advertisements put out by partymen describe her as the “lighthouse of peninsular India” and the godmother and saviour of Tamils
  • A party secretary of Madras once declared himself dead and went through the cremation rites to bring her prosperity
  • A woman party MLA with supporters dressed only in neem leaves went in procession to a temple outside Chennai to ward off evil spirits from their leader
  • A minister in her cabinet ate rice served on the ground at a temple to ensure a long life for the Puratchi Thalaivi

Colour of corruption

  • TANSI land deal case: Land acquired for state body sans public interest. Jaya Publications and Sasi enterprises gained Rs 3.5 crore and Rs 55.88 lakh.
  • Coal import case: Inferior grade coal imported for state electricity board at escalated prices. Fraud put at Rs 117 crore.
  • Pleasant Stay Hotel case: Kodaikanal: all objections by local bodies overruled by Jayalalitha as CM
  • 40 properties across Chennai belonging to friend Sashikala and her relatives was identified by investigating agencies.

Trapeze artiste

  • AIADMK wins 1991 poll in alliance with Congress following Rajiv Gandhi’s assassination
  • Ties up with BJP in 1998, but pulls out after Vajpayee declines to bail her out of court cases
  • Attends Sonia Gandhi’s famous tea party in 1999 but slams her foreign origin in 2002
  • Cosies up to Congress after 2004 debacle, but BJP now said to be again interested in her

जयललिता से जुड़े विवाद

विवादों से जयललिता का नाता उनके पहले कार्यकाल से ही शुरू हो गया था. जयललिता को निम्नलिखित आरोपों का सामना करना पड़ा है:

पहली बार मुख्यमंत्री रहते हुए जयललिता पर कई आरोप लगे- उन्होंने कभी शादी नहीं की लेकिन अपने दत्तक पुत्र वीएन सुधाकरण की शादी पर पानी की तरह पैसे बहाए. उसके बाद उन्होंने उस वक्त के प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव को “नकारा” घोषित कर दिया.

  • तांसी ज़मीन घोटाला- विपक्षी पार्टियों ने उन पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए. 1996 के चुनावों में उनके ख़िलाफ़ पूरे राज्य में लहर चल पड़ी. डीएमके एक बार फिर बहुमत के साथ सत्ता में आई. इसके बाद जयललिता, उनकी मित्र शशिकला और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज किए गए. तांसी ज़मीन घोटाले में उन्हें दोषी पाया गया और सज़ा हुई. लेकिन उन्होंने इसके ख़िलाफ़ अपील की और उनकी सज़ा की तामील पर रोक लगा दी गई.

o   आरोप से मुक्त कर दिया गया- दिसंबर 2001 में मद्रास हाईकोर्ट ने तांसी और प्लेज़ेंट स्टे होटल दोनों मामलों में जयललिता को सभी अभियोगों से बरी कर दिया.

  • अवैध तरीके से सरकारी जमीन हथियाने- मुख्यमंत्री पद के दूसरे कार्यकाल के दौरान, वर्ष 2001 में जयललिता को अवैध तरीके से सरकारी जमीन हथियाने के चलते पांच वर्ष के कारावास की सजा भी सुनाई गई. इस सजा के विरोध में जयललिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, कोई ऐसा व्यक्ति जिसके खिलाफ किसी भी कोर्ट में आपराधिक मामला चल रहा हो और जिसे दो वर्ष से अधिक की सजा सुनाई जा चुकी हो, वह मुख्यमंत्री पद के लिए योग्य नहीं होता है. ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार जयललिता के खिलाफ quo warrant (किस अधिकार से रिट) जारी किया गया. परिणामस्वरूप जयललिता को अपना पद छोड़ना पड़ा.

o   आरोप से मुक्त कर दिया गया- मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दिए जाने के बाद उन्हीं की पार्टी के ओ. पनीरसेल्वम को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनाया गया जिन पर जयललिता के इशारों पर ही काम करने जैसे आरोप लगते रहे. 2003 में जयललिता को कोर्ट ने आरोप से मुक्त कर दिया. जिसके बाद जयललिता के लिए मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया. अंदिपत्ति के मध्यावधि चुनावों में जयललिता बहुत बड़े अंतर से चुनाव जीत गईं और तीसरी बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं. साथ ही कोर्ट ने उन्हें पहले कार्यकाल से चलते आ रहे आरोपों से भी वर्ष 2011 में बरी कर दिया.

अवैध संपत्ति के आरोप में केस दर्ज

  • साल 1991 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जयललिता ने तीन करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की थी। मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने बस एक रुपए महीना वेतन पर काम किया। उनके ख़िलाफ़ आरोप यह है की उनके पास उनके कार्यकाल की समाप्ति तक 66.6 करोड़ रुपए की संपत्ति कैसे हो गई।
  • छापे के दौरान मिला था 28 किलो सोना- 1996 में जब जयललिता के घर पर छापा मारा गया था तब 896 किलो चांदी, 28 किलो सोना, 10,500 साडि़यां, 750 जूते और 91 घडि़यां बरामद हुई थीं।
  • आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोप लगा कि चेन्नई और इसके बढ़ते उपनगरों में उनके पास कई मकान, हैदराबाद में फार्म हाउस, नीलगिरि में चाय बागान भी हैं। यह सब रिजर्व बैंक की बेंगलुरू शाखा में जमा है।

जयललिता, शशिकला, दत्तक पुत्र सुधाकरन और इलावर्सी काले धन से 32 कंपनियां शुरू की

  • आरोप है कि जयललिता, उनकी करीबी साथी शशिकला, उनके दत्तक पुत्र सुधाकरन (जिन्हें उन्होंने बाद में त्याग दिया), शशीकला की भांजी इलावर्सी ने जयललिता के काले धन से 32 कंपनियां शुरू कीं।

एक मुक़दमा, 18 साल, 15 पेंच

जयललिता के ऊपर 18 साल पहले आय से अधिक संपत्ति के मामलों में एफ़आईआर दर्ज की गई थी. यह मामला तब दर्ज हुआ था जब वो पहली बार मुख्यमंत्री बनी थीं. अब वो तीसरी बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री हैं. ये हैं इस विवादास्पद मामले के 15 बड़े पेंच जिनकी काट जयललिता को अपना राजनीतिक जीवन बनाए रखने के लिए ढूंढनी ही होगी.

सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से मामले की निष्पक्ष सुनवाई के लिए बंगलौर की विशेष अदालत का गठन नवंबर 2003 में किया गया था फ़ैसला इस बात पर होना था कि क्या जयललिता के पास से 1991-96 के दौरान 66.6 करोड़ रुपए की संपत्ति उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक थी?

  1. आय से अधिक संपत्ति का मामला 18 साल पहले दायर किया गया था.
  1. साल 1991 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जयललिता ने तीन करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की थी. मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने बस एक रुपए महीना वेतन पर काम किया. उनके ख़िलाफ़ आरोप यह है की उनके पास उनके कार्यकाल की समाप्ति तक 66.6 करोड़ रुपए की संपत्ति कैसे हो गई.
  1. आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोप लगा कि चेन्नई और इसके बढ़ते उपनगरों में उनके पास कई मकान, हैदराबाद में फ़ार्म हाउस, नीलगिरि में चाय बागान, 28 किलो सोना, 800 किलो चांदी, 10500 साड़ियां, 750 जोड़ी जूते, 91 घड़ियां. यह सब रिज़र्व बैंक की बंगलौर शाखा में जमा है. आरोप है कि जयललिता, उनकी क़रीबी साथी शशिकला, उनके दत्तक पुत्र सुधाकरन (जिन्हें उन्होंने बाद में त्याग दिया), शशीकला की भांजी इलावर्सी ने जयललिता के काले धन से 32 कंपनियां शुरू कीं.
  1. जयललिता और सभी अभियुक्तों ने आरोपों को ग़लत बताया. जयललिता ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया और शशिकला ने दावा किया कि उनके परिवार के व्यापार के बारे में जयललिता को कुछ भी नहीं पता था.
  1. मुक़दमा 1997 में शुरू हुआ. साल 2002 में एक दूसरी एफ़आईआर में जयललिता पर लंदन में एक होटल की मालिक होने के आरोप लगाए गए. इस मामले को बाद में लंदन होटल केस के रूप में जाना गया.
  1. मई 2001 में जयललिता दोबारा सत्ता में आईँ. उनके मामलों में एक नया जांच अधिकारी आया जिसने नए सिरे से गवाहों के बयान लिए.
  1. सितंबर 2001 में जयललिता की विधानसभा की सदस्यता निरस्त कर दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के इस फ़ैसले को बरक़रार रखा. अदालत ने उन्हें कोडईकनाल में प्लेज़ेंट होटल को नियमों के विरुद्ध भवन निर्माण की अनुमति देने का दोषी पाया. उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया और ओ पनीरसेल्वम को अपनी जगह मुख्यमंत्री बना दिया. छह महीने बाद वो उपचुनाव जीत कर फिर मुख्यमंत्री बन गईं.
  1. आय से ज़्यादा संपत्ति के मामले में 259 में से 76 गवाहों ने अपने बयान वापस ले लिए पर सरकारी वकील ने उनके ख़िलाफ़ किसी कार्रवाई की अपील नहीं की और जयललिता अदालत में पेश भी नहीं हुईं. अदालत ने उन्हें लिखित उत्तर देने की अनुमति भी दे दी.
  1. इसके बाद डीएमके नेता के अंबज़गन सुप्रीम कोर्ट में चले गए और मामले की सुनवाई को तमिलनाडु से बाहर कराने की मांग की. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई को पड़ोसी राज्य कर्नाटक में भेज दिया और विशेष अदालत भी बना दी.
  1. लंदन होटल केस और आय से अधिक सम्पत्ति के मामले को चार सालों की क़ानूनी लड़ाई के बाद अलग-अलग कर दिया गया.
  1. इस बीच 2003- 2005 के बीच बंगलौर अदालत के लिए अदालती दस्तावेज़ों का तमिल से अंग्रेज़ी में अनुवाद होता रहा. पांच साल बाद जयललिता ने तमाम दस्तावेज़ों को रद्द कर नए सिरे से अनुवाद कराने की अपील की जिसे हाई कोर्ट से ठुकरा दिया गया.
  1. साल 2011 में जयललिता के वकीलों ने अनुवादों में सुधार की मांग की. साथ ही उन्होंने विशेषज्ञ अनुवादक की भी मांग की ताकि गवाहों के साथ जिरह की जा सके. अदालत ने अनुवादक नियुक्त किया तो जयललिता के वकीलों ने अनुवादक से ही जिरह करने की अनुमति चाही. बाद में उन्होंने अनुवाद में ग़लतियों को सुधरवाने के लिए छह महीने का समय भी माँगा.
  1. कभी किसी कारण से कभी किसी कारण से जयललिता के वकील अलग-अलग अदालतों में आवेदन देते रहे.
  1. विशेष अदालत में कार्रवाई रुकवाने के लिए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई बार आवेदन लगाए गए. 2013 में विशेष अदालत में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नियुक्त वकील ने अपने ऊपर लगातार डाले जा रहे दबाव की बात करते हुए हुए इस्तीफ़ा दे दिया. कर्नाटक की तात्कालिक भाजपा सरकार ने नया सरकारी वकील नियुक्त कर दिया, बाद की कांग्रेस सरकार ने उस नए वकील को हटाया तो जयललिता अदालत पहुँच गईं और उसी वकील को दोबारा नियुक्त करने की मांग की.
  1. जयललिता को इस बीच विशेष अदालत ने ख़ुद हाज़िर होने को कहा ताकि उनसे सवाल जवाब किए जा सकें. वो सुपीम कोर्ट चली गईं जहाँ उनकी बात नहीं सुनी गई. फिर उन्होंने सुरक्षा का सवाल उठाया तो कर्नाटक को विशेष अदालत को दूसरी इमारत में भेजना पड़ा.

घटनाक्रम पर एक नजर :

  • 14 जून 1996 : तत्कालीन जनता पार्टी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने जयललिता के पास ज्ञात स्त्रोतों से अधिक संपत्ति का आरोप लगाया।
  • 1991-1996 तक सत्ता में रहने के बाद जब जयललिता ने पद छोड़ा तो उनकी संपत्ति बढ़कर 66.65 करोड़ रुपये हो गयी थी, जो उनके ज्ञात स्रोत से अधिक थी।
  • 18 सितंबर 1996 : पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और जांच की गयी, जिसमें हैदराबाद सहित विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की कार्रवाई भी की गयी।
  • 7 दिसंबर, 1996 : जयललिता गिरफ्तार।
  • 1997 : अदालत ने जयललिता, वी. एन. सुधाकरन, वी. के. शशिकला और जे. इलावरासी के विरुद्ध आरोप तय किए।
  • मई 2001 : राज्य विधानसभा चुनाव में एआइएडीएमके की जीत के बाद जयललिता मुख्यमंत्री बनीं।
  • 21 सितंबर 2001 : तमिलनाडु स्माल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन संबंधी धांधली में संलिप्तता के कारण मुख्यमंत्री पद छोड़ा।
  • 2002 : पुनः मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुईं।
  • 2003 : डीएमके नेता के. अनबक्षगन ने मामले को चेन्नई से बाहर स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
  • 18 नवंबर 2013 : सुप्रीम कोर्ट ने मामले को बेंगलूर स्थानांतरित करने का आदेश दिया। वहां विशेष अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई।
  • 19 फरवरी 2005 : कर्नाटक सरकार ने बी. वी. आचार्य को विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) नियुक्त किया।
  • 2011 : विधानसभा चुनावों में जीत के बाद जयललिता फिर मुख्यमंत्री बनीं।
  • अक्टूबर/नवंबर 2011 : जयललिता अदालत के समक्ष पेश हुईं और 1,339 सवालों के जवाब दिए।
  • 12 अगस्त 2012 : आचार्य ने एसपीपी पद से इस्तीफा दिया। जनवरी, 2013 में इस्तीफा स्वीकृत।
  • 2 फरवरी 2013 : कर्नाटक सरकार ने जी. भवानी सिंह को एसपीपी नियुक्त किया।
  • 28 अगस्त 2014 : सुनवाई पूरी हुई और फैसले की तारीख 20 सितंबर, 2014 तय की गई। बाद में इसे बढ़ाकर 27 सितंबर किया गया।
  • 27 सितंबर 2014 : अदालत ने जयललिता समेत चारों को दोषी करार दिया।

27 सितंबर 2014- जयललिता को 4 साल की सजा, जाना होगा जेल आय से अधिक संपत्ति के मामले में बेंगलुरु की विशेष अदालत ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता को दोषी करार देते हुए चार साल की सजा सुनाई है। उन पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस सजा के साथ ही जयललिता की मुख्यमंत्री की कुर्सी भी चली गई है और उन्हें जेल जाना होगा। सजा सुनने के बाद जयललिता ने बेचैनी की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें चेकअप के लिए बेंगलुरु के हॉस्पिटल ले जाया गया। जयललिता को इस सजा से राहत के लिए अब हाई कोर्ट में अपील करनी होगी।

o   इस सजा के बाद जयललिता 10 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। स्पेशल कोर्ट ने इस मामले के अन्य आरोपियों जयललिता की दोस्त शशिकला, उनके तत्कालीन दत्तक पुत्र वी. एन. सुधाकरन तथा शशिकला के एक रिश्तेदार जे. इलावरासी को भी चार साल की सजा सुनाई। तीनों पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

IMAGES

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An early photograph of Jayalalitha from when she was new to films.

J Jayalalithaa

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http://www.pastpicture.com/download/Jayalalitha_as_a_Child1.jpg http://www.transcurrents.com/images/Jayalalitha_TC_0223.jpg

Rich legacy: (Clockwise from centre) Sarasa and Chitra Visveswaran; withJ. Jayalalitha and her mother Sandhya; Padma Subrahmanyan; C.V. Chandrasekar; Narasimhachari and Vasanthalakshmi; Sailaja; the Dhananjayans and Sudharani Raghupathy.Photos: By special arrangement, Kalaniketan Balu and archives.

Jayalalitha and her mother Sandhya

RICH LEGACY: (from left) K.J. Sarasa with J. Jayalalitha and her mother Sandhya, Raja Sulochana and other disciples. Photo: Kalanikethan Balu

RICH LEGACY: (from left) K.J. Sarasa with J. Jayalalitha and her mother Sandhya, Raja Sulochana and other disciples. Photo: Kalanikethan Balu

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A rare snap of baby Sridevi with Jayalalitha(Actor turned Politico). As a child artist, Sridevi did three films with politico Jayalalitha.

http://3.bp.blogspot.com/-i9kz0P99JK0/Tu4HEygzTNI/AAAAAAAAwNw/z5Jq9NLcwTM/s640/Jayalalitha+-+Rare+Photos+%25284%2529.jpg

http://archives.deccanchronicle.com/sites/default/files/mediaimages/gallery/2013/Feb/7_10.jpg http://www.transcurrents.com/images/Jayalalitha_TC_0224_III.jpg

http://archives.deccanchronicle.com/sites/default/files/styles/article_node_view/public/19Sachu%20with%20Jaya%20madam_0.jpg

http://4.bp.blogspot.com/-tpCw8MOZ4is/Tu4HELMYgJI/AAAAAAAAwNo/Nol5w8t3o60/s640/Jayalalitha+-+Rare+Photos+%25283%2529.jpg

http://archives.deccanchronicle.com/sites/default/files/mediaimages/gallery/2013/Feb/008-.jpg

http://hindi.oneindia.in/img/2014/09/27-1411812753-jayalalithaa-604.jpg

http://2.bp.blogspot.com/-JLQSdKdkIwU/Tu4HLUTeSZI/AAAAAAAAwOk/TS4CtsgRHd4/s640/Jayalalitha+-+Rare+Photos+%252811%2529.jpg

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एमजीआर का योगदान

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http://pgresize.outlookindia.com/images/gallery/20110309/jayalalitha_vajpayee_20110321.jpg.ashx?quality=60&width=550http://media2.intoday.in/indiatoday/images/Photo_gallery/modi9_122612051912.jpg

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About drsandeepkohli

तमाम लोगों को अपनी-अपनी मंजीलें मिली.. कमबख्त दिल हमारा ही हैं जो अब भी सफ़र में हैं… पत्रकार बनने की कोशिश, कभी लगा सफ़ल हुआ तो कभी लगा …..??? चौदह साल हो गए पत्रकार बनने की कोशिश करते। देश के सर्वोतम संस्थान (आईआईएमसी) से 2003 में पत्रकारिता की। इस क्षेत्र में कूदने से पहले शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा था, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में रिसर्च कर रहा था। साथ ही भारतीय सिविल सेवा परिक्षा की तैयारी में रात-दिन जुटा रहता था। लगा एक दिन सफ़ल हो जाऊंगा। तभी भारतीय जनसंचार संस्थान की प्रारंभिक परिक्षा में उर्तीण हो गया। बस यहीं से सब कुछ बदल गया। दिल्ली में रहता हूं। यहीं पला बड़ा, यहीं घर बसा। और यहां के बड़े मीडिया संस्थान में पत्रकारिता जैसा कुछ करने की कोशिश कर रहा हूं। इतने सालों से इस क्षेत्र में टिके रहने का एक बड़ा और अहम कारण है कि पहले ही साल मुझे मेरे वरिष्ठों ने समझा दिया गया था कि हलवाई बनो। जैसा मालिक कहे वैसा पकवान बनाओ। सो वैसा ही बना रहा हूं, कभी मीठा तो कभी खट्टा तो कभी नमकीन, इसमें कभी-कभी कड़वापन भी आ जाता है। सफ़र ज्यादा लम्बा नहीं, इन चौदह सालों के दरम्यां कई न्यूज़ चैनलों (जी न्यूज़, इंडिया टीवी, एनडीटीवी, आजतक, इंडिया न्यूज़, न्यूज़ एक्सप्रेस, न्यूज़24) से गुजरना हुआ। सभी को गहराई से देखने और परखने का मौका मिला। कई अनुभव अच्छे रहे तो कई कड़वे। पत्रकारों को ‘क़लम का सिपाही’ कहा जाता है, क़लम का पत्रकार तो नहीं बन पाया, हां ‘कीबोर्ड का पत्रकार’ जरूर बन गया। अब इस कंप्यूटर युग में कीबोर्ड का पत्रकार कहलाने से गुरेज़ नही। ख़बरों की लत ऐसी कि छोड़ना मुश्किल। अब मुश्किल भी क्यों न हो? सारा दिन तो ख़बरों में ही निकलता है। इसके अलावा अगर कुछ पसंद है तो अच्छे दोस्त बनना उनके साथ खाना, पीना, और मुंह की खुजली दूर करना (बुद्धिजीवियों की भाषा में विचार-विमर्श)। पर समस्या यह है कि हिन्दुस्तान में मुंह की खुजली दूर करने वाले (ज्यादा खुजली हो जाती है तो लिखना शुरू कर देते हैं… साथ-साथ उंगली भी करते हैं) तो प्रचुर मात्रा में मिल जाएंगे लेकिन दोस्त बहुत मुश्किल से मिलते हैं। ब्लॉगिंग का शौक कोई नया नहीं है बीच-बीच में भूत चढ़ जाता है। वैसे भी ब्लॉगिंग कम और दोस्तों को रिसर्च उपलब्ध कराने में मजा आता है। रिसर्च अलग-अलग अखबारों, विभिन्न वेवसाइटों और ब्लॉग से लिया होता है। किसी भी मित्र को जरूरत हो किसी तरह की रिसर्च की… तो जरूर संपर्क कर सकते हैं।
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