US Presidential Election 2016: कौन बनेगा दुनिया का सबसे ताकतवर शख्स… Hillary Clinton या Donald Trump

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8 नवंबर को अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव होने जा रहा है। दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क की कमान किसके हाथ आएगी, इसका खुलासा होने में सिर्फ 72 घंटे बचे हैं। इस बार रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के बीच कड़ा मुकाबला है। ताजा चुनावी सर्वेक्षणों में दोनों के बीच सिर्फ एक प्वाइंट का अंतर रह गया है। बेशक हिलेरी आगे हैं लेकिन ट्रंप को भी पीछे नहीं समझा जा सकता। मुकाबला कितना कड़ा है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति बराक ओबामा कल ही नार्थ कैरोलिना में अमेरिकी जनता से अपील की है कि “मुकाबला करीबी होने जा रहा है, क्लिंटन की मदद करें”। वैसे दोनों ही उम्मीदवारों अपनी जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। दुनिया की सबसे बड़े महाद्वीप के सबसे शक्तिशाली देश की सबसे ताकतवर कुर्सी पर विराजमान होना भी कोई आसान काम नहीं है इसका रास्ता काफी लंबा, पेचीदा और घुमावदार है। ऐसे में आज हम आपको यहां बताने जा रहे हैं कि अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव किस तरह होता है, किस तरह चुना जाता है दुनिया का सबसे शक्तिशाली शख्स-

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अमेरिकी संविधान में है पूरी प्रक्रिया का जिर्क…
– अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव संविधान प्रदत्त प्रक्रिया है।
– अमेरिकी संविधान के मुताबिक हर चार साल में राष्ट्रपति चुना जाता है।
– संविधान के अनुच्छेद-2 में राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया के बारे में जिक्र है।
– आजादी के 227 साल के इतिहास में इस प्रकिया में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है।
– संविधान में ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव की व्यवस्था है।
– यह तरीका तब वजूद में आया जब संविधान निर्माताओं को दो धड़ों के बीच समझौता हुआ।
– अमेरिकी संविधान निर्माताओं का एक धड़ा संसद को राष्ट्रपति चुनने के अधिकार के पक्ष में था।
– वहीं दूसरा धड़ा जनता की सीधी वोटिंग के जरिए राष्ट्रपति चुने जाने के हक में था।
– ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ को इन दोनों धड़ों की अपेक्षाओं की बीच की एक कड़ी माना गया।

कौन लड सकता है चुनाव…
– अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव लडने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 35 वर्ष है।
– राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का अमेरिकी नागरिक होना भी अनिवार्य है।
– साथ ही चुनाव के 14 साल पूर्व से उसे अमेरिका में निवास करना आवश्यक है।
– अमेरिकी राष्ट्रपति केवल दो कार्यकाल (आठ साल) के लिए अपने पद पर रह सकता है।
– अगर कोई राष्ट्रपति के लिए अर्हता पूर्ण नहीं करता तो वह उपराष्ट्रपति भी नहीं बन सकता।
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चुनाव की प्रक्रिया जनवरी से नवंबर तक चलती है…
– अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया जनवरी में शुरू होकर नवंबर में मतदान तक चलती है।
– नवंबर महीने के पहले पड़ने वाले मंगलवार को वोटिंग होती है।
– 20 जनवरी को इनॉग्रेशन डे पर नवनिर्वाचित राष्ट्रपति शपथ ग्रहण करते हैं।

दो दलों- रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक के बीच होता है मुकाबला…
– अमेरिका में भले ही बहुदलीय प्रणाली है, लेकिन दो ही दल डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन के बीच मुकाबला होता है।
– इन दोनों दलों के अलावा लिब्रेटेरियन, ग्रीन और कांस्टीट्यूशन पार्टी के उम्मीदवार भी किस्मत आजमाते हैं।
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पहला दौर- प्राइमरी से शुरू होती है चुनावी प्रक्रिया…
– राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से ‘प्राइमरी’ चुनाव के साथ जनवरी में शुरू होती है।
– प्रक्रिया जून तक चलती है, इस दौरान पार्टियां राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों की सूची जारी करती है।
– इसके बाद अमेरिका के 50 राज्यों के वोटर पार्टी के डेलिगेट या प्रतिनिधि चुनते हैं।
– फिर ये डेलिगेट अपनी-अपनी पार्टियों के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को चुनते है।
– प्राइमरी स्तर पर पार्टी डेलिगेट चुनने के लिए अमेरिकी संविधान में कोई लिखित निर्देश नहीं है।

क्या है प्राइमरी और कॉकस…
– प्राइमरी और कॉकस के जरिए पहले पार्टी डेलिगेट चुने जाते हैं।
– फिर ये डेलिगेट पार्टी के कैंडिडेट का चुनाव करते हैं।
– प्राइमरी का मतलब है कैंडिडेट के लिए पोलिंग बूथ पर जाकर वोट करना।
– कॉकस बिल्कुल अलग है इसमें पार्टी के सदस्य सार्वजनिक स्थानों पर जमा होते हैं।
– उम्मीदवार के नाम पर चर्चा कर मौजूद लोग हाथ उठाकर डेलिगेट का चयन करते हैं।

दूसरा दौर- मार्च से जुलाई तक का महीना रहता है अहम…
– मार्च का महीना राजनीतिक गतिविधियों को लिहाज से सबसे व्यस्त महीना होता है।
– 26 राज्यों में 15 दिनों के भीतर बचे हुए कैंडिडेट के लिए वोटिंग होती है।
– इस महीने में डिबेट और कैंपेन अपने चरम शिखर पर होता है।
– मार्च के पहले मंगलवार को 12 राज्यों में उम्मीदवार पसंद करने के लिए प्राइमरी होती है।
– मार्च के पहले मंगलवार को ‘सुपर ट्यूज डे’ भी कहा जाता है।
– जुलाई में दोनों पार्टियां आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति उम्मीदवारों की घोषणा करती है।
– इसके बाद दोनों उम्मीदवारों की रीयल कैंपेन शुरू होती है, जो देश भर में चलता है।
– वोटर्स से सीधा संपर्क साधा जाचा है, इसी दौरान उप राष्ट्रपति पर भी स्थिति साफ हो जाती है।
– डेमोक्रेटिक पार्टी के 4051 डेलिगेट्स में से हिलेरी को 2842 का समर्थन हासिल हुआ था।
– रिपब्लिकन पार्टी के 2472 डेलिगेट्स में से ट्रंप को 1441 डेलिगेट्स का हासिल हुआ था।

तीसरा दौर- इसमें शुरू होता है असल चुनाव प्रचार…
– इस दौर की शुरुआत चुनाव प्रचार से होती है, दोनों पार्टियों के उम्मीदवार समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं।
– उम्मीदवार अलग-अलग राज्यों में जाकर चुनाव प्रचार करते हैं, रैलियों को संबोधित करते हैं।
– आखिरी 6 हफ्तों में दोनों कैंडिडेट 3 टीवी डिबेट में शामिल होते हैं और जनता से जुड़े सवालों का जवाब देते हैं।

आखिरी दौर में स्विंग स्टेट्स पर रहता है उम्मीदवारों का पूरा जोर…
– आखिरी हफ्ते में दोनों उम्मीदवार अपनी पूरी ताकत ‘स्विंग स्टेट्स’ के वोटर्स को लुभाने में झोंक देते हैं।
– स्विंग स्टेट्स वे राज्य होते हैं जहां के मतदाता दोनों पार्टियों को बीच कमोबेश बराबरी में बंटे होते हैं।
– इस वजह से उम्मीदवार इन राज्यों में जमकर प्रचार करते हैं, ताकि मतदाताओं को अपने पक्ष में कर सकें।
– ऐतिहासिक रूप से फ्लोरिडा, ओहायो और पेंसिल्वेनिया राष्ट्रपति चुनाव में स्विंग स्टेट कहे जाते हैं।
– लेकिन 2016 के चुनाव में एरिजोना, फ्लोरिडा, नॉर्थ करोलिना, ओहियो और वर्जिनिया स्विंग स्टेट्स हैं।

कितने पैसे खर्च होते हैं इन चुनावों में…
– अमेरिका का चुनाव बेहद खर्चीला होता है क्योंकि इसकी प्रक्रिया बहुत लंबी है।
– दूसरे देशों से अलग अमेरिका में चुनावी खर्च पर कोई सीमा तय नहीं की गई है।
– रैलियां, टीवी विज्ञापन और कैंपेन के लिए कार्यकर्ताओं पर भारी पैसे खर्च किए जाते हैं।
– एक अनुमान के मुताबिक चुनाव में करीब एक बिलियन डॉलर(6700 करोड़ रुपए)खर्च होता है।
– हालांकि इस बार कहा जा रहा है कि चुनावों में 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च हो चुका है।
– इस हिसाब से रोजाना प्रचार में 18 करोड़ और हर मिनट पर 12 हजार खर्च हो रहे हैं।

कैसे होता है अमेरिकी राष्ट्रपति का चयन…
– चुनाव की अंतिम प्रक्रिया में ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ राष्ट्रपति पद के लिए मतदान करता है।
– ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ का मतलब है कि जनता सीधे राष्ट्रपति का चुनाव नहीं करती है।
– बल्कि मतदाता पहले इलेक्टर्स को चुनते हैं फिर इलेक्टर्स राष्ट्रपति का चुनाव करते है।
– मतदाता जिस इलेक्टर्स को चुनता है वो राष्ट्रपति पद के किसी न किसी उम्मीदवार का समर्थक होता है।
– इलेक्शन डे के मतदान का तरीका भी प्राइमरी चुनाव के जैसा ही होता है।
– जैसे प्राइमरी में डेलीगेट चुने जाते हैं ठीक वैसे ही इलेक्शन डे में इलेक्टर्स चुने जाते हैं।

इलेक्ट्रोरल कॉलेज का गणित…
– इलेक्ट्रोरल कॉलेज में 538 इलेक्टर्स होते हैं, दरअसल ये संख्या अमेरिका के दोनों सदनों का जोड़ है।
– अमेरिकी सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा में 435 सदस्य होते हैं।
– अमेरिकी उच्च सदन सीनेट में 100 सदस्य होते हैं, इन दोनों का जोड़ 535 है।
– बाकि 3 सदस्य डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया से आते हैं जिसे अमेरिका का 51वां राज्य भी कहा जाता है।
– हालांकि वॉशिंगटन डीसी या डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया राज्य नहीं है लेकिन उसे भी तीन वोट मिले हैं।
– प्रत्येक राज्य से उतने ही इलेक्टर्स चुने जाते हैं, जितने उस राज्य से प्रतिनिधि सभा और सीनेट के सदस्य होते हैं।
– इस तरह कुल 538 इलेक्टर्स अमेरिकी राष्ट्रपति चुनते हैं।
– सबसे ज्यादा इलेक्टर्स कैलीफॉर्निया में 55, टेक्सास में 38, न्यूयॉर्क-फ्लोरिडा में 29 और पेनसिलवेनिया-इलिनोइस में 20 हैं।

अमेरिका में चुनाव का दिन भी होता है खास…
– अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का दिन भी बेहद खास माना जाता है।
– चुनावी साल के दौरान नवंबर महीने में पड़ने वाले पहले मंगलवार को मतदान होता है।
– इसे सुपर ट्यूस-डे कहा जाता है सुपर ट्यूस-डे अमेरिकी चुनाव की परंपरा से जुड़ा है।
– सुपर ट्यूस-डे की परंपरा संविधान में नहीं लिखी बल्कि 1845 के बाद परंपरा शुरू हुई है।
– 1845 से ही राष्ट्रपति चुनाव नंवबर के पहले सोमवार के अगले दिन यानी मंगलवार को होते रहे हैं।
– 19वीं सदी में अमरीका कृषि प्रधान देश था किसानों को मतदान केंद्र तक पहुंचने में काफी समय लगता था।
– अमेरिका का क्षेत्रफल 98.33 लाख वर्ग किलोमीटर है, लोग दूर दराज के क्षेत्रों में रहते हैं।
– उस समय परिवहन के साधन आज की तरह नहीं थे।
– लोग शनिवार को काम कर रविवार को वोट डालने के लिए चलते थे।
– ऐसे में सोमवार को वोट देने के लिए पहुचना संभव नहीं होता था, इसलिए मंगलवार का दिन रखा गया।

किसके पक्ष में क्या रूझान…

Race Poll model Hillary Clinton
Democratic
Donald Trump
Republican
Gary Johnson
Libertarian
Jill Stein
Green
Leading by
(points)
Two-way 270 to Win 47.8% 42.0% N/A 5.8
BBC 46.0% 44.0% 2.0
Election Projection 46.9% 44.7% 2.2
HuffPost Pollster 47.8% 42.3% 5.5
New York Times 45.4% 42.8% 2.6
Real Clear Politics 46.4% 44.8% 1.6
TPM Polltracker 45.4% 43.5% 1.9
Three-way FiveThirtyEight 45.0% 42.3% 4.3% N/A 2.7
HuffPost Pollster 45.7% 40.2% 5.1% 5.5
New York Times 45.0% 42.2% 5.0% 2.8
TPM Polltracker 45.1% 42.5% 4.6% 2.6
Four-way 270 to Win 45.7% 40.3% 5.7% 2.7% 5.4
Election Projection 45.2% 42.5% 4.8% 2.2% 2.7
Real Clear Politics 45.0% 42.7% 4.7% 2.1% 2.3
CNN Poll of Polls 47.0% 42.0% 4.0% 2.0% 5.0
TPM Polltracker 45.2% 42.7% 4.6% 2.4% 2.5

अमेरिकी चुनाव राष्ट्रपति से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें..
– अमेरिका के 227 साल के इतिहास में 44 राष्ट्रपति बन चुके हैं।
– बराक हुसैन ओबामा अमेरिका के पहले अश्वेत (अफ्रीकी अमेरिकन) राष्ट्रपति हैं।
– अब तक बने राष्ट्रपतियों में 31 राष्ट्रपति सेना में काम कर चुके हैं
– 44 राष्ट्रपतियों में से 13 दो बार राष्ट्रपति बन चुके हैं।
– 8 की पद पर रहते हुए मौत हुई, जिसमें 4 की हत्या हुई।
– अमेरिकी चुनाव में सिर्फ 8 बार ही निवर्तमान राष्ट्रपति हारे हैं।
– राष्ट्रपति पद के चुनाव सालों से केवल दो ही पार्टियों डेमोक्रेटिक और रिपब्लिक के इर्द गिर्द घूमती है।
– 1869 से देश का राष्ट्रपति डेमोक्रेट और रिपब्लिक प्रमुख पार्टियों से रहा है।
– डेमोक्रेटिक पार्टी का चुनाव चिन्ह गधा है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी का चुनाव चिन्ह हाथी।
– डंकी या गधा 1828 के राष्ट्रपति चुनावों के दौरान पोस्टर के जरिए प्रचार के लिए इस्तेमाल किया गया।
– डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एंड्रयू जैकसन ने इसे इस्तेमाल किया, क्योंकि उनके विपक्षी उन्हें इस नाम से बुलाते थे।
– इसके बाद डैमोक्रेटिक उम्मीदवार थॉमस नस्ट ने गधे का ही कार्टून अपने प्रचार में इस्तेमाल किया
– फिर 19वीं सदी के अंत तक ये पार्टी का लोकप्रिय चुनाव चिन्ह बन गया।
– रिपब्लिकन पार्टी का चुनाव चिन्ह हाथी की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है।
– पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के चुनावी अभियान में इसका इस्तेमाल हुआ था।
– इलिनॉय के एक स्थानीय अखबार ने हाथी का इस्तेमाल रिपब्लिकन पार्टी कैम्पेन के लिए किया।
– वजह शायद ये रही होगी कि हाथी शक्ति का प्रतीक होता है।
– अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए कोई भी दो बार से अधिक चुनाव नहीं लड़ सकता।
– लेकिन अपवाद के रूप में राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी रूजवेल्ट ने 1932-1945 तक लगातार चार बार चुनाव जीता।
– अमेरिका में काला चश्मा पहने नेताओं की तस्वीर खींचना लगभग असंभव है।
– क्योंकि नेता लोगों से आंख से आंख मिलाकर बात करते हैं।
– अमेरिका में चुनाव जीतने के बाद नवनियुक्त राष्ट्रपति के उद्घाटन भाषण देने की परंपरा है।
– सबसे लंबी स्पीच देने का रिकॉर्ड 1841 में राष्ट्रपति चुने गए विलियम एच. हैरीसन के नाम हैं।
– उन्होंने अपने भाषण में 8,445 शब्दों को इस्तेमाल किया।
– सबसे छोटा भाषण 1793 में देश के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिगटन (135 शब्द) ने दिया था।
– बराक ओबामा ने 2009 में अपने पहले भाषण में 2406 शब्दों में भाषण दिया था।
– टाई यानि बराबर वोट मिलने की स्थिति में राष्ट्रपति का चुनाव अमरीका की प्रतिनिधि सभा करती है।
– अमेरिकी इतिहास में चार राष्ट्रपति अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार से कम वोट हासिल करने के बावजूद राष्ट्रपति बने हैं।
– जॉर्ज डब्ल्यू बुश (2000), बेंजामिन हैरिसन (1888), जॉन क्विन्सी एडम्स (1824), रदरफोर्ड हेस (1876)
– इसकी वजह राष्ट्रपति बनने के लिए इलेक्टोरल कॉलेज का बहुमत जरूरी होता है।
– अमेरिकी राज्य नेवादा में वोटर्स के पास 1976 से ही None of the above का अधिकार मौजूद है।
– नॉर्थ डकोटा एकलौता राज्य है जहा मतदाताओं को 1951 से ही पंजीकरण नहीं करवाना पड़ता।
– यहा मतदान करने के लिए 18 वर्ष से ऊपर की आयु का अमरीकी नागरिक होना चाहिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति से जुड़ी रोचक जानकारियां…
– राष्ट्रपति का सालाना वेतन चार लाख डॉलर(2.5 करोड़ रुपये) है, जो वर्ष 2001 में दोगुनी की गई थी।
– छह राष्‍ट्रपतियों का नाम जेम्‍स है : मैडिसन, पोल्‍क, बुकानन, गारफील्‍ड, मुनरो और कार्टर के।
– अब्राहम लिंकन अमेरिका के सबसे लंबे कद के राष्ट्रपति थे। उनका कद छह फुट चार इंच था।
– अमेरिका के सबसे छोटे कद के राष्ट्रपति जेम्स मेडिसन थे, जिनका कद केवल पांच फुट चार इंच था।
– जेम्स बुकानन अमेरिका के एकमात्र कुंवारे राष्ट्रपति थे, जबकि रोनाल्ड रीगन तलाकशुदा राष्ट्रपति थे।
– अमेरिका के छह राष्ट्रपति ऐसे थे जिनकी कोई संतान नहीं थी
– जबकि राष्ट्रपति जान टेलर की सबसे अधिक 13 संतानें थीं जिनमें छह बेटियां और सात बेटे थे।
– अमेरिका के आठ राष्ट्रपति बाएं हाथ से लिखने वाले रहे हैं।
– जेम्स ए गारफील्ड, हर्बर्ट हूवर, हैरी ट्रूमैन जेराल्ड फोर्ड, रोनाल्ड रीगन, जार्ज बुश (सीनियर), बिल क्लिंटन, बराक ओबामा है।
– अमेरिकी इतिहास में नौ राष्ट्रपति ऐसे रहे हैं जो कभी कॉलेज नहीं गए।
– जार्ज वाशिंगटन, एंड्रयू जैक्सन, फान बरेन, जेड टेलर, मिलार्ड फिमोरे, अब्राहम लिंकन, ए जान्सन, ग्रोवर क्लीवलैंड और हैरी ट्रूमैन के नाम शामिल हैं।
– जेम्स गारफील्ड अमेरिका के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति थे, जो एक साथ एक हाथ से लैटिन और दूसरे हाथ से ग्रीक भाषा लिख सकते थे ।
– 1856 में जन्में राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन गोल्फ के इतने दीवाने थे कि वह सर्दियों के मौसम में अपनी गोल्फ की गेंदों को काले रंग में रंगवा लेते थे, ताकि वह बर्फ में भी गोल्फ खेल सकें।
– ‘टेडी बियर’ खिलौने का संबंध अमेरिका के एक राष्‍ट्रपति से है। थिओडोर ‘टेडी’ रूजवेल्‍ट ने एक दिन एक छोटे भालू को शूट करने से इनकार कर दिया था।
– इस घटना के बाद सॉफ्ट टॉय बनाने वाले निर्माताओं ने इससे प्रेरणा लेकर यह नाम रख दिया ‘टेडी बियर’।
– अमेरिका में चुनाव जीतने के बाद नवनियुक्त राष्ट्रपति के उद्घाटन भाषण देने की परंपरा है।
– सबसे लंबी स्पीच देने का रिकॉर्ड 1841 में राष्ट्रपति चुने गए विलियम एच. हैरीसन के नाम हैं।
– हैरीसन ने अपने भाषण में 8,445 शब्दों को इस्तेमाल किया।
– सबसे छोटा भाषण 1793 में देश के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिगटन (135 शब्द) ने दिया था।
– बराक ओबामा ने 2009 में अपना पहला प्रेजिडेंशियल भाषण दिया जिसमें 2406 शब्द थे।
– अमेरिकी राष्ट्रपति जहां रहते हैं उसे व्हाइट हाउस कहते हैं, उसमें 132 कमरे हैं, 35 बाथरूम, 412 दरवाजे और 147 खिड़कियां है।
– व्हाइट हाउस में हर हफ्ते 65,000 चिट्ठियां आती हैं। वहीं, प्रतिदिन 2,500-3,500 फोन कॉल्स, 1,000 फैक्स और 1,00,000 ई-मेल आते हैं।
– अमेरिकी राष्ट्रपति की आधिकारिक गाड़ी का नाम है द बीस्ट है, जो चलता फिरता एक बख्तरबंद टैंक के समान है।
– इस कार के विंडो ग्लास 6 इंच मोटे हैं, दरवाजे आठ इंच मोटे हैं जो बोइंग 757 विमान के दरवाजों के बराबर हैं।
– अमेरिकी राष्ट्रपति का प्लेन एयरफोर्स वन, दुनिया का सबसे सुरक्षित विमान हैं।
– इस प्लेन में कभी ईंधन खत्म नहीं होता, उड़ने की कोई लिमिट नहीं, उड़ने के दौरान ही फ्यूल भरने की सुविधा।
– इसमें करीब 4000 वर्गफुट जगह, जिसमें 85 टेलीविजन सेट्‍स, 85 टेलीफोन लाइन, जिम और ड्रेसिंग रूम हैं।
– इसके शीशों से लेकर पूरी बॉडी परमाणु धमाके से निकलने वाली शॉक वेब सहन करने की क्षमता।
– हाज के पिछले हिस्से में दुनिया भर के रडारों को जाम कर देने वाला जैमर मौजूद हैं।
– निचली मंजिल में हथियारों का जखीरा और अमेरिकी जमीन पर मौजूद परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के लिए रिमोट कंट्रोल रूम।

अमेरिका के अबतक के राष्‍ट्रपतियों के सूची…

 राष्‍ट्रपति  कार्यकाल  पार्टी
 जॉर्ज वाशिंगटन  अप्रैल 30, 1789-मार्च 4, 1797  ——
 जॉन एडम्स  मार्च 4, 1797- मार्च4, 1801  फेड्रालिस्‍ट
 थॉमस जेफरसन  मार्च 4, 1801- मार्च 4, 1809  डेमोक्रैटिक
 जेम्स मैडिसन  मार्च 4, 1809- मार्च 4, 1817  डेमोक्रैटिक
 जेम्स मनरो  मार्च 4, 1817-मार्च 4, 1825  डेमोक्रैटिक
 जॉन क्विन्सी एडम्स  मार्च 4, 1825-मार्च4, 1829  डेमोक्रैटिक
 एण्ड्रऊ जैक्सन  मार्च 4, 1829-मार्च 4, 1837  डेमोक्रैटिक
 मार्टन वान ब्यूरेन  मार्च 4, 1837- मार्च 4, 1841  डेमोक्रैटिक
 विलियम हेनरी हैरिसन  मार्च 4, 1841- अप्रैल 4, 1841  विग
 जॉन टेलर  अप्रैल 4, 1841-मार्च 4, 1845  विग
 जेम्स के पोल्‍क  मार्च 4, 1845-मार्च 4, 1849  डेमोक्रैटिक
 ज़ेकरी टेलर  मार्च 4, 1849-जुलाई 9, 1850  विग
 मिलरड फिलमोर  जुलाई 9, 1850-मार्च 4, 1853  विग
 फ्रेंकलिन पियर्स  मार्च 4, 1853-मार्च 4, 1857  डेमोक्रैटिक
 जेम्स ब्यूकेनन  मार्च 4, 1857-मार्च 4, 1861  डेमोक्रैटिक
 अब्राहम लिंकन  मार्च 4, 1861-अप्रैल 15, 1865  रिपब्लिकन
 एंड्रू जाह्नसन  अप्रैल 15, 1865-मार्च 4, 1869  डेमोक्रैटिक
 यूलिसिस ग्राण्ट मार्च 4, 1869-मार्च 4, 1877  रिपब्लिकन
 रदरफोर्ड हेस  मार्च 4, 1877-मार्च 4, 1881  रिपब्लिकन
 जेम्स गार्फील्ड  मार्च 4, 1881- मार्च 19, 1881  रिपब्लिकन
 चेस्टर आर्थर  सितंबर 19, 1881-मार्च 4, 1885  रिपब्लिकन
 ग्रोवर क्लीवलाण्ड  मार्च 4, 1885-मार्च 4, 1889  डेमोक्रैटिक
 बेंजामिन हैरिसन  मार्च 4, 1889-मार्च 4, 1893  रिपब्लिकन
 ग्रोवर क्लीवलाण्ड  मार्च 4, 1893-मार्च 4, 1897  डेमोक्रैटिक
 विलियम मकिन्ली  मार्च 4, 1897-सितंबर 14, 1901  रिपब्लिकन
 थियोडोर रोज़वेल्ट  सितंबर 14, 1901-मार्च 4, 1909  रिपब्लिकन
 विलियम टाफ्ट  मार्च 4, 1909-मार्च 4, 1913  रिपब्लिकन
 वूड्रो विल्सन  मार्च 4, 1913- मार्च 4, 1921  डेमोक्रैटिक
 वारेन हार्डिंग  मार्च 4, 1921-अगस्‍त 2, 1923  रिपब्लिकन
 कालविन कूलिज  अगस्‍त 2, 1923-मार्च 4, 1929  रिपब्लिकन
 हर्बर्ट हूवर  मार्च 4, 1929-मार्च 4, 1933  रिपब्लिकन
 फ्रेंकलिन रोज़वेल्ट  मार्च 4, 1933-अप्रैल 12, 1945  डेमोक्रैटिक
 हैरी ट्रूमन  अप्रैल 12, 1945-जनवरी 20, 1953  डेमोक्रैटिक
 ड्वैट ऐज़नहौवर  जनवरी 20, 1953-जनवरी 20, 1961  रिपब्लिकन
 जॉन एफ केनेडी  जनवरी 20, 1961-नवंबर 22, 1963  डेमोक्रैटिक
 लिंडन जॉनसन  नवंबर 22, 1963-जनवरी20, 1969  डेमोक्रैटिक
 रिचर्ड निक्सन  जनवरी 20, 1969-अगस्‍त 9, 1974  रिपब्लिकन
 जेरल्ड फोर्ड  अगस्‍त 9, 1974-जनवरी 20, 1977  रिपब्लिकन
 जिमि कार्टर  जनवरी 20, 1977-जनवरी 20, 1981  डेमोक्रैटिक
 रोनाल्ड रीगन  जनवरी 20, 1981-जनवरी 20, 1989  रिपब्लिकन
 जार्ज हर्बर्ट वाकर बुश  जनवरी 20, 1989-जनवरी 20, 1993  रिपब्लिकन
 विलियम क्लिंटन  जनवरी 20, 1993-जनवरी 20, 2001  डेमोक्रैटिक
 जार्ज डब्‍ल्‍यू बुश  जनवरी 20, 2001-जनवरी 20, 2009  रिपब्लिकन
 बराक ओबामा  जनवरी 20, 2009-अभी तक  डेमोक्रैटिक

अमेरिकी चुनावों में इन शब्दों के हैं खास मायने…
रनिंग मेट- अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव का उम्मीदवार अपना रनिंग मेट यानी उप-राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तय करता है, दोनों का चुनाव साथ होता है।

स्विंग स्टेट्स- वो राज्य जिसका आखिरी समय तक वहां ये साफ नहीं होता कि वो किस उम्मीदवार के साथ जाएंगे। ऐतिहासिक रूप से फ्लोरिडा, ओहायो और पेंसिल्वेनिया राज्य अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में स्विंग स्टेट कहे जाते हैं।

बेलवेदर स्टेट- ये वो राज्य हैं जो आमतौर पर जीतने वाले उम्मीदवार के साथ जाते हैं। माना ये जाता है ये जिस उम्मीदवार के साथ होते हैं, उसकी जीत कमोबेश तय होती है।

ब्ल्यू स्टेट- ये अमरीका के वो राज्य हैं जो आम तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट करते हैं।

रेड स्टेट- वो राज्य जो आम तौर पर रिपब्लिकन पार्टी के लिए ही वोट करते हैं।

पर्पल स्टेट- वो राज्य जो किसी भी पार्टी के लिए वोट कर सकता है उसे पर्पल स्टेट कहते हैं।

कॉकस- ये पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं की ऐसी बैठक होती है जिसमें वो ये तय करते हैं कि पार्टी के भीतर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों में से किसका समर्थन करना है।

डेलीगेट्स- ये रिपब्लिकन या डेमोक्रेटिक पार्टी के वो सदस्य होते हैं जिनके वोट से राष्ट्रपति पद का पार्टी का उम्मीदवार तय होता है।

ग्रैंड ओल्ड पार्टी- अमरीका में रिपब्लिकन पार्टी को आम तौर पर जीओपी या ग्रैंड ओल्ड पार्टी कहते हैं।

हार्ड मनी- जब कोई शख़्स किसी ख़ास प्रचार के लिए सीधे पैसे की मदद देता है तो उसे हार्ड मनी कहा जाता है।

सुपर ट्यूज डे- अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के दौरान ये वो दिन होता है, जब तमाम राज्य उम्मीदवार तय करने के लिए पहले दौर की वोटिंग करते हैं।

ब्लू डॉग- ब्लू डॉग उस डेमोक्रेट को कहते हैं जो रिपब्लिकन झुकाव वाले राज्य से हो, ये नाम येलो डॉग डेमोक्रेट के जवाब में रखा गया है.

येलो डॉग- येलो डॉग डेमोक्रेट उसे कहते हैं जो हर हाल में डेमोक्रेटिक पार्टी को ही वोट करता है चाहे फिर उम्मीदवार ‘पीला’ कुत्ता ही क्यों न हो।

हिलेरी क्लिंटन- जिंदगी की अनसुनी कहानियां
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हिलेरी क्लिंटन ने अपनी जिंदगी के 30 साल राजनीति में बिताए हैं, लेकिन बहुत से वोटरों को अभी भी लगता है कि वे असली हिलेरी को नहीं जानते… हिलेरी को जानने वाले कहते हैं कि कि ऐसा इसलिए है कि उनका व्यक्तित्व जटिल और विरोधाभासी है… हिलेरी क्लिंटन को भले ही ज्यादातर अमेरिकी गैर पारदर्शी और चतुर मानते हों, लेकिन उनकी जीवनी लिखने वाले गंभीर लेखकों में इस बात पर व्यापक सहमति है कि वे असल में कैसी हैं… अगर उनके बारे में किताब लिखने वालों से पूछा जाए तो अक्सर वे उन्हें कड़ी मेहनत करने वाली, उत्साही, दृढ़, दोदलीय, विश्लेषक, मॉडरेट, व्यवस्थित, कंजरवेटिव और कभी कभी हठी बताते हैं…
  • युवा लोगों के लिए क्लिंटन की जीवनी लिखने वाली कारेन ब्लूमथाल तो उन्हें नर्डी और छात्रों जैसा बताती हैं, जो ताकत भी है और कमजोरी भी… ब्लूमथाल कहती हैं कि उनमें अपने पति बिल क्लिंटन या राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरह दूसरों को प्रेरणा देने वाला करिश्मा नहीं है, “वे ऐसा व्यक्तित्व हैं जिसे आप अपने पड़ोसी के रूप में देखना चाहते हैं… लेकिन हम अमेरिकी इस तरह के लोगों को बोरिंग समझते हैं असल में वे बोरिंग टाइप की हैं…
  • प्रतिष्ठित वामपंथी पत्रिका ‘द नेशन’ के लिए काम करने वाले लेखक रिचर्ड क्राइटनर भी उस महिला नेता के बारे में ऐसा ही सोचते हैं जो आधुनिक काल के डेमोक्रैटिक उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा नकारात्मक रेटिंग बटोर रही हैं, लेकिन जिसे 20 बार अमेरिका की सबसे प्रशंसित महिला चुना जा चुका है. वे कहते हैं, “अमेरिकी कड़ी मेहनत करने वाले लोगों को पसंद करते हैं. उन्हें राष्ट्रपति बनाना चाहे बिना भी उनकी तारीफ कर सकते हैं.”
  • विरोधी भले ही उनकी उदारवादी कहकर आलोचना करें, लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत रिपब्लिकन कार्यकर्ता के रूप में की है. और ये बात उनकी शख्सियत में अभी भी झलकती है. क्लिंटन के ब्रिटिश जीवनी लेखक जेम्स डी. बॉयस कहते हैं, “वे इस तरह की हैं जो बहुत ही उत्साही है, बहुत ही व्यवस्थित है और अपने तरीके और लाइफस्टायल में उससे कहीं ज्यादा रूढ़िवादी हैं जितना उनके आलोचक समझेंगे.” एक अलग राजनीतिक माहौल में इन्हें अच्छा गुण समझा जा सकता है, लेकिन क्लिंटन के समझौतावादी रवैये के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं.

बचपन
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हिलेरी क्लिंटन का जन्म 26 अक्टूबर 1947 को अमरीका के शिकागो शहर में हुआ था। उनके पिता ह्यू रॉडहम अमेरीकी नौसेना में थे। वे अनुशासन पसंद करते थे और बहुत ग़ुस्से वाले थे। हिलेरी की मां डोरोथी का बचपन बिना मां-बाप के बीता था और वे अपने पहले बच्चे यानी हिलेरी को बेहद प्यार करती थीं। अनुशासनप्रिय पिता ने हिलेरी को हमेशा यही समझाया कि जो काम लड़के कर सकते हैं, वो हिलेरी भी कर सकती हैं। अपने माता- पिता की तीन संतानों में वे सबसे बड़ी हैं। उनसे छोटे दो भाई हैं ह्यूज और टोनी। एक बच्चे और छात्रा के रूप में हिलेरी बचपन से ही काफी होशियार और सक्रिय रहीं।

शिक्षा
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पार्क रिज स्थित पब्लिक स्कूल, जहां उनकी प्रारंभिक पढ़ाई लिखाई हुई, वहां के टीचर इन्हें बहुत पसंद करते थे। छोटी हिलेरी स्वमिंग और बेसबाल के खेलों में बढ़ चढ़कर भाग लेती थी। स्काउट और ब्राउनी गर्ल के रूप में कई बैज इन्होंने अपने नाम किए। और, कहानी कहने में तो कोई जवाब ही नहीं था। आगे चलकर बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति काल के दौरान वे गल्र्स स्काउट ऑफ अमेरिका की मानद अध्यक्ष भी बनीं। छात्र जीवन में ही हिलेरी के अंदर सामाजिक सक्रियता और नेतृत्व करने की क्षमता विकसित होने लगी लगी थी। वे खाद्यान्न वितरण कार्यक्रमों में हिस्सा लेती थीं और स्टूडेंट गवर्नमेंट के चुनाव में भी उम्मीदवार बनती थीं। इस दौरान वे अमेरिका की नेशनल ऑनर सोसायटी की सदस्य भी बनीं।

  • एस्ट्रोनॉट बनने का ख्वाब- हिलेरी अपनी नवयुवा अवस्था में अमेरिका के अंतरिक्ष कार्यक्रम से बहुत प्रभावित थीं और खुद भी इसका हिस्सा बनना चाहती थीं। 1961 के आसपास हिलेरी ने नासा को इस संबंध में एक पत्र लिखकर पूछा भी था कि क्या वे अंतरिक्ष यात्री के रूप में नासा के अभियान में शामिल हो सकती हैं। उस समय नासा के अभियानों में महिलाओं को नहीं भेजा जाता था। हिलेरी को भी निराशाजनक उत्तर मिला यानी न सुननी पड़ी।
  • कॉलेज एसोसिएशन की अध्यक्ष बनी- हिलेरी ने माइने साउथ हाईस्कूल से 1965 में गे्रजुएशन पूरा किया। प्रखर बुद्धि की हिलेरी यहां पढ़ाई के दौरान नेशनल मेरिट फाइनलिस्ट भी रहीं। इसके बाद इन्होंने वेलेसली कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई की। कॉलेज के दौरान ही वे राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने लगी थीं। यहां वे वेलेसली यंग रिपब्लिकन्स की वे अध्यक्ष भी चुनी गईं थीं। 1968 में वे वेलेसली कॉलेज गवर्नमेंट एसोसिएशन की अध्यक्ष भी चुनी गईं।
  • कानून की पढ़ाई- यहां पढ़ाई पूरी करने के बाद येल लॉ स्कूल से इन्होंने कानून की पढ़ाई शुरू की। यहां 1970 में हिलेरी को अमेरिकी सीनेटर वाल्टर मोंडेल के साथ आप्रवासी कामगारों पर काम करने का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने कैलिफोर्निया की एक लॉ फर्म ट्रयूहाफ, वाकर एंड बर्नस्टेन की इंटर्न के रूप में काम किया। वे फर्म के चाइल्ड कस्टडी और अन्य मामलों को देखती थीं। 1973 में इन्होंने येल से ही ज्यूरिस डॉक्टर की डिग्री हासिल की और येल चाइल्ड सेंटर में एक साल के पोस्टग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन लिया। यहां अध्ययन के दौरान वे चिल्ड्रेन डिफेंस एककेडमी की स्टाफअटार्नी भी रहीं।

रिपब्लिकन से डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर झूकाव
हिलेरी क्लिंटन डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हैं. लेकिन शुरुआती सालों में उनका राजनैतिक झुकाव रिपब्लिकन पार्टी की तरफ़ था. हिलेरी ने 1964 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बैरी गोल्डवॉटर के लिए प्रचार किया था. हालांकि उस वक़्त हिलेरी हाई स्कूल में थीं और वोट नहीं डाल सकती थीं. लेकिन उन्होंने चुनाव प्रचार में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. पर, हिलेरी का रिपब्लिकन पार्टी से यह लगाव ज़्यादा दिनों तक नहीं चला. हिलेरी ने पढ़ाई के लिए मशहूर येल यूनिवर्सिटी में दाख़िला लिया था. यहां उनकी मुलाक़ात बिल क्लिंटन से हुई.दोनों में एक-दूसरे को देखते ही प्यार हो गया. दोनों ने अपना पहला घर एक-साथ मिलकर ही लिया. पढ़ाई के दौरान ही बिल और हिलेरी ने 1972 के चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी मैक्गवर्न के पक्ष में प्रचार किया.

लव स्टोरी

बिल क्लिंटन से हिलेरी की शुरुआती मुलाकात 1971 में स्प्रिंग सीजन के दौरान हुई। उस समय ये येल यूनिवर्सिटी में लॉ की छात्रा थीं। साथ ही साथ वे एक लॉ फर्म के लिए काम भी कर रहीं थीं। हिलेरी इस फर्म में चाइल्ड कस्टडी और अन्य संबंधित मामलों के लिए काम करती थीं। ऐसे ही किसी मामले को लेकर बिल क्लिंटन से इनकी मुलाकात हुई और दोनों का एक दूसरे से मेल जोल बढ़ने लगा।
बिल क्लिंटन की जुबानी- पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने अपनी पत्नी हिलेरी क्लिंटन से उनकी पहली मुलाकात की कहानी बयां की। फिलादेलपिया के वेल्स फरगो सेंटर में हजारों प्रतिनिधियों के बीच बिल क्लिंटन ने बताया कि पहली बार किस तरह उनकी और हिलेरी की मुलाकात हुई थी। पूर्व राष्ट्रपति ने पहली मुलाकात की कहानी हाउ आई मेट ए गर्ल नाम से शुरू की। इस कहानी में उन्होंने बताया कि कैसे वो साल 1971 में येल यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई के दौरान पहली बार हिलेरी रोधम से मिले थे। बिल क्लिंटन ने बताया कि वो हिेलेरी को घूर रहे थे लेकिन उनमें हिम्मत नहीं थी कि वो हिलेरी के पास जाकर उनसे बात कर सकें और इसी बीच वो उनके पास आईं और कहा कि जिसे आप इतने समय से घूर रहे हैं, आपको जरूर अब उसका नाम जानने की इच्छा हो रही होगी? बिल क्लिंटन ने कहा कि हिलेरी की इस बात से वो बिलकुल चौंक गए और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि ऐसे मौके पर उन्हें क्या कहना चाहिए। बिल क्लिंटन ने कहा कि उन्होंने आखिरकार हिलेरी से एक आर्ट म्यूजियम में साथ चलने की पेशकश कर दी और तभी से वो एक दूसरे के साथ हो गए और तबसे लेकर अबतक एक दूसरे के साथ हैं। बिल क्लिंटन ने कहा कि हिेलरी में नेतृत्व करने की जन्मजात प्रवृति है। अमेरिका के 42वें राष्ट्रपति ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वो हिलेरी को अमेरिका का 45वां राष्ट्रपति चुनें।
  • दोनों का डेमोके्रटिक पार्टी से लगाव- अगले साल यानी 1972 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जॉर्ज मैक्गवर्न के लिए दोनों ने टेक्सास में समर्थन अभियान में बढ़ चढ़कर भागीदारी की थी। मैक्गवर्न हालांकि चुनाव नहीं जीत सके थे, लेकिन हिलेरी और बिल की राजनैतिक सहभागिता और डेमोके्रटिक पार्टी से लगाव के ये प्रारंभिक कदम थे।
वकील हिलेरी और निक्सन पर महाभियोग
हिलेरी क्लिंटन
1974 में हिलेरी क्लिंटन (तब रोडहैम) उस रोडिनो कमिटी की वकील थीं जिसकी कार्रवाई के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पर महाभियोग चलाया गया.
1974 का साल अमरीकी राजनीति के अहम पड़ावों में से एक है. इस साल उस वक़्त के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन, वॉटरगेट स्कैंडल में फंस गए थे. निक्सन पर आरोप था कि उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के दफ़्तर में चोरी कराई, ताकि वो विरोधी पार्टी की तैयारियों को पहले से जान लें और उसकी काट खोज सकें. वक़ीलों की एक फ़ौज, निक्सन के ख़िलाफ़ सबूत जमा कर रही थी. हिलेरी क्लिंटन ने भी एक वक़ील के तौर पर इस काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. इस सबूत जमा करने का मक़सद था, निक्सन के ख़िलाफ़ महाभियोग साबित करना. लेकिन निक्सन ने उससे पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया. 1974 में उन्हें वाशिंगटन डीसी में उस महाभियोग जांच कमेटी का सदस्य बनाया गया, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन से संबंधित वाटरगेट कांड की छानबीन करनी थी। इसी कमेटी की जांच रिपोर्ट अमेरिकी सदन को जानी थी। चीफ काउंसेल जॉन डोर के अलावा बर्नार्ड डब्ल्यू नुशबैम इस जांच कमेटी का नेतृत्व कर रहे थे। हिलेरी ने यहां बड़ी दक्षता के साथ काम किया। उन्होंने वाटरगेट कांड के एतिहासिक एवं कानूनी पहलुओं में हुई गड़बड़ियों के अकाट्य साक्ष्य खोज निकाले। परिणामस्वरूप रिचर्ड निक्सन के खिलाफ अगस्त 1974 में महाभियोग पारित हो गया और उन्हें राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा। अब तक हिलेरी के अंदर एक उत्कृष्ट राजनीतिज्ञ बनने की संभावनाएं सामने आने लगी थीं। डेमोके्रटिक पार्टी के पॉलिटिकल ऑर्गनाइजर और कंसल्टेंट बेट्से राइट टेक्सास से वाशिंगटन सिर्फ इसी मकसद से आए कि हिलेरी को प्रतिस्पर्धी राजनीतिज्ञ के रूप में विकसित किया जा सके। राइट का मानना था कि हिलेरी के अंदर भविष्य में सीनेटर या राष्ट्रपति बनने की पूरी संभावनाएं मौजूद हैं।शादी
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1975 में हिलेरी रोडहैम ने बिल क्लिंटन से शादी की और 1978 में क्लिंटन आर्कन्सॉ प्रांत के गवर्नर बन गए. वह आर्कन्सॉ की फर्स्ट लेडी बन गईं.
बिल ने हिलेरी के सामने रखा शादी का प्रस्ताव- 1973 में बिल ने हिलेरी के सामने शादी करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन हिलेरी ने उस समय प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। हिलेरी तुरंत शादी करके खुद की संभावनाओं को घरेलू जिम्मेदारियों के आगे दबने नहीं देना चाहती थीं। इसके लिए वे बिल को टालती रहीं। लेकिन, कोलंबिया बार एक्जाम में असफल होने और अर्कांसास एक्जाम में पास होने के बाद उनके विचार बदलने लगे। हिलेरी के सामने अब जिन्दगी के अत्यंत महत्वपूर्ण मसले पर निर्णय लेने का अवसर आ गया था। हिलेरी उस समय वाशिंगटन में लॉ की टीचिंग करती थीं और यूएसए के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की एक सीट के लिए चुनाव की तैयारी भी कर रही थीं। हिलेरी ने अपने चमकते कैरियर पर व्यक्तिगत जीवन को तरजीह दी और वाशिंगटन छोड़कर बिल क्लिंटन के साथ अर्कांसास आ गई। अपने इस फैसले पर हिलेरी ने बाद में स्वीकारोक्ति दी- मैंने अपने दिमाग पर दिल को तरजीह दी।

  • अगस्त 1974 में हिलेरी ने बिल क्लिंटन के साथ अर्कांसास के फेयटेविले में निवास करना शुरू कर दिया। वहां अर्कांसास यूनिवर्सिटी के लॉ स्कूल में वे पढ़ाने लगीं। उस समय वे अपने कॉलेज में महिला फैकल्टी के रूप में मात्र दूसरी सदस्य थीं। हिलेरी यहां क्रिमिनल लॉ पढ़ाया करती थीं। उन्हें अर्कांसास यूनिवर्सिटी की सबसे मेहनती और कठिन ग्रेडिंग करने वाली टीचर के रूप में जाना जाता था। यहां लोकल बार एसोसिएशन के सहयोग और सरकारी फंडिंग की मदद से स्थापित लीगल एड क्लीनिक की प्रथम डायरेक्टर बनने का मौका भी हिलेरी को मिला। हिलेरी यहां बिल क्लिंटन के साथ रह रही थीं, लेकिन शादी को लेकन उनका मन अब भी डांवाडोल था। उन्हें डर था कि शादी के बाद उनकी स्वतंत्र पहचान खो सकती है। 1975 की गर्मियों में हिलेरी और बिल क्लिंटन ने अराकांसास के फेयेटेविले में एक घर भी खरीद लिया।
  • आखिरकार उस फैसले का दिन आ गया, जिसका बिल क्लिंटन वर्षों से इंतजार कर रहे थे और हिलेरी लगातार टाल रही थीं। हिलेरी ने बिल की इच्छा का सम्म्मान करते हुए और अपने रिश्ते को ज्यादा विश्वसनीयता प्रदान करने के लिए शादी के लिए हामी भर दी। दोनों की उनके लिविंग रूम में आयोजित एक मेथॉडिस्ट सेरेमनी में 11 अक्टूबर 1975 में शादी हो गई। शादी के बाद भी हिलेरी ने अपने सरनेम रोडहैम को बदलकर क्लिंटन नहीं किया। इसके पीछे भी वही पुराना कारण था। अब भी वे अपनी स्वतंत्र पहचान को कम से कम मूल नाम के साथ बचाए रखना चाहती थीं। हालांकि हिलेरी की मां और बिल क्लिंटन की मां दोनों ही हिलेरी के इस निर्णय से खुश नहीं थीं, पर हिलेरी की दृढ़ इच्छा के आगे किसी की नहीं चली।

बिल क्लिंटन बने गवर्नर
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उधर बिल क्लिंटन खुद को राजनीति में जमाने की कोशिश कर रहे थे। 1974 में हुए कांग्रेस के चुनाव में उन्होंने हिस्सा लिया, लेकिन सफलता नहीं मिली। दो साल बाद बिल के लिए एक बेहतर अवसर आया जबकि 1976 में उन्हें अर्कांसास एटॉर्नी जनरल चुने जाने में सफलता मिल गई। अब बिल के साथ साथ हिलेरी को फेयेटेविले छोड़कर अर्कांसास की राजधानी लिटिल रॉक जाना पड़ा। नवंबर 1978 में हिलेरी के पति बिल क्लिंटन अर्कांसास के गवर्नर चुने गए। इस प्रकार जनवरी 1979 में वे अर्कांसास राज्य की प्रथम लेडी भी बन गईं। क्लिंटन इस पद पर दो चरणों में 1979झ्र81, और1983झ्र92 में कुल मिलाकर 12 वर्षों तक रहे। क्लिंटन ने हिलेरी की योग्यताओं को देखते हुए उन्हें अर्कांसास राज्य की रूरल हेल्थ एडवाइजरी कमेटी का अध्यक्ष बना दिया। इस पद पर रहते हुए हिलेरी राज्य के गरीब तबकों के लिए सरकारी फंड की मदद से स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने में मदद की वो भी बिना डॉक्टरों की फीस में कमी किए बिना।

फर्स्ट लेडी ऑफ अमेरिका
USA Hillary Clinton bei der Amtseinführung ihres Mannes 1993
बिल क्लिंटन ने जब साल 1992 में अमरीका के राष्ट्रपति का पद संभाला और हिलेरी देश की प्रथम महिला बनीं तब से दुनिया उन्हें पहचानती रही है. अमरीकियों ने गैलप पोल में 17 दफा हिलेरी को सबसे ज्यादा प्रशंसित महिला के तौर पर शुमार किया. अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी उन्हें देश की बेहतरीन महिला मंत्री बताया. उन्हें कई लोगों की तारीफ भी मिली वहीं कई उनकी आलोचना भी करते हैं. उनकी स्वास्थ्य सुधार से जुड़ी नीतियों को विपक्ष की चुनौती का सामना करना पड़ा.

  • When Bill Clinton took office as President in January 1993, Hillary Rodham Clinton became the First Lady, and her press secretary reiterated that she would be using that form of her name.
  • She was the inaugural First Lady to have earned a postgraduate degree and to have her own professional career up to the time of entering the White House.
  • She was also the first to have an office in the West Wing of the White House in addition to the usual first lady offices in the East Wing.
  • She was part of the innermost circle vetting appointments to the new administration and her choices filled at least eleven top-level positions and dozens more lower-level ones.
  • Some critics called it inappropriate for the first lady to play a central role in matters of public policy. Supporters pointed out that Clinton’s role in policy was no different from that of other White House advisors and that voters had been well aware that she would play an active role in her husband’s presidency.
  • Bill Clinton’s campaign promise of “two for the price of one” led opponents to refer derisively to the Clintons as “co-presidents” or sometimes use the Arkansas label “Billary”. The pressures of conflicting ideas about the role of a first lady were enough to send Hillary Clinton into “imaginary discussions” with the also-politically-active Eleanor Roosevelt. From the time she came to Washington, Hillary also found refuge in a prayer group of the Fellowship that featured many wives of conservative Washington figures.
  • April 1993, she publicly sought to find a synthesis of Methodist teachings, liberal religious political philosophy, and Tikkun editor Michael Lerner’s “politics of meaning” to overcome what she saw as America’s “sleeping sickness of the soul”; that would lead to a willingness “to remold society by redefining what it means to be a human being in the twentieth century, moving into a new millennium.”

भ्रष्टाचार के आरोप
Hillary Clinton bei General Petraeus Irakanhörung
बिल क्लिंटन के पहले कार्यकाल में 1996 में व्हाइटवॉटर स्कैंडल नाम का भ्रष्टाचार का इल्ज़ाम लगा. आरोप था कि बिल और हिलेरी ने जिम मैक्डॉगल नाम के शख़्स के साथ रियल एस्टेट के सौदे में धांधलियां की थीं. इस मामले में हिलेरी की संसद की ग्रैंड जूरी के सामने पेश भी हुई. जूरी के सामने पेश होने वाली, हिलेरी क्लिंटन किसी पहले अमरीकी राष्ट्रपति की पत्नी थीं. 20 सितम्बर 2000 को क्लिंटन दम्पत्ति व्हाइट वाटर कांड के आरोपों से मुक्त हुए।

अमर सिंह से फंडिंग प्राप्त करती हैं हिलेरी क्लिंटन, लगे आरोप

  • परिवार के ट्रस्ट के लिए चंदा (धन संग्रह) लेने के मामले में डोनाल्ड ट्रंप ने हिलेरी क्लिंटन को आड़े हाथों लिया है। ट्रंप ने राष्ट्रपति पद के लिए संभावित डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पर भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर मत देने के एवज में भारतीय नेताओं और संस्थाओं से चंदा लेने का आरोप लगाया है। यह चंदा क्लिंटन फाउंडेशन के नाम पर लिया गया। क्लिंटन फाउंडेशन को लेकर ये आरोप पहले भी लग चुके हैं लेकिन ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव के मौके पर 35 पेज की एक पुस्तिका जारी करके क्लिंटन पर लगे आरोपों को नई हवा दी है। ट्रंप के अभियानकर्ताओं ने कहा है कि पुस्तिका में क्लिंटन से जुड़े 50 तथ्य दिए गए हैं।
  • न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पुस्तिका में लिखा है कि 2008 में भारतीय राजनीतिज्ञ अमर सिंह ने क्लिंटन फाउंडेशन को 1,000001 डॉलर (6.78 करोड़ रुपये) और 5,000000 डॉलर (33.94 करोड़ रुपये) का चंदा दिया। अमर सिंह सितंबर 2008 में परमाणु समझौते के लिए लॉबींग करने के लिए सितंबर 2008 में अमेरिका आए थे। उस समय सिनेटर हिलेरी ने उन्हें आश्वस्त किया था कि डेमोक्रेट सांसद परमाणु समझौते का रास्ता नहीं रोकेंगे।
  • पुस्तिका में लिखा है कि भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) ने भी क्लिंटन फाउंडेशन को एक मिलियन डॉलर (6.78 करोड़ रुपये) का चंदा दिया था। पुस्तिका में आरोप लगाया गया है कि भारतीय-अमेरिकी राज फर्नाडो को अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड में क्लिंटन के प्रभाव के चलते नियुक्त किया गया। कहा जाता है कि फर्नाडो ने भी क्लिंटन फाउंडेशन में मोटा चंदा दिया था। ट्रंप ने आरोप लगाया है कि क्लिंटन की विदेश नीति से हजारों जानें जाएंगी और अमेरिका के खरबों डॉलर व्यर्थ खर्च होंगे। यह सब आतंकी संगठन आइएस को खत्म करने के नाम पर होगा।

दूसरी बार प्रथम महिला
China Bill Clinton und Hillary Clinton in Peking
1996 में हिलेरी क्लिंटन की जिंदगी में फिर एक ऐतिहासिक मोड़ आया. उनके पति बिल क्लिंटन दूसरी बार राष्ट्रपति बने. दशकों बाद कोई डेमोक्रैट लगातार दूसरा चुनाव जीता.

ग्रैमी अवॉर्ड
USA Hillary Clinton gewinnt Grammy 1997
1997 में हिलेरी को उनकी ऑडियो बुक ‘इट टेक्स अ विलेज’ के लिए ग्रैमी अवॉर्ड मिला.
In 1996, Clinton presented a vision for the children of America in the book It Takes a Village: And Other Lessons Children Teach Us. The book made the Best Seller list of The New York Times and Clinton received the Grammy Award for Best Spoken Word Album in 1997 for the book’s audio recording. She was the first First Lady to win a Grammy Award.

मोनिका लेविंस्की का आरोप
 वॉटरगेट स्‍कैंडल के बाद 'लेविंस्‍कीगेट' स्‍कैंडल
1998 में हिलेरी की जिंदगी में फिर एक तूफान आया. उनके पति और देश के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर उनकी एक जूनियर स्टाफ मोनिका लेविंस्की से सेक्स संबंध बनाने का आरोप लगा.
मोनिका बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति कार्यकाल में व्हाइट हाउस में इंटर्न के तौर पर काम करती थीं। तब उनकी उम्र 22 साल थी। राष्ट्रपति क्लिंटन से उनके नाजायज रिश्ते की खबर 1998 में उजागर हो गई। लेविंस्की ने बताया कि 1995 से 1997 तक उनके और क्लिंटन के बीच नौ बार यौन संबंध बने। पहले तो क्लिंटन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। मोनिका ने क्लिंटन के साथ ओरल सेक्स करने का दावा कर जांचकर्ताओं को ब्लू रंग की ड्रेस सौंपी, जिसमें स्पर्म के निशान लगे थे। बाद में डीएनए टेस्ट से साबित होने के बाद क्लिंटन ने सार्वजनिक रूप से अपने नाजायज संबंधों की बात कबूल कर ली।

  • 22 वर्ष की लेंविंस्‍की और 49 वर्ष के क्लिंटन- मोनिका लेविंस्‍की अमेरिका के मशहूर लुईस एंड क्‍लार्क कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्‍हें वर्ष 1995 में व्‍हाइट हाउस में इंटर्न की जिम्‍मेदारी दी गई। मोनिका को पेंटागन के चीफ ऑफ स्‍टाफ लियोन पेनेटा के ऑफिस में अनपेड इंटर्न की जिम्‍मेदारी दी गई थी।
  • क्लिंटन की बेटी चेल्‍सी के बराबर थीं मोनिका- जिस समय दोनों के बीच रिश्‍ते शुरू हुए, उस समय बिल क्लिंटन की बेटी चेल्‍सी की उम्र भी 22 वर्ष थी। मोनिका ने दावा किया था कि वह पहली ऐसी महिला नहीं थीं जिनके साथ उन्‍होंने संबंध बनाए बल्कि क्लिंटन की एक और महिला के साथ एक्‍स्‍ट्रा मैरिटल अफेयर्स थे।
  • वॉटरगेट स्‍कैंडल के बाद ‘लेविंस्‍कीगेट’ स्‍कैंडल- क्लिंटन और लेविंस्‍की के इस स्‍कैंडल से पहले 70 के दशक में अमेरिका में सामने आए वॉटरगेट स्‍कैंडल ने भी दुनिया भर में हंगामा खड़ा कर दिया था। इस वजह से ही इस स्‍कैंडल को ‘लेविंस्‍कीगेट’ स्‍कैंडनल नाम दिया गया। इस स्‍कैंडल के अलावा इसे ‘मोनिकागेट,’ ‘जिपरगेट,’ ‘तालिगेट,’ और ‘सेक्‍सगेट’ के नाम से भी जाना गया था।
  • ‘ब्‍लू ड्रेस’ का किस्‍सा- आज भी जब कभी मोनिका लेविंस्‍की और बिल क्लिंटन के इस स्‍कैंडल का जिक्र होता है तो एक खास शब्‍द ‘ब्‍लू ड्रेस’ का जिक्र भी बरबस ही हो जाता है। दरअसल यह ब्‍लू ड्रेस इस स्‍कैंडल में अकेला ऐसा सुबूत थी जिससे यह साबित हो सका था कि लेविंस्‍की और क्लिंटन के बीच सेक्‍सुअल कांटेक्‍ट हुआ था। लेविंस्‍की के मुताबिक अब इस ब्‍लू ड्रेस के साथ ही उन सभी किस्‍सों को भी जला देना चाहिए।
  • सिगार का भी खूब होता है जिक्र- ब्‍लू ड्रेस के अलावा क्लिंटन लेविंस्‍की स्‍कैंडल में एक सिगार का जिक्र भी बहुत होता है। क्लिंटन ने लेविंस्‍की को अपने पास मौजूद सिगार कलेक्‍शन से रूबरू कराया था। इसके अलावा लेविंस्‍की ने अपना बयान दर्ज कराते समय बताया था कि क्लिंटन ने एक सिगार को उनके प्राइवेट पार्ट से टच कराया था।
  • जब क्लिंटन ने लगाया मोनिका को गले- वर्ष 1996 में जब क्लिंटन एक समारोह में गए तो वहां पर मोनिका भी मौजूद थीं। हजारों लोगों की भीड़ में जब क्लिंटन ने मोनिका को गले से लगाया तभी लोगों को अंदाजा हो गया था कि दाल में कुछ काला है।
  • हिलेरी की मौजूदगी में बने संबंध- मोनिका लेविंस्‍की के मुताबिक नवंबर 1995 से मार्च 1997 तक क्लिंटन और लेविंस्‍की के बीच नौ बार सेक्‍सुअल रिलेशंस बनें। इन नौ मौकों में से सात मौके ऐसे थे जब हिलेरी व्‍हाइट हाउस में ही मौजूद थीं।
  • लेविंस्‍की को मिली हाई प्रोफाइल पोजिशन- मोनिका लेविंस्‍की जो कि एक अनपेड इंटर्न के तौर पर व्‍हाइट हाउस में आईं थी जल्‍द ही उन्‍हें एक नए ऑफिस में शिफ्ट कर दिया गया। साथ ही वह एक अनपेड इंटर्न से पेड इंटर्न बन गई थीं।
  • लेविंस्‍की की करीबी को हुआ शक- बिल क्लिंटन और मोनिका लेविंस्‍की के बीच क्‍या चल रहा है इस बारे में कभी किसी को पता नहीं लग पाता अगर लेविंस्‍की की करीब लिंडा ट्रिप्‍प को लेविंस्‍की पर शक न हुआ होता। मोनिका मेल चेक करने के बहाने अक्‍सर ही ओवल ऑफिस के चक्‍कर लगाने लगी थीं। इस वजह से लिंडा को उस पर शक हुआ और फिर मोनिका ने खुद क्लिंटन और उनके बीच के संबंधों को उनसे शेयर किया।
  • रिकॉर्डटेप में मौजूद सबकुछ- लिंडा ने लेविंस्‍की और क्लिंटन के बीच जारी संबंधों को उस समय रिकॉर्ड कर लिया था जिस समय लेविंस्‍की उनसे सबकुछ शेयर कर रही थीं। इसके बाद वह रिकॉर्ड ऑडियो टेप ही क्लिंटन के लिए मुसीबत बन गए थे।
  • जब मुकर गए क्लिंटन- 1998 में जब यह स्‍कैंडल दुनिया के सामने आया तो लोग हैरान रह गए थे लेकिन जब बिल क्लिंटन से इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि उन दोनों के बीच कुछ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। हालांकि बाद में क्लिंटन ने इस बात को कुबूल कर लिया लेकिन उन्‍होंने यह भी कहा कि दोनों के बीच इंटरकोर्स कभी नहीं हुआ।
  • क्लिंटन का कुबूलनामा और हिलेरी की माफी- जब बिल क्लिंटन ने यह कुबूल किया कि उनके और मोनिका के बीच संबंध थे तो जहां दुनियाभर में हंगामा मच रहा था तो उनके घर में शांति थी। एक प्रेस कांफ्रेंस में क्लिंटन दुनिया के सामने आए और उन्‍होंने हिलेरी को सॉरी कहा। इसके बाद इसी प्रेस काफ्रेंस में हिलेरी ने भी दुनिया के सामने ऐलान किया कि वह क्लिंटन को माफ करती है और अब इस मुद्दे को ज्‍यादा तूल न दिया जाए।

राजनैतिक कैरियर
Hillary on tour
अमरीकी सेनेटर के रूप में अपना पहला कार्यकाल उन्होंने 3 जनवरी, 2001 में शुरु किया, 2009 तक वे सीनेटर बनी रहीं। बराक ओबामा प्रेसीडेंट बनने के बाद हिलेरी को सेक्रेटरी मे नियुक्त किया जिसके लिए इन्होने 21 जनवरी 2009 मे शपथ ली, इस पद मे उन्होने बहुत अच्छे काम किए जिसके लिए उन्हे काफ़ी तारीफ मिली। हिलेरी की लीडरशिप मे 11 सितंबर 2012 को बघंजी लीबिया ने अमेरिका के राजदूत क्रिस्टोफर स्टीवंस और तीन अन्य लोगो को मार डाला, इस मामले मे जाँच की गयी और कमजोर लीडरशिप को ज़िम्मेदार ठहराया गया। इस आरोप के कारण हिलेरी ने 1 2013 को इस्तीफ़ा दे दिया।
Clinton served on five Senate committees with nine subcommittee assignments:

  • Committee on the Budget (2001-2003)
  • Committee on Armed Services (2003-2009)
  • Committee on Environment and Public Works (2001-2009)
  • Subcommittee on Transportation and Infrastructure (2007-2008)
  • Subcommittee on Superfund and Environmental Health (Chairwoman, 2007-2009)
  • Committee on Health, Education, Labor and Pensions (2001-2009)

9 of Hillary Clinton’s biggest accomplishments
1. Fought for children and families for 40 years and counting.
After law school, Hillary could have gone to work for a prestigious law firm, but took a job at the Children’s Defense Fund. She worked with teenagers incarcerated in adult prisons in South Carolina and families with disabled children in Massachusetts. It sparked a lifelong passion for helping children live up to their potential.

2. Helped provide millions of children with health care.
As first lady of the United States, Hillary fought to help pass health care reform. When that effort failed, she didn’t give up: Hillary worked with Republicans and Democrats to help create the Children’s Health Insurance Program. CHIP cut the uninsured rate of American children by half, and today it provides health care to more than 8 million kids.

3. Helped get 9/11 first responders the health care they needed.
When terrorists attacked just months after Hillary became U.S. senator from New York, she worked to make sure the 9/11 first responders who suffered lasting health effects from their time at Ground Zero got the care they needed.

4. Told the world that “women’s rights are human rights.”
Standing in front of a U.N. conference and declaring that “women’s rights are human rights” was more controversial than it sounds today. Many within the U.S. government didn’t want Hillary to go to Beijing. Others wanted her to pick a less polarizing topic (you say polarizing, we say half the population). But Hillary was determined to speak out about human rights abuses, and her message became a rallying cry for a generation.

5. Stood up for LGBT rights at home and abroad.
As secretary of state, Hillary made LGBT rights a focus of U.S. foreign policy. She lobbied for the first-ever U.N. Human Rights Council resolution on human rights and declared that “gay rights are human rights.” And here at home, she made the State Department a better, fairer place for LGBT employees to work.

6. Helped expand health care and family leave for military families.
Hillary worked across the aisle to expand health care access for members of the National Guard and reservists—making sure those who served and their families had access to health care when they returned home. And she worked to expand the Family Medical Leave Act, allowing families of those wounded in service to their country to take leave in order to care for their loved ones.

7. Negotiated a ceasefire between Israel and Hamas.
As our nation’s chief diplomat, Hillary didn’t back down when the stakes were high. As Hamas rockets rained down on Israel, Hillary went to the region immediately. Twenty-four hours after she landed, a ceasefire went into effect—and that year became Israel’s quietest in a decade.

8. Negotiated the toughest sanctions Iran has ever faced.
As Iran was working to develop nuclear weapon, Hillary was instrumental in persuading Russia, China, and nine other U.N. Security Council countries to impose the toughest sanctions in Iran’s history. Former Secretary of Defense Leon Panetta called it “a remarkable effort—and it paid off.”

9. Became the first woman in history to top a major-party presidential ticket.
After winning the Democratic nomination for president earlier this year, Hillary became the first woman in history to be a major party’s nominee. It was one of many firsts during the presidential primary—starting with being the first woman to win the Iowa caucus.

जिंदगी की खुली किताब
USA Hillary Clinton Buch Entscheidungen
2003 में हिलेरी क्लिंटन ने अपनी पूरी जिंदगी एक किताब ‘लिविंग हिस्ट्री’ में लिखकर सबके सामने रख दी. उन्होंने मोनिका लेविंस्की विवाद के बाद पति के साथ संबंधों समेत हर बात पर बेबाकी से लिखा. बिल क्लिंटन ने हिलेरी से मॉनिका लुइंस्की से अपने संबंधों के बारे में ‘झूठ’ बोला था. पुस्तक में लिखा गया है कि फिर 15 अगस्त 1998 को, मुक़दमें में पेश होने से दो दिन पहले, बिल क्लिंटन ने उनसे कहा कि उनके मॉनिका के साथ ‘ग़लत’ संबंध थे.  उनका कहना था कि जो भी हुआ वह कुछ समय के लिए जल्दबाज़ी में हुआ था. हिलेरी क्लिंटन लिखती हैं कि उनका दिल टूट गया, वे कुछ न बोल पाईं और उन्हें ख़ुद पर ग़ुस्सा आया कि उन्होंने पहले बिल क्लिंटन पर विश्वास ही क्यों किया. वे रोने लगीं और उन्हें साँस भी मुश्किल से आ रहा था. हिलेरी लिखती हैं,”मै रोने लगी और मैने चीख कर पूछा – इसका क्या मतलब है? तुम क्या कह रहे हो? तुमने मुझ से झूठ क्यों बोला?” वे लिखती हैं कि हर पल उनका ग़ुस्सा बढ़ता ही जा रहा था लेकिन बिल क्लिंटन वहाँ बुत बने खड़े थे और बार-बार कह रहे थे,”मुझे माफ़ कर दो. मै बहुत शर्मिंदा हूँ. मै तुम्हें और अपनी बेटी चेलसी को इस सब से बचाना चाहता था.” हिलेरी क्लिंटन ने अपनी पुस्तक में लिखा है,”मेरी जिंदगी में सबसे मुश्किल फ़ैसला था कि क्या मैं बिल क्लिंटन से अपना विवाह कायम रखूँ? दूसरा सबसे मुश्किल फ़ैसला था सेनेट के चुनाव में भाग लेना.”

राष्ट्रपति बनने की कोशिश
USA Vorwahlen Demokraten Hillary Rodham Clinton und Barack Obama in Las Vegas
2008 में हिलेरी क्लिंटन ने डेमोक्रैट उम्मीदवार बनने की पहली कोशिश की. वह बराक ओबामा के सामने नाकाम रहीं. ओबामा के ख़िलाफ़ डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति की उम्मीदवारी हार गई थीं. गौरतलब है कि हिलरे के प्रतिद्वंद्वी बराक ओबामा के प्रबल समर्थक वेरमोंट से सीनेटर पैट्रक लेही ने सार्वजनिक रूप से हिलेरी को मैदान से हटने को कहा था. उनके मुताबिक़ हिलेरी चुनाव में बनी रह कर विपक्षी रिपब्लिकन दल को समर्थन दे रही हैं.  लेकिन हिलेरी ने उम्मीदवार की दौड़ में शामिल हिलेरी क्लिंटन ने इस रेस से बाहर होने की सभी अटकलों को ख़ारिज कर दिया है.

विदेश मंत्री
USA Hillary Clinton und Barack Obama PK in Washington
बराक ओबामा प्रेसीडेंट बनने के बाद हिलेरी को सेक्रेटरी मे नियुक्त किया जिसके लिए इन्होने 21 जनवरी 2009 मे शपथ ली, इस पद मे उन्होने बहुत अच्छे काम किए जिसके लिए उन्हे काफ़ी तारीफ मिली। हिलेरी की लीडरशिप मे 11 सितंबर 2012 को बघंजी लीबिया ने अमेरिका के राजदूत क्रिस्टोफर स्टीवंस और तीन अन्य लोगो को मार डाला, इस मामले मे जाँच की गयी और कमजोर लीडरशिप को ज़िम्मेदार ठहराया गया। इस आरोप के कारण हिलेरी ने 1 2013 को इस्तीफ़ा दे दिया।

  • ओबामा और हिलेरी के रिश्ते में तल्खी के कयास लगते रहे हैं. ओबामा ने चुनाव जीत लिया लेकिन हिलेरी को विदेशमंत्री के तौर पर चुन कर सबको हैरान भी कर दिया. सार्वजनिक तौर पर हिलेरी ने हमेशा यही कहा कि उन्हें यह महसूस होता कि अगर देश का राष्ट्रपति आपकी सेवाएं लेना चाहता है तो आप उसे ना नहीं कह सकते. हिलेरी ने अमरीकी विदेश नीति में बदलाव कर देश की छवि को और सुधारने की कोशिश की. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई देशों कि यात्राएं भी कीं. लेकिन हाल के दिनों में पाकिस्तान के साथ अमरीका के रिश्ते उतने अच्छे साबित नहीं हुए. पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार का कहना है, “विदेश मंत्री के तौर पर हिलेरी के कार्यकाल के दौरान पाक-अमरीका के रिश्ते बेहद खराब रहे.”
  • नवंबर 2011 में जब नाटो के एक हमले में पाकिस्तानी सैनिक मारे गए तो पाक-अमरीका के रिश्ते में कड़वाहट आ गई. पाकिस्तान ने अमरीका की कोई मदद करने से इनकार कर दिया और साथ ही माफी मांगने तक की मांग कर डाली. लेकिन हिलेरी ने इस मुद्दे पर ज्यादा तूल नहीं दी और बाद में बड़ी सावधानी से शाब्दिक लहजे में माफी मांगी. हालांकि रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े लोग मसलन राष्ट्रपति पद के पूर्व उम्मीदवार और सीनेटर जॉन मेकेन भी हिलेरी की तारीफ करते हैं. मेकेन कहते हैं, “उन्होंने 100 से ज्यादा देश के नेताओं के साथ अपने ताल्लुक बनाए इसलिए वह किसी भी वक्त फोन उठा लेती थी.”
  • विदेश मंत्री के तौर पर उनका लक्ष्य महज दोस्त बनाने से ज्यादा महत्वाकांक्षी था. हिलेरी और ओबामा ने कोशिश की कि अमरीका की ताकत और नेतृत्व क्षमता को नए सिरे से परिभाषित किया जाए. हिलेरी ने अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही परिस्थितियों के मुताबिक कूटनीति, आर्थिक, सैन्य, राजनीतिक, कानूनी और सांस्कृतिक रणनीति के जरिये अपने मकसद को साधने की कला को ‘स्मार्ट पावर’ नाम दिया. हिलेरी ने महिला अधिकार को प्राथमिकता दी और महिलाओं के मसले के लिए एक स्थायी राजदूत की नियुक्ति की. उन्होंने विकास से जुड़े मुद्दे मसलन वैश्विक खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और उद्यमशीलता से जुड़े कार्यक्रमों पर जोर दिया.

जूता पड़ा
USA Las Vegas Hillary Clinton Konferenz Recycling Industrie 2014
2014 में लास वेगस में एक कॉन्फ्रेंस के दौरान हिलेरी क्लिंटन पर एक महिला ने जूता फेंका.इस बार नई बात यह रही कि जूता फेंकने वाली एक महिला है.इस घटना को हिलेरी क्लिंटन ने मजाक में उड़ा दिया और अपना भाषण जारी रखा. इस जगह पर करीब 1000 लोग मौजूद थे. उन्होंने कहा, “क्या मुझ पर कोई कुछ फेंक रहा है.” कचरा प्रबंधन पर आयोजित इस कार्यक्रम में क्लिंटन ने जूता फेंकने की घटना के बाद कहा, “हे भगवान, मुझे नहीं पता था कि ठोस कचरा इतना विवादित भी हो सकता है.”

ईमेल विवाद
Hillary Clinton bei der Befragung durch den Kongress
क्लिंटन का चुनाव प्रचार खासा विवादास्पद रहा. विदेश मंत्री रहते हुए उनके लिखे कुछ ईमेल्स ने हंगामा खड़ा कर दिया.
ओबामा मंत्रिमंडल में विदेश मंत्री रहते हुए हिलेरी क्लिंटन के निजी ईमेल सर्वर को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। हालांकि बाद में हिलेरी ने माफी मांग ली थी। इसके चलते संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के अधिकारियों ने उनसे पूछताछ भी की थी। उनपर आरोप था कि विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने निजी ईमेल सर्वर का इस्तेमाल किया जो देश के कानून के अनुसार गलत है। इस मामले में हिलेरी ने यह कहते हुए माफी मांग ली थी कि इस सर्वर का इस्तेमाल उन्हें सिर्फ निजी मेल भेजने के लिए करना चाहिए था, लेकिन उनके विरोधियों को उनके खिलाफ एक मुद्दा हाथ लग गया है। गौरतलब है कि हिलेरी 2009-2013 के बीच अमेरिका की विदेश मंत्री रही थीं। सरकारी कामकाज के लिए निजी सर्वर का इस्तेमाल करने के बाद एफबीआइ ने वर्ष 2015 में हिलेरी के सर्वर को जब्त कर लिया था।

हिलेरी क्लिंटन को झटका, एफबीआई को ईमेल जांच का वारंट मिला 
अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई ने नए खोजे गए ईमेल की समीक्षा के लिए नया वारंट हासिल किया है। कानून प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि यह ईमेल हिलेरी क्लिंटन के ईमेल सर्वर जांच से संबंधित हो सकते हैं। एफबीआई के जांच अधिकारी लंबे समय से राष्ट्रपति पद की डेमोक्रेटिक उम्मीदवार और पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की सहायक हुमा अबेदीन के ईमेल की समीक्षा करना चाहते हैं। ये ईमेल हुमा अबेदीन के खिलाफ एक मामले की जांच के दौरान पाए गए थे। यह जांच न्यूयार्क के पूर्व कांग्रेस सदस्य और अबेदीन के तलाकशुदा पति एंथनी वीनर से संबंधित थी। 

  • जुलाई में जांच बंद- क्लिंटन की ई-मेल जांच को जुलाई में बगैर किसी आरोप के बंद कर दिया गया था, लेकिन शुक्रवार को, जब एफबीआई के निदेशक जेम्स कोमी ने संसद सदस्यों को इन ई-मेल के बारे में बताया, यह मुद्दा फिर से खड़ा हो गया. जेम्स कोमी ने कहा कि इन ई-मेल की जांच करना प्रासंगिक होगा.
  • हिलेरी की सहायक हुमा अबेदीन शक के घेरे- एफबीआई के जांच अधिकारी लंबे समय से राष्ट्रपति पद की डेमोक्रेटिक उम्मीदवार और पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की सहायक हुमा अबेदीन के ई-मेल की समीक्षा करना चाहते हैं. ये ईमेल हुमा अबेदीन के खिलाफ एक मामले की जांच के दौरान पाए गए थे. यह जांच न्यूयॉर्क के पूर्व कांग्रेस सदस्य और अबेदीन के तलाकशुदा पति एंथनी वीनर से संबंधित थी.

कौन है हिलेरी की ‘सेकंड डॉटर… जिसके कारण मचा ईमेल विवाद
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‘सेकंड डॉटर’ को लेकर ई-मेल के खुलासों से मुश्किल में हिलेरी
बीते दो दशक से वह हिलेरी क्लिंटन के साथ न सिर्फ साये की तरह रही हैं, बल्कि एक तरह से वह उनकी ‘सेकंड डॉटर’ हैं। लेकिन ई-मेल विवाद को लेकर भारतीय-पाकिस्तानी माता-पिता की इस संतान के कारण हिलेरी के राष्ट्रपति बनने की राह में रोड़ा अटक सकता है। भारतीय पिता तथा पाकिस्तानी मां की संतान हुमा अबेदीन (40) हिलेरी के विदेश मंत्री बनने से लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने तक उनके साथ साये की तरह रही हैं। यह अबेदीन ही थीं, जिन्होंने हिलेरी तथा क्लिंटन फैमिली फाउंडेशन के दानदाताओं के बीच कड़ी का काम किया।

क्राउन प्रिंस ऑफ बहरीन के लिए साल 2009 में हिलेरी से मुलाकात के लिए 10 मिनट का समय दिलवाने वाली अबेदीन के लिए फाउंडेशन के एक दानकर्ता ने लिखा, ‘वह हमारी अच्छी मित्र हैं।’ उनकी चैरिटी ने क्लिंटन ग्लोबल इनिशिएटिव के एक कार्यक्रम के लिए 3.2 करोड़ डॉलर का दान दिया। कंजर्वेटिव वॉचडॉग जुडिशियल वॉच द्वारा जारी एक अन्य ई-मेल में खुलासा हुआ है कि क्लिंटन ने सिम डैनिएल अब्राहम से मुलाकात के लिए अपने विमान को 15 मिनट के लिए विलंब तक कर दिया था। अब्राहम ने क्लिंटन की चैरिटी को 50 लाख से एक करोड़ डॉलर का दान दिया था।

एसोसिएट प्रेस की एक रपट के मुताबिक, हिलेरी से मिलने वाले या फोन पर उनसे बात करने वाले 154 गैर सरकारी लोगों में से 85 ने उनके फाउंडेशन को 15.6 करोड़ डॉलर का दान दिया। इसके अलावा, 16 विदेशी सरकारों ने क्लिंटन की चैरिटी को 17 करोड़ डॉलर का दान दिया। राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने पूछा कि अगर यह काम के लिए भुगतान नहीं, तो क्या है? अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में बेहद चौंकाने वाले घोटालों में से एक है।

राष्ट्रपति पद की पहली महिला उम्मीदवार
USA Bill Clinton und Hillary Clinton in in Little Rock Image result for hillary bill campaign 2016
तमाम मुश्किलों और विवादों से पार पाते हुए हिलेरी क्लिंटन अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बन गई हैं. यह वही हिलेरी रोडहैम हैं जिन्होंने 1970 के दशक में एक घूरते लड़के बिल को सीधा जाकर पूछा लिया था, क्या नाम है तुम्हारा. और बिल क्लिंटन घबरा गए थे.

पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति रखती हैं हिलेरी क्लिंटन : रिपब्लिकन हिन्दू संगठन का विज्ञापन में आरोप
एक रिपब्लिकन हिन्दू संगठन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट प्रत्याशी हिलेरी क्लिंटन के खिलाफ भारतीय-अमेरिकी टीवी चैनलों पर एक विज्ञापन चला रहा है, जिसमें लंबे समय से हिलेरी की सहयोगी रहीं पाकिस्तानी मूल की सहयोगी को लेकर उन्हें ‘पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति रखने वाली’ कहकर हमला किया गया है. रिपब्लिकन हिन्दू कोअलिशन (आरएचसी) द्वारा समर्थित विज्ञापन में कहा गया है, “हिलेरी, पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति रखती हैं, और उन्होंने अरबों डॉलर तथा सैन्य उपकरणों से पाक की मदद की, जिनकी इस्तेमाल भारत के खिलाफ हुआ… प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी का वीसा रुकवाने वाली भी वही थीं… (वह) उन देशों तथा व्यक्तियों से योगदान लिया करती हैं, जो कट्टर इस्लाम का समर्थन करने के लिए जाने जाते हैं…” विज्ञापन में हिलेरी के पति तथा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन तथा हिलेरी की लंबे समय से सहयोगी रहीं हुमा अबेदीन पर भी हमला किया गया है.

विज्ञापन में कहा गया, “उनकी (हिलेरी की) मौजूदा सहयोगी हुमा अबेदीन पाकिस्तानी मूल की हैं, और अगर वह (हिलेरी) जीत जाती हैं, तो वह (हुमा) चीफ ऑफ स्टाफ बन जाएंगी… उनके (हिलेरी के) पति बिल क्लिंटन पाकिस्तान को कश्मीर दे देना चाहते हैं…” विज्ञापन में इसके बाद कहा गया, “रिपब्लिकन को वोट दें – आपके लिए अच्छा रहेगा, भारत-अमेरिका संबंधों के लिए अच्छा रहेगा, और अमेरिका के लिए अच्छा रहेगा…” हुमा अबेदीन की मां पाकिस्तानी मूल की हैं, और उनके पिता भारत से हैं. दिल्ली के सैयद ज़ैनुल अबेदीन तथा सालेहा महमूद अबेदीन की पुत्री हुमा का जन्म वर्ष 1976 में मिशिगन के कालामाज़ू में हुआ था. जब हुमा दो वर्ष की थीं, तब उनका परिवार सऊदी अरब के जेद्दा में आकर बस गया था. आरएचसी के प्रमुख शलभ कुमार ने विज्ञापन को लेकर किए गए सवालों का जवाब नहीं दिया, लेकिन उन्होंने ‘न्यूयार्क टाइम्स’ से कहा, “आमतौर पर हुमा आतंकवादियों की उतनी ही पक्षधर हैं, जितना कोई हो सकता है… उनकी पृष्ठभूमि बेहद संदिग्ध है… मैं नहीं समझ पाता कि हिलेरी क्यों खुद को हुमा से जोड़े हुए हैं…” उधर, हिलरी के भारतीय-अमेरिकी समर्थकों ने इस विज्ञापन को लेकर आरएचसी की कड़ी आलोचना की है. क्लिंटन के अभियान के लिए धनराशि जुटाने में मदद करने वाले अजय जैन भुटोरिया ने कहा, “यह विज्ञापन गुमराह करने वाला, गलत और झूठा है…”

इन मुद्दों पर मिलती है क्लिंटन और ट्रंप की राय
अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों हिलेरी क्लिंटन और डॉनल्ड ट्रंप की इन मुद्दों पर एक राय है. कम से कम एक के बारे में सुनकर आप भी चकित रह जाएंगे. ज्यादातर मुद्दों पर अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन और डॉनल्ड ट्रंप सहमत नहीं हैं. लेकिन कम से कम तीन मुद्दे ऐसे हैं जिन पर वे सहमत हैं. कम से कम एक के बारे में सुनकर आप भी चकित रह जाएंगे.

मुक्त व्यापार संधि का विरोध- ये 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान की सबसे चौंकाने वाली बात है. राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवार मुक्त व्यापार के खिलाफ हैं. ट्रंप और क्लिंटन दोनों ने कहा है कि राष्ट्रपति बनने पर वे तय हो चुके ट्रांस पेसिफिक संधि को रोक देंगे. यह व्यापक मुक्त व्यापार संधि अमेरिका  और 11 अन्य देशों के बीच की गई है. यह बयान कई वजहों से ध्यान देने वाला है. एक तो यह अमेरिका की नीतियों में अहम बदलाव होगा क्योंकि अमेरिका की दोनों प्रमुख पार्टियां अब तक मुक्त व्यापार का समर्थन करती आई हैं. दूसरे इसलिए कि क्लिंटन ने विदेश मंत्री के रूप में टीपीपी संधि तय करवाने में मदद की है.
मजेदार बात है कि रिपब्लिकन पार्टी हमेशा से मुक्त व्यापार की चैंपियन रही है. डेमोक्रैट इस मामले में उतने उत्साही नहीं रहे हैं, लेकिन हिलेरी के पति बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति काल में उन्होंने विवादास्पद उत्तर अमेरिकी व्यापार संधि नाफ्टा का समर्थन किया था. हिलेरी ने पार्टी के अंदर अपने प्रतिद्वंदी बर्नी सैंडर्स के दबाव में विरोध का रास्ता अपनाया है. एक और दिलचस्प बात. डॉनल्ड ट्रंप लगातार प्रोडक्शन को मेक्सिको आउटसोर्स करने वाली अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ जहर उगलते रहे हैं, लेकिन अपनी कंपनियों में उन्होंने भी वही किया है.

अमेरिकी संरचना में निवेश- क्लिंटन और ट्रंप दोनों ने ही अमेरिका की रोड, पुल, एयरपोर्ट और जलमार्ग जैसी पुरानी पड़ती ढांचागत संरचना को नया करने का आश्वासन दिया है. क्लिंटन की अमेरिकी ढांचे  के पुनर्निर्माण पर पांच साल के कार्यक्रम के दौरान 275 अरब डॉलर खर्च करने की योजना है. ट्रंप ने कहा है कि क्लिंटन द्वारा किया जाने वाला निवेश बहुत कम है और वे कम से कम इसका दोगुना खर्च करेंगे. लेकिन उन्होंने इसके लिए कोई विस्तृत योजना पेश नहीं की है. क्लिंटन और ट्रंप दोनों को उम्मीद है कि देश के ढांचागत संरचना में उनके इस निवेश से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा. इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकारी निवेश मतदाता के हर वर्ग में लोकप्रिय रहता है. हाल के एक सर्वे के अनुसार 68 प्रतिशत रिपब्लिकन, 70 प्रतिशत स्वतंत्र और 76 प्रतिशत डेमोक्रैट मतदाताओं का मानना है कि वॉशिंगटन को देश के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार लाना चाहिए.

पूर्व सैनिकों का स्वास्थ्य- ट्रंप और क्लिंटन दोनों ही पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य सेवा में सुधार लाना चाहते हैं ताकि उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें. ये कोई छोटी चुनौती नहीं है. अमेरिका के करीब 1.9 करोड़ पूर्व सैनिकों और उनके परिवार के सदस्य मतदाताओं का अहम हिस्सा हैं और डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स संघीय सरकार की बड़ी एजेंसियों में शामिल हैं. देश के पूर्व सैनिकों को वेटरन्स दफ्तर द्वारा मुहैया कराई जाने वाली सेवा 2014 के बाद से बहस का महत्वपूर्ण मुद्दा बनती गई है. उस समय चिकित्सा का इंतजार कर रहे कई पूर्व सैनिकों की मौत से सरकार की भारी किरकिरी हुई थी.  दोनों ही उम्मीदवार पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य सेवा संरचना को बदलना चाहते हैं. ट्रंप चाहते हैं कि पूर्व सैनिकों को प्राइवेट मेडिकल सुविधा मिले जबकि क्लिंटन प्राइवेट हेल्थ केयर सविधाओं का विरोध कर रही हैं.

हिलेरी क्लिंटन का वादा, ‘एरिया 51’ की सूचनाएं करेंगी सार्वजनिक
अमेरिकी चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी की दौर में सबसे आगे चल रहीं हिलेरी क्लिंटन ने अलौकिक सूचनाओं को सार्वजनिक करने का वादा किया है। क्लिंटन ने कहा कि अगर वो राष्ट्रपति चुनी जाती हैं तो ‘एरिया 51’ से जुड़ी सूचनाएं जारी करेंगी। व्हाइट हाउस के मीडिया सचिव जेश अरनेस्ट ने बुधवार को इससे इन्कार करते हुए कहा कि राष्ट्रपति बराक ओबामा का इस मामले से जुड़ी सरकारी फाइलों को खोलने का कोई विचार नहीं है। अरनेस्ट से जब ये पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले क्लिंटन को हराना चहाते हैं। इस सवाल के जवाब में अरनेस्ट ने कहा कि उनकी ब्रीफिंग बुक में ‘एरिया 51’ जैसी कोई भी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति इस बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक करना चाहते हैं या नहीं इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। अरनेस्ट ने ये भी कहा कि उन्हें इस बात की उम्मीद नहीं है कि राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक्ट्राटेरेस्ट्रियल (अलौकिक) की जिंदगी से जुड़ी किसी भी सरकारी फाइल को देखा होगा। बता दें कि ‘एरिया 51’ एक नेवदा एयर फोर्स बेस है, जिसके बारे में लोगों का मानना है कि अमेरिका अलौकिकों (एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल) के बारे में गुप्त सूचनाएं यहीं रखता है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने एक रेडियो पर साक्षात्कार के दौरान क्लिंटन ने सभी गंभीर मुद्दों पर प्रस्ताव दिया और अपनी अधिक समझ भी साबित किया। जब जिमी किमेल द्वारा आयोजित एक टॉक शो में उनसे पूछा गया कि क्या आप बिना पहचान की उड़नेे वाली (यूएफओ) चीजों पर विश्वास करती हैं। किम्मेल के इस सवाल को तुरंत दुरुस्तत करते हुए क्लिंटन ने कहा कि यह एक अपूर्ण टर्मलॉजी है, जिसका नया नाम अस्पष्ट हवाई घटना (अनेेक्सप्लेन्ड एरियल फेनोमेनन )है। यूएपी एक नई शब्दावली है। इसकी स्थिति यूएफओ से ज्यादा उत्साही है। क्लिंटन ने इसे पहला ईटी ( एक्स्ट्र टेरेस्ट्रियल) उम्मीदवार घोषित किया।

‘पूर्व राष्ट्रपति को पीटती थीं हिलेरी क्लिंटन’, नई किताब में दावा
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की जिंदगी अक्सर विवादों में रही है। चाहे वह मोनिका लिविंस्की विवाद हो या फिर व्हाइटवाटर विवाद। इन विवादों की वजह से वह अक्सर चर्चा में रहे हैं लेकिन उनकी जिंदगी से जुड़े एक नए विवाद का खुलासा हुआ है। यह खुलासा राजनीतिक सलाहकार रॉजर स्टोन की किताब ‘द क्लिंटन्स वॉर ऑन वुमन’ में हुआ है जिसमें दावा किया गया है कि पूर्व राष्ट्रपति को उनकी पत्नी हिलेरी क्लिंटन पीटती थीं।

किताब के मुताबिक 1993 में जब बिल क्लिंटन अमेरिका के 42वें राष्ट्रपति बनें। उसी दौरान हिलेरी की मां की तबियत अचानक खराब हो गई जिसकी वजह से वह उन्हें देखने के लिए उनके घर चली गई। हिलेरी की मां उन दिनों अमेरिका के लिटल रॉक शहर में रहती थीं। हिलेरी जैसे ही वहां पहुंची उन्हें पता चला कि मशहूर गायिका बारबरा स्ट्रेसैंड बिल से मिलने व्हाइट हाउस पहुंची हैं और रात भर वहीं रुकी भी थी। यह खबर मिलते ही हिलेरी अगली ही फ्लाइट से वापस आईं और सीधे व्हाइट हाउस पहुंच गईं। हिलेरी के वापस आने और व्हाइट हाउस जाकर बिल से मिलने के अगले ही दिन जब बिल पत्रकारों से मुखातिब हुए तो उनके गर्दन पर कुछ निशान दिखाई दे रहे थे। उनके निशान को देखकर जब एक पत्रकार ने चोट का कारण पूछा तो बिल ने यह कहते हुए बात को टाल दिया कि ‘शेव करते समय कट गया।’ हालांकि वास्तविकता कुछ और थी लेकिन इस निशान के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने हिलेरी के ऊपर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दिया। इस बात का दावा व्हाइट हाउस के पूर्व प्रेस सचिव ने किया।

डोनाल्ड ट्रम्प- जिंदगी की अनसुनी कहानियां

donald-trump news 27 04 2016रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बनने से पहले भी डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका में एक अलग पहचान थी। ट्रंप वो नाम है जिसे अमेरिका में और खास तौर से न्यूयॉर्क की रियल एस्टेट दुनिया में स्टेटस से जोड़ कर देखा जाता है। यानी जिन लोगों के पता में ट्रंप टावर, ट्रंप प्लेस, ट्रंप पार्क या ट्रंप प्लाजा जैसे नाम हों उन्हें खुशनसीब माना जाता है। रियल एस्टेट की दुनिया में डॉनल्ड ट्रंप एक बेहद सफल कारोबारी के तौर पर जाने जाते हैं।

  • 2011 फोर्ब्स दिग्गजों की सूची में उन्हें 17वां स्थान दिया गया था.
  • उनकी ट्रंप वर्ल्ड टॉवर दुनिया की सबसे ऊंची रिहाइशी बिल्डिंग है, जिसमें 90 मंजिल हैं.
  • अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में वो रिपब्लिकन उम्मीदवार बनने में कामयाब रहे और उनका मुकाबल हिलेरी क्लिंटन से होगा.
  • NBC रियल्टी शो ‘द अपरेंटिस’ के जरिए वो 30 लाख डॉलर प्रति शो कमाते थे.
  • उनका कहना है, ‘जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए सबसे जरूरी है बड़ा सोचना’.

ट्रंप के किरदार, ट्रंप की कामयाबी, उनके बयान, उनके विवाद और निजी ज़िंदगी के क़िस्से, सब मिलाकर मसालेदार और दिलचस्प कहानी बनते हैं. अमरीका ही नहीं पूरी दुनिया आज ये जानने में दिलचस्पी दिखा रही है कि आख़िर डोनल्ड ट्रंप हैं कौन? डोनल्ड ट्रंप एक कामयाब अमेरिकी कारोबारी हैं. उनके पास अरबों रुपए की संपत्ति है. न्यूयॉर्क के बेहद महंगे मैनहैटन इलाक़े में उनके पास अच्छी ख़ासी रियल एस्टेट की ज़ायदाद है. कुल मिलाकर कहें तो वो एक रईस अमरीकी हैं.

मशहूर ‘अमरीकन ड्रीम’ की डोनल्ड ट्रंप नुमाइंदगी करते हैं. मगर दिलचस्प बात ये है कि अमरीकी मध्य वर्ग भी उन्हें ख़ूब पसंद करता है, जबकि उनकी कई नीतियां सिर्फ़ अमीरों के फ़ायदे के लिए हैं. कई देशों के लोग उन्हें दुनिया की शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा मानते हैं.

डोनल्ड ट्रंप की ज़िंदगी का सफ़र बेहद दिलचस्प और उतार-चढ़ाव से भरा है. ट्रंप 14 जून 1946 को न्यूयॉर्क के क्वींस इलाक़े में जन्मे थे. वो एक मध्यमवर्गीय लोगों के रहने वाला इलाक़ा था. डोनल्ड के पिता फ्रेड ट्रंप ने रियल एस्टेट में काफ़ी कामयाबी हासिल की थी. उस दौर में वो शानदार गाड़ियों से चलते थे, जिन्हें चलाने के लिए फ्रेड ने ड्राइवर रखे हुए थे. ट्रंप की मां, स्कॉटलैंड से अमरीका पहुंची थीं. ट्रंप के घर में अनुशासन का माहौल था. वहां गाली देने पर सख़्त पाबंदी थी. घर में अच्छे ख़ासे पैसे होने के बावजूद, फ्रेड ने अपने सभी बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा होने की सीख दी थी.

1959 में जब ट्रंप 13 बरस के थे, उनके पिता को उनके घर में स्विचब्लेड नाम का हथियार मिला. बेटा बिगड़ न जाए इसलिए ट्रंप दंपति ने बेटे को पढ़ने के लिए न्यूयॉर्क मिलिट्री स्कूल भेज दिया. वहां का माहौल और भी सख़्त था. जहां अनुशासन और तंदुरुस्ती पर काफ़ी ज़ोर दिया जाता था. ट्रंप वहां से पढ़कर 1964 में निकले. उसके बाद उन्हंने फोडर्म यूनिवर्सिटी मे दाखिला लिया. इसके दो साल बाद वो अमरीका के मशहूर वार्टन बिज़नेस स्कूल में पढ़ने के लिए गए.

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के तीन साल बाद, डोनल्ड ट्रंप रहने के लिए न्यूयॉर्क के मैनहैटन इलाक़े में आ बसे. सत्तर के दशक में ही अपने पिता से पैसे लेकर ट्रंप ने भारी नुक़सान में चल रहे कमोडोर होटल को सात करोड़ डॉलर में ख़रीदा. उन्होंने होटल की इमारत की मरम्मत कराई और 1980 में होटल को द ग्रैंड हयात के नाम से फिर से शुरू किया. ट्रंप का ये दांव बेहद कामयाब रहा. वो रातों-रात करोड़पति बन गए थे.

1982 में डोनल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क में ट्रंप टॉवर बनवाया. ये न्यूयॉर्क की मशहूर इमारतों में से एक है. कहते हैं कि इसे बनाने में पोलैंड से ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से आए मज़दूरों का बड़ा योगदान रहा था. ये इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि आज डोनल्ड ट्रंप, दूसरे देशों से आने वाले अप्रवासियों के विरोधी के तौर पर मशहूर हैं. डोनल्ड ट्रंप आज भी इसी इमारत में रहते हैं और यहीं से काम करते हैं.

अस्सी के दशक की कामयाबी के बाद नब्बे का दशक डोनल्ड ट्रंप के लिए झटकों वाला रहा. शुरुआत निजी ज़िंदगी में उथल-पुथल से हुई. उनकी पत्नी इवाना को ट्रंप के मार्ला मैपल्स नाम की महिला से अफ़ेयर की ख़बर हो गई थी. जिसके बाद इवाना ने ट्रंप से तलाक़ ले लिया. इसमें डोनल्ड ट्रंप को भारी नुक़सान उठाना पड़ा.

90 के दशक की मंदी के चलते, डोनल्ड ट्रंप के रियल एस्टेट के कारोबार को भारी नुक़सान हुआ. उनके होटल ताज महल इन अटलांटिक सिटी ने ख़ुद को दिवालिया घोषित कर दिया. यही हाल 1992 में ट्रंप प्लाज़ा का हुआ. इससे एक कामयाब कारोबारी की उनकी छवि को काफ़ी धक्का लगा.

1997 में डोनल्ड ट्रंप ने शानदार तरीक़े से वापसी की. उन्होंने अपनी शानदार नाव और ट्रंप एयरलाइंस बेच दी. इसके बाद उन्होंने मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता और मिस यूएसए और मिस टीन यूएसए की फ्रैंचाइज़ी ख़रीद ली. मनोरंजन की दुनिया में डोनल्ड का ये पहला क़दम था.

1999 में डोनाल्ड ट्रंप ने राजनीति में भी हाथ आज़माया. उन्होंने रिफ़ॉर्म पार्टी बनाई. डोनल्ड का इरादा था कि साल 2000 में रिफॉर्म पार्टी उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाए. डोनल्ड ने कहा कि वो ओप्रा विन्फ्रे को अपने साथ उप-राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाएंगे. लेकिन, रिफ़ॉर्म पार्टी के अंदरूनी झगड़ों से तंग आकर उन्होंने फरवरी 2000 में ख़ुद को चुनाव से अलग कर लिया.

अभी हाल ही में डोनल्ड ट्रंप का एक ऑडियो सामने आया था जिसमें वो महिलाओं के बारे में अभद्र बातें करते सुने गए. ये वीडियो एक टीवी शो की शूटिंग के दौरान का था. इस टीवी शो का नाम था, ”द अप्रेंटिस”.  डोनल्ड ट्रंप ने 2004 में इस टीवी शो में काम किया था. इसमें ट्रंप की कारोबारी दुनिया की झलक दिखाई गई थी. टीवी शो में ट्रंप की कंपनी को काम करने की बेहतरीन जगह के तौर पर पेश किया गया था.

इस शो के पहले सीज़न के फाइनल की रेटिंग, अमरीका में होने वाले सुपरबाउल मुक़ाबलों के बाद दूसरे नंबर पर रही थी. शो की कामयाबी की वजह से डोनल्ड ट्रंप को हॉलीवुड के हॉल ऑफ फेम में भी जगह मिली थी. 23 मई 2005 को अपनी शादी के कुछ महीनों के बाद ही डोनल्ड ने ट्रंप यूनिवर्सिटी के नाम से एक संस्था खोली. इसमें युवाओं को ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन कराने का प्रस्ताव था. इसमें रियल एस्टेट के कोर्स पर बहुत ज़्यादा ज़ोर था.

साथ ही इसमें डोनल्ड ट्रंप की कामयाबी के राज़ बताने का भी दावा किया गया था. क़रीब पांच साल बाद छात्रों ने ट्रंप यूनिवर्सिटी को एक फर्ज़ीवाड़ा बताया. जिसके बाद न्यूयॉर्क की सरकार ने इसके ख़िलाफ़ जांच शुरू कर दी. 2010 में ट्रंप यूनिवर्सिटी बंद हो गई.

यूं तो डोनल्ड ट्रंप और विवाद, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. जिसमें महिलाओँ से लेकर मुसलमानों तक के बारे में उनकी राय पर उठे विवाद को शुमार किया जा सकता है. 7 दिसंबर 2015 को डोनल्ड ट्रंप ने अपना सबसे विवादित बयान दिय था. उन्होंने साउथ कैरोलिना में एक चुनावी रैली में कहा कि मुसलमानों के लिए अमरीका के दरवाज़े पूरी तरह बंद कर दिए जाने चाहिए.

साथ ही अमरीका में रहने वाले मुसलमानों के बारे में पूरी जांच पड़ताल होनी चाहिए. उन्होंने अपने इस सख़्त प्रस्ताव से सिर्फ़ लंदन के मेयर सादिक़ ख़ान को ही छूट दी थी. इस पर काफ़ी हंगामा मचा था. आज भी बहुत से लोगों को लगता है कि ट्रंप की मुस्लिम विरोधी छवि पूरी दुनिया के लिए ख़तरनाक है.

अपने तमाम विवादों के बावजूद 19 जुलाई 2016 को डोनल्ड ट्रंप अमरीका की ग्रैंड ओल्ड पार्टी या रिपब्लिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनने में कामयाब हो गए. क्लीवलैंड में हुए पार्टी के सम्मेलन में जब उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम का एलान हुआ तो उनकी पत्नी मेलानिया और पांचों बच्चे साथ मौजूद थे.

इसके बाद उन्होंने इंडियाना सूबे के गवर्नर माइक पेंस को अपना ”रनिंग मेट” या उप-राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया. उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को ज़हरीला बताते हुए तीखे हमले किए. साथ ही लोगों से अपील की कि उन्हें वोट करके एक बार फिर से अमरीका को महान बनाएं. ट्रंप ने मेक्सिको की सीमा पर एक दीवार बनाने का भी वादा किया.

दो दौर की प्रेसिंडेंशियल डिबेट या राष्ट्रपति चुनाव की बहस के बाद डोनल्ड ट्रंप चुनावी रेस में हिलेरी क्लिंटन से पिछड़ रहे हैं. महिलाओं को लेकर उनके विवादित बयान ने भी डोनल्ड को झटका दिया है. लेकिन, अब सबकी निगाहें 8 नवंबर को होने वाले मतदान पर हैं. सवाल ये है कि क्या अमरीकी नागरिक डोनल्ड ट्रंप को वोट देकर उन्हें अगला राष्ट्रपति बनाएंगे?

बचपन
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डोनाल्ड ट्रम्प का पूरा नाम डोनाल्ड जॉन ट्रम्प हैं का जन्म 14 जून, 1946 को अमेरिका के क्वीन न्यूयॉर्क मे हुआ था। डोनाल्ड ट्रम्प. ट्रम्प सी फ्रेड एवं मरियम एनी के चौथे संतान हैं। इनके चार भाई बहन और हैं। ट्रम्प के पिता और दादा दादी जर्मन आप्रवासियों रहे थे। उनके दादा ने 1885 मे अमेरिकन नागरिकता प्राप्त कर ली। डोनाल्ड के पिता व्यसायी थे जो की एलिजाबेथ ट्रम्प एंड सन्स के नाम की कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाते थे। डोनाल्ड बचपन से ही एक ऊर्जावान, मुखर बच्चे थे। 13 साल की उम्र मे न्यूयॉर्क के मिलिटरी अकॅडमी मे एडमिशन हुआ। ट्रम्प ने अकॅडमी में अच्छा प्रदर्शन किया और 1964 मे अपने कॉलेज के लीडर चुने गये। वे अपने कॉलेज मे कई खेल के कप्तान भी रह चुके हैं।
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सफल बिजनेसमैन
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ट्रम्प ने अपने बिजनेस कॅरियर की शुरुआत अपने पिता के साथ न्यू यॉर्क से शुरू की। 1971 में उन्होंने खुद का रियल स्टेट कंपनी शुरु की। जिसका नाम उन्होंने Manhattan रियल स्टेट रखा। बिजनेस में ट्रम्प शुरुआत से ही सक्सेस के सीडी चड़ते गए। रियल स्टेट के मंझे हुए खिलाड़ी बन गये। उन्होने अपने काम के जरिए दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। सबसे ज्यादा प्रसिद्धि उन्हें– फिफ्थ एवेनियू, ट्रम्प टावर, लक्जरी आवासीय होम, ट्रम्प पार्क, ट्रम्प प्लाज़ा, ट्रम्प प्लेस, 610 पार्क एवेनियू, और ट्रम्प वर्ल्ड टावर आदि से प्राप्त हुई। इसके अलावा उन्होने कई इमारतो को भी डिजाइन किया। इसके लिए ट्रम्प को अवॉर्ड भी मिले। ट्रम्प कई होटलो और प्रसिद्ध इमारतो का भी निर्माण करवा चुके है जिनमे होटेल प्लाजा भी शामिल हैं।

  • ट्रम्प बताते हैं– मैं अपने पिता को अपना आइडीयल मानता हूं। मैंने अपने पिता के साथ लगभग 5 साल तक कारोबार किया। जब वे अपने क्लाइंट के साथ डील करने मे बीजी रहते थे। तब मैं बहुत ध्यान से उनकी बात सुना करता था। मैंने उनसे कंस्ट्रक्शन वर्क के बारे मे बहुत ज्ञान प्राप्त किया। ट्रम्प बताते हैं मेरे पिता मुझे अपना लकी मानते थे। उनके अनुसार जब भी मैं उनके साथ रहता था तो उनकी बहुत अच्छी डील होती थी।

ट्रंप की सफलता के 10 मंत्र…
सभी की सुनने की आदत डालो- ट्रंप का कहना है कि सफल लीडर बनने के लिए आपको सभी की सुनने की आदत डालनी होगी। वे कहते हैं कि हिटलर एक बुरा आदमी था, पर उसके पास महान आइडिया थे। इसलिए सबकी सुनो, पता नहीं कहां से एक महान आइडिया आपको मिल जाए।

लड़ें, हारें फिर लड़ें- ट्रंप का कहना है कि कई बार एक छोटी लड़ाई हारने से आपको बड़ी लड़ाइयां जीतने के तरीके मिल जाते हैं। इसलिए हार को निराशा में मत लो। चाहे हार गए, पर आप लड़कर यह तो जान गए कि आपका प्रतिद्वंदी कैसे लड़ता है। इससे सीख लें और आगे की तैयारियां करें।

पहले से प्लानिंग करो- ट्रंप का मानना है कि लोग कहते हैं कि ट्रंप सफल हुए या हैं, पर ऐसा नहीं है। उन्हें यह नहीं पता कि मैं सफल हुआ नहीं, मैने खुद को सफल बनाया है। इसके लिए मैने अपनी हर बिजनेस प्लानिंग काफी पहले से शुरू की। इसमें असफलताएं भी मिलीं। इन असफलताओं के अनुभव से मैंने सफलता बनाई या हासिल की।

लोगों के अनुसार खुद को बदलो- सफल लीडर बनने के लिए ट्रंप कहते हैं कि आप यह लगातार नोट करें कि आपका साथ लोगों को कैसा लगता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपकी टीम आपके बिना ज्यादा कम्फर्टेबल फील करती हो। अगर ऐसा है तो आपको खुद को बदलने की जरूरत है। लेकिन अगर आपका साथ लोगों को अच्छा लगने लगा है, तो समझ लें कि सफलता जल्दी ही मिल जाएगी।

टीम को प्रेरित करें- ट्रंप कहते हैं कि अपनी टीम की भावनाओं को समझना बहुत जरूरी है। किसी काम के प्रति उनका नजरिया जानें। अगर वे आपके सामने अपनी बात ठीक से नहीं रख पा रहे हैं तो आप उनकी सोच को शब्द दें। इन शब्दों को हकीकत बनाने के लिए टीम को प्रेरित करें। जब आपके काम में उनकी कही बात साकार होगी, तो आपको भी फायदा मिलेगा। टीम का इमानदार सपोर्ट भी मिलेगा।

नपे-तुले शब्दों का इस्तेमाल करें- एक लीडर को सफल बनने के लिए नपे-तुले शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए। ट्रंप कहते हैं कि यह ध्यान रखना चाहिए जब आप बहुत से लोगों से बात कर रहे हैं तो केवल उन बातों का ही प्रॉमिस करें, जो आप कर सकते हैं। लोगों को फालतू सपने न दिखाएं। जो कहें उसे करके दिखाएं। ऐसा होने पर आपकी टीम का भरोसा आप पर बढ़ेगा और सबका विकास होगा।

माहौल खुशनुमा रखें- ट्रंप कहते हैं कि उन्होंने अपने अनुभव से सीखा है कि काम के दौरान माहौल का बहुत फर्क पड़ता है। तनाव में आपके लोग अच्छा आउटपुट नहीं दे पाते। अगर माहौल खुशनुमा रहेगा तो आपकी प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी। यही बात दूसरे लोगों से बात करते हुए भी उपयोगी है। खुशमिजाज लोगों से मिलना लोग पसंद करते हैं। काम के प्रति सीरियस रहें, पर माहौल खुशनुमा बनाएं।

नियमों की परवाह मत करो, जरूरत के हिसाब से बनाते-तोड़ते रहो- ट्रंप का कहना है कि चाहे जो भी नियम हो, लोग उसे अपने फायदे के लिए तोड़ते रहते हैं। इसलिए आपकी सफलता के आगे कोई नियम आ रहा है तो उसे तोड़ दो। वे कहते हैं कि कई बार मार्केट रिसर्च कुछ कहती है और आपका मन कुछ कहता है। ऐसे में अगर सभी रिसर्च के साथ जाना चाहें और आपका मन न करे, तो लोगों के साथ चलने का नियम तोड़ दो।

निजी लाइफ

अपनी तीनों पत्नियों के साथ ट्रम्प

तीन शादियां: ट्रम्प ने अभी तक तीन शादियां की। पहली शादी इवाना (पूर्व ओलिंपिक खिलाड़ी ) से की थी। 1977 में हुई यह शादी 1991 तक चली। उस समय ट्रम्प की काफी आलोचना हुई थी। इसके बाद 1993 मे प्रसिद्ध अभिनेत्री मरला मेपल्स से शादी की जिनसे अफेर के चर्चे काफी पहले से थे। मेपल्स ने ट्रम्प के बेटे को जन्म दिया जोकि ट्रम्प की चौथी संतान थी। ये शादी भी ज्यादा दिन तक टिकी नही और 1999 मे दोनो के बीच तलाक हो गया। इस तलाक मे ट्रम्प को 2 बिलियन डॉलर मरला को देना पड़ा।  बाद मे 2005 मे ट्रम्प ने मशहूर मॉडल मेलानिया कनौस से शादी जो 2006 मे ट्रम्प के 5 वी संतान को जन्म दी। पहली बीवी से तीन और दूसरी तथा तीसरी से एक-एक संतान है। स्लोवेनिया में जन्मी मेलानिया पहले और मोनिकेर मेलेनिया के नाम से जानी जाती थीं। मेलेनिया पूर्वी यूरोप में पैदा हुई थीं और अमेरिका में मॉडलिंग के दौरान डोनाल्ड से मिली थीं। मेलेनिया और ट्रंप की शादी को 10 साल से ज्‍यादा हो चुके हैं। दोनों को एक बेटा भी है।
  • ट्रंप की पत्नी मेलानिया की नग्न तस्वीरों को प्रकाशित करने पर हुआ था विवाद- अमेरिकी टैबलॉइड ने रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप की नग्न तस्वीरें प्रकाशित की है। इस पर काफी विवाद हो रहा है। ये तस्वीरें 1990 के दौर की हैं जब मेलानिया मॉडलिंग करती थीं। न्यूयॉर्क पोस्ट में रविवार (31 जुलाई) को पहले पन्ने पर छपी मेलानिया की नग्न तस्वीर के नीचे लिखा है, ‘संभावित प्रथम महिला को आपने इस तरह पहले कभी नहीं देखा होगा।’ अखबार में बताया गया है कि कुछ तस्वीरें ‘शायद ही कभी देखी गई हैं और अन्य तो कभी प्रकाशित भी नहीं हुई’। इन्हें 1995 में मेनहट्टन में एक शूट के दौरान लिया गया था। ये तस्वीरें फ्रांस की पुरुषों की एक पत्रिका के लिए ली गई थीं। यह पत्रिका अब बंद हो चुकी है। ट्रंप की पत्‍नी की न्‍यूड फोटो सामने आने का यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी मेलानिया की न्‍यूड तस्‍वीरें सामने आई थी। तस्वीरों के बारे पूछे जाने पर ट्रंप ने पोस्ट को कहा, ‘मेलेनिया बेहद सफल मॉडलों में से एक थीं और उन्होंने कई फोटो शूट किए जिनमें से कई तो कवर और प्रमुख पत्रिकाओं के लिए थे। यह तस्वीर एक यूरोपीय पत्रिका के लिए ली गई थी लेकिन तब तक मेरी और मेलेनिया की मुलाकात नहीं हुई थी। यूरोप में इस तरह की तस्वीरें बहुत आम होती हैं।

राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत

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ट्रम्प ने अपनी राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत अक्तूबर 1999 मे रिफॉर्म पोलिटिकल पार्टी के जरिए की। 2000 के अमेरीकी राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में शामिल भी हुए। लेकिन बिजनेस में कुछ परेशानियों के कारण अगस्त 2000 मे ट्रम्प को वापस अपने काम तरफ जाना पड़ा।

फिर 2012 मे उन्होंने फिर से राजनीतिक की तरफ रुख किया और प्रेसीडेंट की रेस के लिए खुद को उम्मीदवार घोषित किया। ट्रम्प ने हमेशा ही राष्ट्रपति बराक ओबामा को आड़े हाथ लिया। ओबामा की राष्ट्रीयता पर सवाल उठाए। 16 जून 2015 को ट्रम्प ने अधिकारिक तौर पे खुद को रिपब्लीकेशन पार्टी की तरफ से टिकट मिलने के बाद राष्ट्रपति पद के दौड़ मे शामिल किया।

डेमोक्रेटिक से रिपब्लिकन की ओर झूकाव- डोनाल्ड ट्रम्प पहले डेमोक्रेटिक पार्टी को सपोर्ट करते थे। 2001 तक वे इस पार्टी के रजिस्टर्ड मेंबर थे। ट्रम्प ने 2009 में रिपब्लिकन पार्टी में रजिस्ट्रेशन कराया। पहले वे रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों को चुनावी चंदा देते रहे हैं।

1988, Trump floated the idea of running for president in 1988, 2004, and 2012, and for Governor of New York in 2006 and 2014, but did not enter those races. He was considered as a potential running mate for George H. W. Bush on the Republican Party’s 1988 presidential ticket but lost out to future Vice President Dan Quayle. There is dispute over whether Trump or the Bush camp made the initial pitch.

1999, Trump filed an exploratory committee to seek the presidential nomination of the Reform Party in 2000. A July 1999 poll matching him against likely Republican nominee George W. Bush and likely Democratic nominee Al Gore showed Trump with seven percent support. Trump eventually dropped out of the race due to party infighting, but still won the party’s California and Michigan primaries after doing so.

2009, Trump appeared on The Late Show with David Letterman, and spoke about the automotive industry crisis of 2008–10. He said that “instead of asking for money”, General Motors “should go into bankruptcy and work that stuff out in a deal”.

2011, Trump publicly questioned Barack Obama’s citizenship and eligibility to serve as President. Although Obama had released his birth certificate in 2008,

2012, Republican primaries, Trump generally had polled at or below 17 percent among the crowded field of possible candidates. On May 16, 2011, Trump announced he would not run for president in the 2012 election, while also saying he would have won.

2013, Trump was a featured speaker at the Conservative Political Action Conference (CPAC). During the lightly attended early-morning speech, Trump said that President Obama gets “unprecedented media protection,” he spoke against illegal immigration, and advised against harming Medicare, Medicaid and Social Security.

In October 2013, New York Republicans circulated a memo suggesting Trump should run for governor of the state in 2014, against Andrew Cuomo; Trump said in response that while New York had problems and taxes were too high, running for governor was not of great interest to him.

In February 2015, Trump said he told NBC that he was not prepared to sign on for another season of The Apprentice at that time, as he mulled his political future.

June 16, 2015, Trump announced his candidacy for President of the United States at Trump Tower in New York City. He drew attention to domestic issues such as illegal immigration, offshoring of American jobs, the U.S. national debt, crime, and Islamic terrorism. He also announced his campaign slogan, “Make America Great Again.”

ट्रम्प से जुड़ी रोचक बातें

  • बिजनेस और ख्याति: 14 जून 1946 को जन्में डोनाल्ड जॉन ट्रम्प धनी परिवार से ताल्लूक रखते हैं। उन्होंने करियर की शुरुआत पिता की रियल इस्टेट कंपनी से की थी। आज से इन कंपनी के सर्वेसर्वा हैं। उनकी कुल सम्पत्ति 400 करोड़ डॉलर है। आज उनकी पहचान एक अमेरिकी बिजनेसमैन, टीवी पर्सनालिटी, राजनेता, लेखक और राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार के रूप में है।
  • ट्रम्प ताजमहल: ट्रम्प ने अपने नाम से कई कैसिनो, गोल्फ कोर्स, होटल बनवाए हैं। ऐसी ही एक बिल्डिंग है ट्रम्प ताज महल। यह न्यूजर्सी स्थित एक कैसिनो है। 2004 से 2015 तक उन्होंने एबीसी रियल्टी शो भी होस्ट किया था।
  • कंगाल से करोड़पति: बहुत कम लोग जानते हैं कि 1990 में ट्रम्प दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए थे। हालांकि अगले चार साल में उन्होंने 90 करोड़ रुपए का कर्ज चुका दिया। इसके लिए उन्हें अपनी कई सम्पत्तियां बेचनी पड़ी।
  • फुटबॉल के शौकिन: ट्रंप को फुटबॉल का भी काफी शौक है 1962 में अपनी यूनिवर्सिटी की टीम से खेल भी चुके हैं, यही कारण है कि उन्होंने 1984 में अमेरिकी फुटबॉल लीग में न्यूजर्सी टीम को खरीदा था।
  • अनोखी प्रॉपर्टी को मालिक: 90 मंजिला ट्रम्प टॉवर दुनिया की सबसे ऊंची रहवासी इमारत है। 18 बैडरूम वाला ट्रम्प पैलेस अमेरिका की सबसे महंगी प्रॉपर्टी है।
  • नशे से दूर: ट्रम्प ने कभी शराब और सिगरेट नहीं पी है। वहीं उनका बड़ा भाई फ्रेड अत्यधिक शराब पीने के कारण असमय दुनिया छोड़ गया। ट्रम्प भले ही नहीं पीते हों, लेकिन 2006 में उन्हें अपने नाम के ब्रांड वाली वोदका लांच की थी।
  • हेयरस्टाइल का राज: ट्रम्प जब सोकर उठते हैं तो वैसे बिल्कुल नहीं लगते, जैसे हम तस्वीरों में उन्हें देखते हैं। वे अपने बालों को हेयरड्रायर की मदद से आगे लाते हैं और फिर पीछे ले जाते हैं।
  • ओबामा से छत्तीस का आंकड़ा: ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के कट्टर विरोधी हैं। ओबामा के जन्म प्रमाणपत्र के खिलाफ अभियान में छेड़ने में उनका बड़ा हाथ था। हाल ही में उन्होंने ऑफर दिया है कि ओबामा राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देते हैं तो वे उनके किसी भी गोल्फ कोर्स पर खेलने के लिए आमंत्रित हैं।
  • अनोखी आदतः ट्रम्प को हाथ मिलाना पसंद नहीं है। जब कोई उन्हें इसके लिए मजबूर करता है तो वे उस शख्स का हाथ पकड़कर उसे अपनी तरह खींच लेते हैं।
  • ट्रम्प बनाम भारत: अपनी हालिया चुनावी भारत में ट्रम्प ने कॉल सेंटर प्रतिनिधि के अंग्रेजी में बात करने की नकल उतारते हुए भारत का मजाक उड़ाया। हालांकि तुरंत ही भारत को एक महान देश बताया और कहा कि वह भारतीय नेताओं से नाराज नहीं हैं। इससे पहले एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, भारत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन कोई इस बारे में बात नहीं करता।

आखिर कितने अमीर हैं डॉनल्ड ट्रंप

फोर्ब्स के मुताबिक ट्रंप की कुल संपत्ति 3.7 अरब डॉलर है जो पिछले साल के मुकाबले 80 करोड़ डॉलर कम है. 2016 में फोर्ब्स की सूची में वे 35 स्थान लुढ़कर 156वें पायदान पर आ गए हैं. पिछले साल अक्टूबर में ट्रंप की कुल संपत्ति 4.5 अरब डॉलर थी और वे ‘400 सबसे अमीर अमेरिकियों की फोर्ब्स की सूची में’’ 121वें पायदान पर थे.ट्रंप और उनके पिता 1982 में आई पहली सूची में भी थे और उनकी साझा संपत्ति 20 करोड़ डॉलर थी. लेकिन 1990 में कारोबार में हुए घाटे के बाद ट्रंप इस सूची से बाहर हो गए थे. छह साल बाद 45 करोड़ डॉलर संपत्ति के साथ वे सूची में फिर लौट आए.
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  • लास वेगस- लास वेगस में ट्रंप इंटरनेशनल होटल एंड टावर स्थित है. इसके बराबर में मौजूद लक्जरी विन रिजॉर्ट भी इसके सामने बौना नजर आता है. ट्रंप कॉम्प्लेक्स इस शहर की तीसरी सबसे ऊंची इमारत है।
  • शिकागो- शिकागो के बहुत सारे लोगों को यहां दिखने वाले ट्रंप होटल एंड टावर से परेशानी है. मेयर राहम इमैनुएल ने तो इसे “भद्दा और असुरुचिपूर्ण” तक कह डाला और उनके नाम के हिस्से ‘ट्रंप’ को बैन भी करवाया. लेकिन पांच साल के बाद फिर ट्रंप ने इसकी 16वीं मंजिल पर अपना नाम लगवा लिया।
  • अटलांटिक सिटी- यहां ताज महल कैसे? असल में ट्रंप ने 1990 में न्यू जर्सी की अटलांटिक सिटी में ताज महल का निर्माण कार्य पूरा करवाया. करीब एक अरब डॉलर की लागत से बने इस कसीनो और होटल को 25 साल तक चलाने के बाद दिवालिया होने की नौबत आ गई थी. 2014 में यह बिक गया लेकिन नए मालिकों ने ट्रंप ब्रांड नहीं छोड़ा।
  • मैनहैट्टन की सड़कों पर- न्यूयॉर्क में स्थित ट्रंप टावर उनकी बहुत खास संपत्ति माना जाता है. ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के अभियान के लिए यही उनका मुख्यालय भी है. इस इमारत में फुटबॉल सितारे क्रिस्टियानो रोनाल्डो, अभिनेता ब्रूस विलिस जैसे कई मशहूर सेलेब्रिटीज के आशियाने हैं. खुद ट्रंप का परिवार भी यहीं लक्जरी टावर में रहता है।
  • न्यूयॉर्क का विवादित प्रतीक- 725 फिफ्थ एवेन्यू पर बने ट्रंप टावर को बहुत से स्थानीय निवासी पसंद नहीं करते तो कई इसे बहुत शालीन और टाइमलैस बताते हैं. यह छह मंजिला ट्रंप टावर संगमरमर और सुनहरे रंगों से सजा है. आधुनिक आर्किटेक्चर के शौकीनों और ट्रंप समर्थकों के लिए यह बड़ा आकर्षण है।
  • गरीबी-अमीरी का साफ अंतर- पनामा सिटी के ट्रंप ओशन क्लब में एक होटल, 700 अपार्टमेंट और अपना प्राइवेट यॉट क्लब है. यह पूरे लैटिन अमेरिका की सबसे ऊंची बिल्डिंग है. हालांकि इससे पास ही स्थित गरीब लोगों की बस्ती के कारण कई लोग इन अपार्टमेंट में नहीं रहना चाहते।
  • स्कॉटिश विरोध- भले ही एबरडीन, स्कॉटलैंड में बनाए अपने ट्रंप इंटरनेशनल गोल्फ लिंक्स एस्टेट को डॉनल्ड ट्रंप “दुनिया का सर्वोत्तम गोल्फ कोर्स” कहते रहें, पास की एक जमीन को बेचने के लिए एक स्थानीय स्कॉट आज तक तैयार नहीं हुआ. जून में ही ट्रंप वहां पहुंचे और स्कॉटलैंड के ईयू में बने रहने की इच्छा को नजरअंदाज करते हुए यूके के ब्रेक्जिट के निर्णय की खूब तारीफ की।
  • एर्दोआन के मुकाबले ट्रंप- पूरे यूरोप में सबसे पहला ट्रंप टावर इस्तांबुल में ही बना था. यह अपने विशाल वाइन संग्रह के लिए मशहूर है. हालांकि इस ऊंचे टावर से ट्रंप का नाम हटाने की मांग हो रही है. इस कॉम्प्लेक्स का मालिक एक तुर्की अरबपति है जिसने ट्रंप ब्रांड नेम लिया हुआ है. ट्रंप के इस्लाम और मुस्लिम विरोधी विचारों के कारण राष्ट्रपति एर्दोआन समेत तुर्की के कई मुसलमान नाखुश हैं।

Trump Tower , 725 Fifth Avenue , Midtown Manhattan: A 58-story mixed-use tower, the headquarters of the Trump Organization, now 100 percent leased, was developed by a business partnership between the Trump Organization and the Equitable Life Assurance Society of the United States in 1983. Trump retains full control of the commercial and retail components of the tower. In 2006, it was valued at $318 million, less a $30 million mortgage. The total value of Trump Tower’s commercial and retail spaces is $460 million. The building was refinanced for $100 million in August 2012, allowing Trump to take a cash distribution of over $73 million.

Personal Residence Trump Tower: Top 3 floors of Trump Tower with approximately 30,000 square feet (3,000 m²) of space; the triplex penthouse is decorated in diamond, 24-carat gold and marble, and features an interior fountain and a massive Italianate-style painting on the ceilings. Worth as much as $50 million, it is one of the most valuable apartments in New York City.

Trump World Tower , 845 United Nations Plaza, also in Midtown Manhattan: In 2006, Forbes estimated “$290 million in profits and unrealized appreciation” going to Trump.

AXA Financial Center 1290 Avenue of the Americas, New York City and 555 California Street , in San Francisco: When Trump was forced to sell a stake in the railyards on Manhattan’s West Side, the Asian group to which he sold then sold much of the site for $1.76 billion. Trump owns a 30 percent stake in both 1290 Sixth Avenue and 555 California Street. A 43-story trophy office tower, 1290 Sixth is worth as much as $1.5 billion.Trump’s stake is estimated to be $450 million.Trump’s interest in 555 California Street is worth $400 million.

The Trump Building at 40 Wall Street : Trump bought and renovated this building for $1 million in 1995. The pre-tax net operating income at the building as of 2011 was US$20.89 million and is valued at $350 to $400 million, according to the New York Department of Finance. Trump took out a $160 million mortgage attached to the property with an interest rate of 5.71 percent to use for other investments. Forbes valued the property at $260 million in 2006.

Trump Entertainment Resorts : This company, now owned by billionaire Carl Icahn , owns two Trump branded casino resorts, only one of which continues to operate today. After a long period of financial trouble, the company entered bankruptcy protection in 2001, 2004, 2009, and later in 2014 owing $1.2 billion in debts. In 2004, Trump agreed to invest $55 million cash in the new company and pay $16.4 million to the company’s debtors. In return he held a 29.16% stake in the new public company. This stake was worth approximately $171 million in October 2006.

Riverside South/Trump Place : Riverside South is currently the largest single private development in New York City. Until he ceased active involvement in 2001, Trump was the developer, although the majority interest was held by investors from Hong Kong through their Hudson Waterfront Associates.

Trump International Hotel and Tower Chicago : The entire project is valued at $1.2 billion ($112 million stake for Trump).

Trump Hotel Las Vegas : A joint development with fellow Forbes 400 members, Phil Ruffin , and Jack Wishna . Trump’s stake is valued at $162 million.

Trump International Hotel and Tower New York : Trump provided his name and expertise to the building’s owner (GE) during the building’s re-development in 1994 for a fee totaling $40 million ($25 million for project management and $15 million in incentives deriving from the condo sales). Forbes values Trump’s stake at $12 million. In March 2010, the penthouse apartment at Trump International Hotel & Tower in New York City sold was for $33 million.

Trump Park Avenue Park Avenue & 59th Street : It is valued at $142 million. Trump owns 23 apartments at Trump Park Avenue, which he rents for rates as high as $100,000 per month, and 19 units at Trump Parc.

Nike Store: The NikeTown store is located in Trump Tower. The leasehold valued at $200 million. Nike’s lease in the building expires in 2017 and the building serves as collateral for bonds held by Trump worth $46.4 million.

Palm Beach estate: A 43,000 square feet (4,000 m²) large oceanfront mansion lot in Palm Beach. Trump purchased this property for $40 million at a bankruptcy auction in 2004. Trump sold the property for $100 million in June 2008, making it the most expensive house ever sold in the United States. (The previous record is $70 million for Ron Perelman ‘s Palm Beach estate in 2004.).

Mar-a-Lago Palm Beach, Florida : Most of this estate has been converted into a private club. This landmark property, according to Trump, has received bids near $200,000,000.

Seven Springs: A 213-acre estate located outside the town of Bedford in Westchester County. The building features a 13-bedroom mansion, but is also zoned to allow for the construction of 13 additional homes at the site. Trump paid $7.5 million for the entire property in 1995. Local Westchester County brokers put the property’s value at around $40 million.

Beverly Hills estate: A large mansion located on Rodeo Drive. The property is valued at $8.5 to $10 million.

शौकिन ट्रंप
Golf course: The Trump Organization operates many golf courses and resorts in the United States and around the world. The number of golf courses that Trump owns or manages is about 18, according to Golfweek.[99] Trump’s personal financial disclosure with the Federal Elections Commission stated that his golf and resort revenue for the year 2015 was roughly $382 million.

Professional sports: In 1983, Trump’s New Jersey Generals became a charter member of the new United States Football League (USFL). Before the inaugural season began in 1983, Trump sold the franchise to Oklahoma oil magnate J. Walter Duncan, and bought it back after the season. He then attempted to hire longtime Miami Dolphins coach Don Shula, but the deal fell apart because he was unwilling to meet Shula’s demand for an apartment in Trump Tower. The 1986 season was cancelled after the USFL won a pyrrhic victory in an antitrust lawsuit against the NFL: the NFL technically lost the suit, but the USFL was awarded just $3.00 in cash damages. The USFL, which was down to just 7 active franchises from a high of 18, folded soon afterward.

Mike Tyson’s fight: He also hosted several boxing matches in Atlantic City at the Trump Plaza, including Mike Tyson’s 1988 fight against Michael Spinks, and at one time acted as a financial advisor for Tyson. In February 1992, Mike Tyson was convicted in Indiana for raping an 18-year-old beauty pageant contestant. Before he was sentenced, Trump stated that the trial was a “travesty” and that he had seen many women groping Tyson. Trump suggested that Tyson should be released from prison and allowed to continue fighting, and offered to promote one or more bouts, the proceeds of which ($15 to $30 million, according to Trump) would go to Tyson’s accuser and to victims of rape and abuse.

Beauty pageants
From 1996 until 2015, when he sold his interests, Trump owned part or all of the Miss Universe, Miss USA, and Miss Teen USA beauty pageants. Among the most recognized beauty pageants in the world, the Miss Universe pageant was founded in 1952 by the California clothing company Pacific Mills.

Trump was dissatisfied with how CBS scheduled his pageants, and took both Miss Universe and Miss USA to NBC in 2002. In 2006, Miss USA winner Tara Conner tested positive for cocaine, but Trump let her keep the crown, for the sake of giving her a second chance. That decision by Trump was criticized by Rosie O’Donnell, which led to a very blunt and personal rebuttal by Trump criticizing O’Donnell.

In 2015, NBC and Univision both ended their business relationships with the Miss Universe Organization after Trump’s controversial 2015 presidential campaign remarks about Mexican illegal immigrants. Trump subsequently filed a $500 million lawsuit against Univision, alleging a breach of contract and defamation.

On September 11, 2015, Trump announced that he had become the sole owner of the Miss Universe Organization by purchasing NBC’s stake, and that he had “settled” his lawsuits against the network, though it was unclear whether Trump had yet filed lawsuits against NBC. He sold his own interests in the pageant shortly afterwards, to WME/IMG. The $500 million lawsuit against Univision was settled in February 2016, but terms of the settlement were not disclosed.

फिल्मों का शौक

Trump has twice been nominated for an Emmy Award and has made appearances as a caricatured version of himself in television series and films. He has also played an oil tycoon in The Little Rascals. Trump is a member of the Screen Actors Guild and receives an annual pension of more than $110,000. He has been the subject of comedians, flash cartoon artists, and online caricature artists. Trump also had his own daily talk radio program called Trumped!

In 2003, Trump became the executive producer and host of the NBC reality show The Apprentice, in which a group of competitors battled for a high-level management job in one of Trump’s commercial enterprises. Contestants were successively “fired” and eliminated from the game. In 2004, Trump filed a trademark application for the catchphrase “You’re fired.”On February 16, 2015, NBC announced that they would be renewing The Apprentice for a 15th season. On February 27, Trump stated that he was “not ready” to sign on for another season because of the possibility of a presidential run

Filmography
Ghosts Can’t Do It (1989)
Home Alone 2: Lost in New York (1992)
Across the Sea of Time (1995)
The Little Rascals (1995)
Eddie (1996)
The Associate (1996)
Celebrity (1998)
Zoolander (2001)
Two Weeks Notice (2002)
Wall Street: Money Never Sleeps (2010)

डॉनल्ड ट्रंप के उलफजूल बयान

  • 7/11?- “मैं वहीं था, मैंने पुलिस और दमकल कर्मियों को देखा था, 7/11 को, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर, इमारत ढहने के ठीक बाद.” ट्रंप 9/11 की बात कर रहे थे लेकिन तारीख में थोड़ा सा चूक गए।
  • साइज का मामला!- “मेरे हाथ देखिए, क्या आपको ये छोटे लगते हैं? लोग कहते हैं कि अगर हाथ छोटे हैं, तो कुछ और भी छोटा होगा. मैं आपको गारंटी देता हूं, मुझे ऐसी कोई दिक्कत नहीं हैं!” 
  • संभल कर टेड!- “टेड क्रूज ने अपने कैम्पेन के लिए मेलानिया की एक तस्वीर का इस्तेमाल किया है. ध्यान रहे टेड, मैं भी तुम्हारी पत्नी की पोल खोल सकता हूं.” डॉनल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप की कई न्यूड तस्वीरें इंटरनेट में फैली हैं, जिन्हें अब अखबार भी छापने लगे हैं।
  • बेटी संग डेट? “इवांका अगर मेरी बेटी ना होती, तो शायद मैं उसे डेट कर रहा होता.” इवांका ट्रंप 34 साल की हैं. बाप बेटी की 20 साल पहले ली गयी एक तस्वीर पर भी काफी बवाल हुआ जिसमें इवांका पिता की गोद में बैठी हैं।
  • बड़बोले ट्रंप! “अगर हिलेरी क्लिंटन अपने पति को संतुष्ट नहीं कर सकती हैं, तो वो यह कैसे सोच सकती हैं कि वो पूरे अमेरिका को संतुष्ट कर देंगी?” ट्रंप का इशारा बिल क्लिंटन और मोनिका लेविंस्की के अफेयर की तरफ था।
  • जुमलेबाज ट्रंप?! “मैं एक बड़ी सी दीवार बनाऊंगा, और यकीन मानिए, मुझसे अच्छी दीवारें कोई भी नहीं बना सकता. मैं देश की दक्षिणी सीमा पर यह बड़ी सी दीवार बनाऊंगा और मेक्सिको से उसके पैसे भी वसूल लूंगा.”
  • ये ब्रेक्जिट, ब्रेक्जिट क्या है? “मैं अभी स्कॉटलैंड पहुंचा. यहां तो वोट के चलते तहलका मचा है. इन लोगों ने अपने देश को वापस जीत लिया है, वैसे ही जैसे हम अमेरिका को वापस जीत लेंगे.” ट्रंप को शायद ब्रेक्जिट के आंकड़े समझ नहीं आए. स्कॉटलैंड ने ईयू में बने रहने के लिए वोट दिया था।
  • रूस, सुन रहा है ना तू? “रशिया, अगर तुम सुन रहे हो, मैं उम्मीद करता हूं कि तुम उन 30,000 ईमेल्स को ढूंढ सकोगे जो गायब हैं.” ट्रंप यहां रूस को निमंत्रण दे रहे थे कि वह हिलेरी क्लिंटन के अकाउंट को हैक करे।
  • शब्दों से नहीं, असली वार? “हिलेरी क्लिंटन सेकंड अमेंडमेंट को हटा देना चाहती हैं. जिस दिन सत्ता उनके हाथ में आ गयी, आप कुछ भी नहीं कर सकेंगे. पर शायद सेकंड अमेंडमेंट वाले लोग कुछ कर सकें, क्या पता!” यहां ट्रंप गन लॉबी को क्लिंटन की ओर बंदूकें मोड़ने की सलाह दे रहे हैं।
  • मैं और मेरा आईक्यू! “मैं सबसे ज्यादा आईक्यू वाले लोगों में से हूं और आप सब यह बात जानते हैं. इसमें खुद को मूर्ख या असुरक्षित महसूस करने की कोई जरूरत नहीं है, इसमें आपकी कोई गलती नहीं है!”
सेलिब्रिटी कौन ट्रंप के साथ और कौन हिलेरी के साथ
imggalleryट्रंप के पक्ष में नहीं ये बातें

अनुभवी नहीं हैं ट्रंप
  • डोनाल्ड ट्रंप को राजनीति का कोई अनुभव नहीं है. न ही वह कभी किसी तरह के सरकारी मशीनरी से जुड़े. ऐसे में उनके लिए अमेरिकी कांग्रेस से तालमेल बिठाना और दोनों पार्टी के सदस्यों को अपने विचारों पर सहमत कर पाना खासा मुश्किल होने वाला है. क्योंकि ट्रंप को पता ही नहीं है कि सरकारी काम होते कैसे हैं.
आइडिया कैसे बनेगा हकीकत
  • डोनाल्ड ट्रप जहां अपने संबोधनों में बड़ी बड़ी और विवादास्पद बाते करते नजर आते हैं, वहीं उनकी इन बातों को वह अमली जामा कैसे पहनाएंगे इसका शऊर शायद उन्हें खुद ही नहीं है. कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप जो कह रहे हैं उसको पूरा कैसे करेंगे इसका उनके पास कोई सॉलिड प्लान नहीं है. अपने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के चलते उन्होंने कभी किसी भी मुद्दे को लेकर अपनी स्पष्ट राय पेश नहीं की. सिर्फ हवा में तीर चलाते हैं. ‘मास डिपोर्टेशन’ की बात करने वाले ट्रंप ने इसपर भी अपने पत्ते नहीं खोले.
पब्लिसिटी के लिए हवा में बाते करते हैं
  • रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार ट्रंप पब्लिसिटी के लिए किसी भी हद तक गुजर जाते हैं. कई बार ऐसे बयान भी दे चुक हैं जिनसे काफी विवाद हुआ. अमेरिका-मैक्सिको के बॉर्डर पर दीवार बनाने की बात हो या अमेरिका में नौकरी कर रहे विदोशियों को निकालने की बात हो. मुसलमानों की एंट्री बंद करने की या मैक्सिकन लोगों को रेपिस्ट कहने की. इन बयानों से उनको काफी पब्लिसिटी हासिल हुई है.
कई बार दिवालिया हो चुके हैं
  • डोनाल्ड ट्रंप चार बार दिवालिया हो चुके हैं. हालांकि इसकी जिम्मेदारी लेने से व पूरी तरह पलट जाते हैं लेकिन ये सच है कि वह बिजनेस में भी मात खा चुके हैं. ऐसे में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभाल पाने में वह कितने सफल हो पाएंगे इसपर बड़ा सवालिया निशान लगा है.
जातिवादी हैं
  • जो लोग बराक ओबामा के धर्म को लेकर उनपर उंगलियां उठाते आए हैं और ट्रंप के जातिवादी टिप्पणियों के लिए उसकी पीठ थपथपा रहे हैं. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या वाकई ट्रंप बड़े धार्मिक इंसान हैं. नहीं ट्रंप का दो बार तलाक हो चुका है और तीन शादियां. हाल ही में अपने चर्च जाने को लेकर जो बयान उन्होंने दिया उसपर जमकर हंगामा हुआ था. अश्वेतों और मुस्लिमों को लेकर दिए उनके विवादित बयान काफी हंगामा मचा चुके हैं.
इंसानियत से दूर हैं
  • ट्रंप नैतिकता में कितने आगे हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने गोल्फ कोर्स बनाने के लिए स्कॉटिश नागरिकों को बेघर कर दिया था. उनके घरों पर बुल्डोजर चलवाए थे. ठीक ऐसी ही कुछ हरकत ट्रंप ने अल्पसंख्यकों के होटल और कसीनो को उजाड़ कर की थी. वह कई बार गरीब लोगों के अफोर्डेबल स्वास्थ्य सेवाओं के खिलाफ भी बोलते नजर आएं हैं. ऐसे में अगर ट्रंप राष्ट्रपति बन गए तो अमेरिका के गरीबों की कितनी मदद करेंगे ये सोच पाना मुश्किल नहीं होगा.
खराब भाषा के ज्ञानी हैं
  • अपनी भद्दी भाषा को लेकर ट्रंप को कई बार फजीहत झेलनी पड़ी है. ट्रंप ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं जो एक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को शोभा नहीं देती. अमेरिकी अखबारों में उनकी भाषा को थर्ड ग्रेड का भी बताया जा चुका है.

डोनाल्ड ट्रंप का बयान और विवाद

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या दिया था बयान?

  • यूएस प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में रिपब्लिकन कैंडिडेट बनने की दौड़ में सबसे आगे चल रहे ट्रंप
  • मंगलवार को कहा था- “अमेरिका में मुस्लिमों की एंट्री पर बैन तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक देश को यह पता न चल जाए कि आखिर यहां हो क्या रहा है।”
  • ट्रंप इससे पहले अमेरिका में मस्जिदों को बंद करने और मुसलमानों पर कड़ी निगरानी रखने का सुझाव भी दे चुके हैं।
  • यह भी कहा गया कि मुस्लिमों की अमेरिका के लिए नफरत को देखते हुए इस तरह का प्रपोजल दिया जा रहा है।

क्यों दिया था ऐसा बयान?

  • पिछले हफ्ते अमेरिका के सैन बर्नार्डिनो के कम्युनिटी सेंटर पर फायरिंग हुई थी। इसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी।
  • हमलावर कपल सैयद फारुख और तश्फीन मलिक पाकिस्तानी मूल के बताए गए हैं।
  • इसी घटना के बाद ट्रंप का बयान आया। उन्होंने दुनियाभर में इस्लामिक कट्टरपंथ बढ़ने को लेकर यह दलील दी।
  • ट्रंप के इस बयान के बाद उनका विरोध शुरू हो गया। विरोध करने वालों में उनकी अपनी पार्टी के नेता भी हैं।
  • फ्लोरिडा में सेंट पीटर्सबर्ग के मेयर रिक क्रिसमैन ने अपने शहर में ट्रंप के आने पर ही रोक लगा दी है। इस सबके बावजूद ट्रंप अपनी बात पर कायम रहे।

पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान

  • ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका में 11 सितंबर, 2001 को हुए आतंकवादी हमलों के बाद मुसलमानों ने जश्न मनाया था।
  • इस बारे में पूछा जाने पर उन्होंने कहा था कि उनका बयान सौ फीसदी सही है।
  • ट्रंप ने कहा था- मस्जिदों को निगरानी में रखने की जरूरत है। मैं अमेरिका में मुसलमानों के रहने पर डिबेट करना चाहता हूं।
  • ट्रंप ने पिछले दिनों कहा था- मैं राष्ट्रपति बनता हूं तो उन कंपनियों को कोई एच-1बी वीजा जारी नहीं करूंगा, जो अमेरिकियों को निकालकर विदेशियों को नौकरी पर रखते हैं। मेरा जस्टिस डिपार्टमेंट उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा।
  • उन्होंने भारतीयों समेत विदेशियों को नौकरी पर रखे जाने को लेकर नाराजगी जताई थी।

डोनाल्ड ट्रंप के विवादित बयानों का सूत्रधार- रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप अपने विवादित बयानों के लिए सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन उनके बयानों की भाषा को कौन तैयार करता है, ये एक दिलचस्प बात है। रॉय कुन वो शख्स हैं जो ट्रंप की आक्रामक भाषा के प्रणेता बताए जाते हैं। पेशे से वकील कुन वो शख्स हैं जो ट्रंप की तरह ही विवादित रहे हैं। कुन के बारे में बताया जाता है कि वो अपनी कामयाबी के लिए नैतिक-अनैतिक भाषा का इस्तेमाल करने से नहीं चुकते हैं। कुन न्यूयॉर्क के न्यायिक हलके में अपने विरोधियों को किनारे लगाने के लिए अनैतिक रास्तों का सहारा लेते रहे हैं। एक ऐसा ही वाक्या है जब ट्रंप अपनी कंपनी में मुस्लिमों के प्रति भेदभाव के मामले में अदालती कार्यवाही का सामना कर रहे थे। उस वक्त कुन ने उन्हें सलाह दिया कि आप साफ तौर में बोलें कि ऐसे लोगों को नरक में जाने की जरूरत है। द वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति की चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने से पहले ट्रंप ने कुन से सलाह मशविरा किया। कुन ने बताया कि आर आक्रमण, प्रति आक्रमण और कभी माफी न मांगने वाले शख्सियत के तौर पर खुद को पेश करें। ट्रंप ने कुन के बताए हुए रास्ते पर जाने का फैसला किया। इसका असर प्राइमरी चुनाव में देखने को मिला। ट्रंप ने न केवल अपने खिलाफ उम्मीदवार टेड क्रुज के ऊपर तीखे कमेंट करते रहे। बल्कि हिलेरी क्लिंटन के ऊपर विवादित टिप्पणी करने से नहीं चुकते हैं।

डॉनल्ड ट्रंप ने कब-कब लिए यू-टर्न
अमेरिका के राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार डॉनल्ड ट्रंप पक्के राजनेता हैं क्योंकि उन्हें यू-टर्न लेना अच्छे से आता है। वोटर्स को अपने पाले में करने के लिए ट्रंप कई बार अपने बयान से पलटियां मार चुके हैं, चाहे वह इराक हमले की बात हो, हिलरी क्लिंटन हों या फिर अवैध प्रवासियों का मुद्दा हो। आगे की स्लाइड्स में देखिए कब, कहां फिसले ट्रंप और कब-कब लिया यू-टर्न-

इराक हमले पर
शुरूआती बयान- 2002 में जब ट्रंप से इराक हमले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि मैं इसके पक्ष में था। मुझे लगता है कि पहली बार कुछ सही ढंग से किया गया।
यू टर्न- 2016 में ट्रंप ने अपने बयान से पलटी मारी और कहा कि मैं इकलौता ऐसा व्यक्ति था जिसने कहा था कि हमें इराक में नहीं घुसना चाहिए था।

हिलरी क्लिंटन पर
शुरूआती बयान-  ट्रंप शुरूआत में हिलरी की तारीफों के पुल बांधते थे। उन्होंने एक बार हिलरी के बारे में कहा था, वह बहुत ही टैलंटेड हैं। उनके पास ऐसा पति है जिसे मैं भी बहुत पसंद करता हूं। हिलरी क्लिंटन गजब महिला हैं, वह बहुत मेहनत करती हैं, मैं उन्हें पसंद करता हूं।
यू टर्न- हिलरी की तारीफों के पुल बांधने वाले ट्रंप जब उनके प्रतिद्वंद्वी बने तो उसके बाद से उन्हें हिलरी में एक अच्छाई नजर आना बंद हो गई। ट्रंप ने कहा, उनके पास अमेरिका का राष्ट्रपति होने की कोई योग्यता नहीं है। अमेरिका के पूरे इतिहास में क्लिंटन से खराब सेक्रटरी ऑफ स्टेट नहीं हुआ है।

बिल क्लिंटन पर
शुरूआती बयान- अब महिलाओं से यौन उत्पीड़न को लेकर ट्रंप हिलरी और उनके पति बिल क्लिंटन को निशाना साधते रहते हैं, लेकिन उन्होंने कभी बिल क्लिंटन की पैरवी करते हुए कहा था कि बेचारे क्लिंटन को ऐसी चीजों में उलझना पड़ रहा है जो बिल्कुल गैर-जरूरी है।
यू टर्न-  ट्रंप ने बिल क्लिंटन पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं से छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के मामले में बिल क्लिंटन से बदतर कोई नहीं है।

लीबिया पर
शुरूआती बयान- लीबिया में गद्दाफी हजारों लोगों की जानें ले रहा है। हमें लीबिया में घुसना चाहिए और इस इंसान को रोकना चाहिए। ऐसा करना हमारे लिए बहुत ही आसान होगा।
यू टर्न- मैंने लीबिया पर कभी कोई चर्चा नहीं की। मैं लीबिया के समर्थन में नहीं था, अगर गद्दाफी जिंदा होते तो शायद हालात अब से ज्यादा बेहतर होते।

अवैध प्रवासियों पर
शुरूआती बयान- अगर अमेरिका में कोई अवैध तरीके से रह रहा है तो हम उसे बाहर निकाल फेकेंगे।
यू टर्न-2016 में ट्रंप ने इस मुद्दे पर थोड़ी नरमी दिखाई और कहा कि हम बहुत ही मानवीय तरीके से सब कुछ करेंगे।

टैक्स रिटर्न
शुरूआती बयान-अगर मैं कार्यकाल संभालूंगा तो मैं टैक्स रिटर्न जरूर जारी करूंगा।
यू टर्न-इस पर भी ट्रंप ने पलटी मारी और कहा कि मुझे नहीं लगता कि मतदाता टैक्स रिटर्न जारी करने के लिए तैयार हैं।

यूनिवर्सल हेल्थ केयर पर
शुरूआती बयान-यूनिवर्सल हेल्थकेयर पर शुरूआत में ट्रंप ने कहा था कि मैं हर किसी की देखभाल करने जा रहा हूं। सरकार हर व्यक्ति की हेल्थ के लिए पैसा खर्च करेगी।
यू टर्न-टेड क्रूज ने जब उनसे पूछा कि क्या सरकार हर किसी की हेल्थकेयर के लिए भुगतान करेगी, यह बात सही है या गलत तो ट्रंप ने जवाब दिया, गलत।

अबॉर्शन को बैन करने के मुद्दे पर
शुरूआती बयान-डॉनल्ड ट्रंप हमेशा से ही अबर्शन के खिलाफ रहे हैं। पहले उन्होंने अबॉर्शन पर बैन लगाने की बात करते हुए कहा था कि अबॉर्शन कराने वाली महिलाओं के लिए सजा का भी प्रावधान किया जाना चाहिए हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि अबॉर्शन के मामले में महिलाएं खुद पीड़ित होती हैं क्योंकि उनकी कोख में बच्चा पलता है। मैं पूरी तरह से प्रो-लाइफ हूं।
यू टर्न-1999 में जब डॉनल्ड ट्रंप से पूछा गया था कि वह खुद को डेमोक्रेट के नजदीक पाते हैं या रिपब्लिकन के तो ट्रंप ने जवाब दिया था कि कई मामलों में मैं खुद को डेमोक्रेट के करीब पाता हूं। इकॉनमी रिपब्लिकन की तुलना में डेमोक्रेट शासन में ज्यादा बेहतर है।

वो 10 बातें… ट्रंप जो अमेरिकी चुनाव में उठा रहे हैं…

  • 1. अमरीकी मस्जिदों की निगरानी होनी चाहिए. ट्रंप मानते हैं कि चरमपंथ को रोकने की पहल के तहत सुरक्षा एजेंसियों को मुसलमानों की निगरानी करनी चाहिए. उन्हें मस्जिदों पर निगरानी रखने के राजनीतिक रूप से ग़लत होने से कोई परेशानी नहीं है.2. चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका को कठोर पूछताछ के तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए जिनमें वॉटर बोर्डिंग यानी क़ैदी को बार-बार पानी में डुबोना शामिल हैं. ट्रंप का कहना है कि इस्लामिक स्टेट के सर क़लम करने के तरीक़े की तुलना में ये कुछ भी नहीं है.

    3. ट्रंप का कहना है कि वो इस्लामिक स्टेट को भीषण बमबारी कर नष्ट कर देंगे. उनका दावा है कि इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई में और कोई उम्मीदवार उनके जितना कठोर नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि वे इस्लामिक स्टेट की तेल तक पहुँच रोककर इस संगठन को कमज़ोर करेंगे.

    4. ट्रंप अमरीका और मैक्सिको के बीच एक बड़ी और विशाल दीवार बनाना चाहते हैं ताकि प्रवासी और सीरियाई शरणार्थी अमरीका में न घुस सकें. ट्रंप का मानना है कि अमरीका में आने वाले ज़्यादातर मैक्सिकोवासी अपराधी क़िस्म के होते हैं. उन्होंने कहा, “वे ड्र्गस लाते हैं और अपराध करते हैं. वे बलात्कारी होते हैं.” ट्रंप का कहना है कि दीवार बनाने के लिए पैसा मैक्सिको को देना चाहिए. बीबीसी के अनुमान के मुताबिक़ ऐसी दीवार पर 2.2 अरब डॉलर से 13 अरब डॉलर तक का ख़र्च आ सकता है.

    5. वे अमरीका में रह रहे क़रीब एक करोड़ दस लाख अवैध प्रवासियों को वापस भेजना चाहते हैं. उनके इस विचार को बेहद महंगा और विदेशी मूल के लोगों के ख़िलाफ़ नफ़रत फ़ैलाने वाला माना जा रहा है और उसकी आलोचना हो रही है. बीबीसी के अनुमान के मुताबिक़ इस पर क़रीब 114 अरब डॉलर का ख़र्च आ सकता है. वे पैदा होने पर नागरिकता देने की नीति को भी बंद करना चाहते हैं. इस नीति के तहत अमरीका में पैदा होने वाले हर बच्चे को अमरीकी नागरिकता का अधिकार होता है.

    6. ट्रंप का कहना है कि उनके व्लादिमीर पुतिन से संबंध बहुत अच्छे रहेंगे. सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा था कि पुतिन और ओबामा एक दूसरे को इतना नापसंद करते हैं कि वार्ता से ही कतराते हैं. ट्रंप ने कहा- “मुझे लगता है कि मेरे और पुतिन के बीच रिश्ते बेहतर रहेंगे और जो समस्याएं अभी अमरीका को हो रही हैं वो नहीं होंगी.”

    7. ट्रंप चाहते हैं कि कई मुद्दों पर चीन को सबक सिखाए जाने की ज़रूरत है ताक़ि अमरीका के साथ व्यापार को उचित और निष्पक्ष बनाया जा सके. उन्होंने कहा कि अगर वो राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो वो चीन को अपनी मुद्रा की क़ीमत घटाने से रोकेंगे और उसे अपने पर्यावरण और मज़दूरी स्तर को सुधारने के लिए मजबूर करेंगे.

    8. ट्रंप का कहना है कि जलवायु परिवर्तन सिर्फ़ मौसम का मामला है. ट्रंप मानते हैं कि साफ़ हवा और साफ़ पानी महत्वपूर्ण है लेकिन वे जलवायु परिवर्तन को फ़र्ज़ी मानते हैं और कहते हैं कि उद्योगों पर पर्यावरण संबंधी प्रतिबंध उन्हें वैश्विक बाज़ार में कम प्रतियोगी बनाते हैं.

    9. दुनिया बेहतर होती यदि सद्दाम हुसैन और मोहम्मद गद्दाफ़ी ज़िंदा होते. ट्रंप ने सीएनएन से कहा था कि लीबिया और इराक़ में हालात दोनों शासकों के समय से कहीं ज़्यादा ख़राब हैं.

    10. ट्रंप का दावा है कि वह बहुत ही अच्छे इंसान हैं. हाल में रिलीज़ हुई अपनी किताब क्रिप्ल्ड अमेरिका में ट्रंप लिखते हैं, “मुझ पर विश्वास करो, मैं बहुत ही अच्छा इंसान हूँ और मुझे एक अच्छा इंसान होने पर गर्व है, लेकिन मैं अपने देश को फिर से महान बनाने के लोकर प्रतिबद्ध और जोशीला भी हूँ.”

ट्रंप की महिला विरोधी छवि
डोनाल्‍ड ट्रंप पर लगे हैं पत्नी के साथ दुष्कर्म जैसे आरोप– चुनाव में गड़े मुर्दे उखाड़ने की पुरानी परंपरा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का तो इतिहास ही रहा है कि यहां हर दावेदार की पुरानी जिंदगी के सारे गुनाह, सारे आरोप, सारे नाजायज रिश्तों की पड़ताल की जाती है। विरोधी इसके लिए पैसा खर्च करते हैं। अबकी बार राष्ट्रपति उम्मीदवारी के सबसे मजबूत रिपब्लिकन दावेदार डोनाल्ड ट्रंप के अतीत की कब्रें खुदनी शुरू हो गई हैं। वो भी फरवरी में होने वाले प्राइमरी चुनावों से ठीक पहले। ब्रिटेन के चैनल4 पर 26 जनवरी से “द मैड वर्ल्ड ऑफ डोनाल्ड” का प्रसारण शुरू हुआ है। इस डॉक्यूमेंटरी में अरबपति कारोबारी ट्रंप के अतीत के कई दागदार पन्ने दिखाए गए हैं। मिरर के अनुसार 27 साल पहले ट्रंप पर उनकी पत्नी ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं वे सनकी और सिरफिरे भी हैं। यह फिल्म 1993 में आई ट्रंप की जीवनी “लॉस्ट टाइकूल : द मैनी लाइव्स ऑफ डोनाल्ड जे ट्रंप” पर आधारित है। हैरी हर्ट तृतीय ने यह किताब लिखी थी। इसके लिए हर्ट ने 1977-92 तक ट्रंप की पत्नी रहीं इवाना का साक्षात्कार किया था। उल्लेखनीय है कि 69 साल के ट्रंप ने तीन शादियां की है और उनके पांच बच्चे हैं। इनमें से तीन उनके और इवाना के हैं।

  • 1989 की घटना- डॉक्यूमेंटरी के मुताबिक 1989 में ट्रंप ने गंजेपन को दूर करने के लिए सर्जरी करवाई थी। सर्जरी के दौरान हुई असहनीय पीड़ा का गुस्सा उन्होंने अपनी बीवी इवाना पर उतारा, क्योंकि सर्जन उनकी पत्नी का भी डॉक्टर था। पहले उन्होंने इवाना पर हमले किए फिर उसके कपड़े फाड़ डाले। पति का ऐसा हिंसक रूप देख इवाना बेहद डर गई और घर के ऊपर भागी। वो बंद दरवाजे के पीछे सारी रात रोती रहीं।
  • लेखक को बताया झूठा- ट्रंप ने इन आरोपों को गलत बताते हुए 1993 में हर्ट को मूर्ख और झूठा बताया था। डेली बीस्ट ने जब इस खबर को छापने की तैयारी की तो उसे धमकी दी गई। ट्रंप के चुनाव अभियान समिति ने एक बार फिर इस मामले पर सफाई देते हुए इवाना का बयान जारी किया है। इसमें इवाना ने कहा है कि वे और ट्रंप अब भी अच्छे दोस्त हैं और यह आरोप पूरी तरह से सच नहीं है।

सेक्स स्केंडल

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2006 में वयस्क फिल्मों की स्टार जेसिका ड्रेक के साथ ट्रंप
Jessica Drake and attorney Gloria Allred with a picture of Drake and Trump
अपनी एटॉर्नी ग्लोरिया के साथ जेसिका ड्रेक (सीधे हाथ की तरफ), ट्रंप पर आरोप लगाते हुए
वयस्क फिल्मों की अभिनेत्री ने ट्रंप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप– अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनाव में एक माह से भी कम समय बचा है और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर पहले से ही कमजोर स्थिति में चल रहे रिपब्लिकन उम्मीदवार के प्रचार अभियान पर वयस्क फिल्मों की स्टार जेसिका ड्रेक के इन आरोपों के बाद और अधिक असर पड़ने की आशंका है। लॉस एंजिलिस में एक संवाददाता सम्मेलन में ड्रेक ने कहा कि वह करीब दस साल पहले कैलिफोर्निया के लेक ताहो में ट्रंप से मिली थीं। उसे होटल में ट्रंप के कमरे में बुलाया गया जिसके बाद वह अपनी कुछ मित्रों के साथ वहां गई। 42 वर्षीय ड्रेक का आरोप है कि ट्रंप ने उसे और उसकी दो अन्य मित्रों को पकड़ लिया और उनकी अनुमति के बिना उनका चुंबन लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में एक अज्ञात व्यक्ति ने ट्रंप की ओर से उसे फोन कर फिर से कमरे में आने को कहा लेकिन इस बार उसे अकेले बुलाया लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। अभिनेत्री के अनुसार, उसे कहा गया कि वह ट्रंप के कमरे में आए और रात को उनके साथ भोजन करें। उसे पार्टी में भी बुलाया गया लेकिन उसने मना कर दिया। ड्रेक ने कहा, इसके बाद ट्रंप ने खुद मुझसे पूछा तुम क्या चाहती हो। कितनी रकम। ट्रंप ने 10,000 डॉलर की पेशकश की। ट्रंप के साथ अटॉर्नी ग्लोरिया ऑलरेड भी थीं।
Who is Jessica Drake?
Jessica Drake, 42, is an award-winning American porn actress, writer, director, entrepreneur and sex educator. The 42-year-old, from Texas, first became involved in the adult film industry in 1999 and signed an exclusive contract with Wicked Pictures in 2003.

The American pornographic film studio is one of the most successful in the U.S. industry and it’s the only heterosexual studio to maintain a condom-only policy.

Over the years, Jessica has appeared in 355 films and directed 14 of her own movies and last week she opened an online sex store as a new career venture.

“Ten years ago, I was working for Wicked Pictures, an adult film company, at a golf tournament in Lake Tahoe,” the adult film star told reporters at the press conference.

“I was at Wicked’s booth when I met Donald Trump in the celebrity gift room early in the morning before he teed off. He flirted with me and invited me to walk along the golf course with him, which I did.

“During that time, he asked me for my phone number, which I gave to him. Later that evening, he invited me to his room. I said I didn’t feel right going alone, so two other women came with me.

“In the penthouse suite, I met Donald again,” continued Jessica.

“When we entered the room, he grabbed each of us tightly in a hug and kissed each one of us without asking permission.

“We answered his questions. It felt like an interview. About 30 or 45 minutes later, we left his room.”

Jessica then says she retired back to her bedroom before receiving a call from a man asking for her on Trump’s behalf, “He said Donald wanted me to come back upstairs to Donald’s suite.” she explained.

“I indicated I did not wish to return. Then Donald called. He asked me to return to his suite and have dinner with him.

“He also invited me to a party; I declined. Donald then asked me, ‘What do you want? How much?’ I told him that I couldn’t because I had to return to L.A. for work.

“After that, I received another call from either Donald, or a male calling on his behalf, offering me $10,000. I declined again and once more gave, as an excuse, that I had to return to Los Angeles for work.

“I was then told Mr. Trump would allow me to use his private jet only if I accepted his private invitation.”


कई महिलाएं लगा चुकी हैं आरोप
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डोनाल्ड ट्रंप महिलाओं के प्रति कर चुके हैं अशलील टिप्पणियां
डोनाल्ड की गंदी बात 1# मेरी बेटी ‘ए पीस ऑफ ए…’
2004 में रेडियो के लिए हावर्ड स्टर्न को दिए गए इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी बेटी के बारे में अश्लील बात कही थी। उस समय डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप 22 साल की थी। डोनाल्ड ट्रंप ने स्टर्न से बातचीत में बेटी की शारीरिक बनावट पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वह ‘पीस ऑफ ए…’ है। ट्रंप ने यह भी कहा कि जब वह 14 साल के थे तब किसी कम उम्र की हॉट लड़की के लिए अपनी वर्जिनिटी खोने में कोताही नहीं करते थे।
डोनाल्ड की गंदी बात 2# हिलेरी क्लिंटन पर की अश्लील टिप्पणी
अगर हिलेरी क्लिंटन अपने पति को संतुष्ट नहीं कर पातीं तो वह अमेरिका को संतुष्ट करने के बारे में कैसे सोच सकती हैं? (ट्रंप ने अप्रैल, 2015 में यह ट्वीट किया था। बाद में उन्होंने इसे डिलीट कर दिया था।)

डोनाल्ड की गंदी बात 3# खूबसूरत और जवान महिलाएं मिलती रहें बस
महिलाओं पर की गई अभद्र टिप्पणियों के चलते डोनाल्ड ट्रंप मीडिया में बदनाम रहे हैं। उन्होंने मीडिया में अपनी छवि को लेकर प्रतिक्रिया देते समय भी अश्लील बात कही थी। 1991 में उन्होंने एक मैगजीन को इंटरव्यू में कहा कि मीडिया में उनके बारे में क्या छप रहा है यह तब तक कोई मायने नहीं रखता जब तक उनको जवान और खूबसूरत औरतों के साथ सोने का मौका मिल रहा है।

डोनाल्ड की गंदी बात 4# बच्चे को दूध पिलाने वाली मां पर अभद्र टिप्पणी
डोनाल्ड ट्रंप ने बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली मां के प्रति घृणा का सरेआम प्रदर्शन किया था। एक महिला वकील ने जब बच्चे को दूध पिलाने के लिए ब्रेक मांगा था तब उन्होंने उनको ‘घृणित औरत’ कहा था।

डोनाल्ड की गंदी बात 5# महिला पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार
डोनाल्ड ट्रंप महिला पत्रकारों पर भी अभद्र टिप्पणियों के मामले में बदनाम रहे हैं। एक बार न्यूयार्क टाइम्स में गेल कॉलिंस ने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ एक लेख लिखा। इस लेख से खफा होकर ट्रंप ने उस आर्टिकल की एक कॉपी गेल कॉलिंस के पास भिजवाई। इस आर्टिकल कॉपी में ट्रंप ने गेल कॉलिंस की फोटो को कलम से घेरा था और उस पर लिखा था, ‘ द फेस ऑफ ए डॉग।’

डोनाल्ड की गंदी बात 6# महिला एंकर को कहा बिंबो
अमेरिकी पत्रकार मेगन केली, डोनाल्ड ट्रंप की गंदी टिप्पणियों की शिकार हुईं। अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से उम्मीदवारी कर रहे डोनाल्ड ट्रंप के पहले डिबेट की एंकरिंग मेगन केली ने की थी। डिबेट के बाद ट्रंप ने ट्विटर पर मेगन केली के बारे में अभद्र बातें कहीं। उन्होंने मेगन को बिंबो कहा। ट्रंप ने लिखा कि मेगन का पीरियड चल रहा था इस वजह से उन्होंने उनसे काफी कड़े सवाल किए। उन्होंने लिखा, ‘मेगन की आंखों से खून निकल रहा है। उनके बदन में हर जगह से खून निकल रहा था।’ उन्होंने मेगन को क्रेजी और औसत दर्जे की एंकर कहा।

डोनाल्ड की गंदी बात 7# ‘फियोरिना के चेहरे को देखकर कौन वोट देगा’
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ही पार्टी की लीडर कार्ली फियोरिना पर अभद्र टिप्पणी कर उनका अपमान किया। 2015 के सितंबर में रिपब्लिकन पार्टी की प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार फियोरिना के बारे में ट्रंप ने कहा, ‘उनके चेहरे को देखो। उनको देखकर कौन वोट देगा? क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि ऐसा चेहरा आपका अगला राष्ट्रपति होगा। मेरा मतलब है कि वह महिला हैं और मुझे उनके बारे में भद्दी बात नहीं करनी चाहिए लेकिन सच में क्या आप उनको लेकर सीरियस हैं?’

डोनाल्ड की गंदी बात 8# मिस यूनिवर्स को कहा मिस पिग्गी
पिछले महीने सितंबर में पूर्व मिस यूनिवर्स और वेनेजुएला की एक्ट्रेस एलिसिया माचादो ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। एलिसिया माचादो ने कहा कि ट्रंप ने उनको मिस पिग्गी कहा। इसके बाद माफी मांगने के बजाय ट्रंप ने जवाब में फिर उनके बारे में कहा कि एलिसिया माचादो काफी मोटी हो गई हैं और यह हम सबके लिए एक समस्या हैं।

डोनाल्ड की गंदी बात 9# गजाला खान पर की नस्ली टिप्पणी
जिन्होंने भी डोनाल्ड ट्रंप की कोई आलोचना की, उनको अपमानित करने में वे पीछे नहीं रहे। इराक युद्ध में मारे गए हुमायूं खान के पिता, डेमोक्रेट नेशनल कंवेंशन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना कर रहे थे। हुमायूं खान की मां अपने पति के बगल में खड़ी थीं। आलोचना सुनकर डोनाल्ड ट्रंप ने हुमायूं खान की मां को निशाना बनाया। उन्होंने हुमायूं खान के पिता को जवाब देते हुए उनकी पत्नी गजाला की तरफ इशारा करके कहा, ‘देखो, इनकी पत्नी को देखो। वह वहां खड़ी है। उसके पास कहने को कुछ भी नहीं है। लगता है उसे बोलने की इजाजत नहीं है। आप भी कुछ कहो।’

डोनाल्ड की गंदी बात 10# मेक्सिकन लोगों को कहा रेपिस्ट
डोनाल्ड ट्रंप ने सिर्फ महिलाओं के बारे में ही गंदी बातें नहीं की हैं। उन्होंने पिछले साल मेक्सिकन लोगों को रेपिस्ट कह दिया। ट्रंप ने दिव्यांग पत्रकार का मजाक उड़ाया था और अमेरिका में आने वाले मुस्लिमों पर बैन लगाने की मांग की थी।

जानकारों की ट्रम्प के बारे में क्या राय है
ट्रंप और उनके परिवार पर दो किताबें लिखने वालीं ग्वेंडा ब्लेयर का क्या कहना है- बहुत सारी परिस्थितियों में ट्रंप का तय राजनीतिक मत न होना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन उनकी जीवनी लेखकों का मानना है कि यह चरित्र के अभाव को भी दिखाता है. ब्लेयर कहती हैं, “उनकी विचारधारा या किसी प्रकार की नैतिकता की बाधा नहीं है, इसलिए वे कुछ ऐसी चीजों को हासिल कर सकते हैं जो असंभव लगती हैं, लेकिन उसमें नैतिक फैसले और आचार संबंधी कमी है.” यदि राष्ट्रपति का चुनाव सर्फ मतदाताओं के असंतोष के आधार पर हो तो ट्रंप को जीतने में कोई दिक्कत नहीं होगी. लेकिन भले ही बहुमत वोटर उनके डेमोक्रैटिक प्रतिद्वंद्वी हिलेरी क्लिंटन को प्रतिकूल तरीके से देखते हैं, लेकिन ट्रंप को सकारात्मक रूप से अव्यवस्थित माना जाता है.

ट्रंप की जीवनी लिखने वाले लेखक टिमोथी ओब्रायन का क्या कहना है- ओब्रायन कहते हैं कि ट्रंप की असुरक्षा की भावना का एक मानक वे चीजें हैं जिनकी वे शेखी बघेरते हैं. “यदि वे अमीर होने के बारे में सुरक्षित होते तो बार बार यह कहने की जरूरत नहीं होती कि उनके पास कितना धन है और वे इसे बढ़ा चढ़ा कर बताते हैं. यदि वे महिलाओं में अपनी अपील को लेकर सुरक्षित होते तो उन्हें ये कहने की जरूरत नहीं होती कि वे कितनी औरतों के साथ सोए हैं या सोने की कोशिश की है.” हालांकि ट्रंप की विचित्रता उन्हें मनोरंजक और दिलचस्प हस्ती बनाती है लेकिन जीवनी लेखकों की राय में दुनिया के बारे में उनकी अज्ञानता उन्हें व्हाइट हाउस के लिए अयोग्य बनाती है. ब्लेयर कहती हैं, “ट्रंप खतरनाक इंसान हैं. इसलिए कि वे जानबूझकर अंजान हैं और अत्यंत हठी हैं.”

ट्रंप में अब तक तीन बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर की थी, लेकिन मामले के गंभीर होते ही पीछे हट गए थे. ओब्रायन कहते हैं कि वे शायद ही कभी लंबी योजना बनाते हैं. उनका मानना है कि रिपब्लिकन उम्मीदवार कारोबारी करियर के मंद करने के बाद राजनीति में कूदे हैं. उनका विकास रियल एस्टेट डेवलपर से टीवी सेलेब्रिटी और फिर ऐसे इंसान के रूप में हुआ है जो अंडरवेयर से लेकर वोदका तक हर चीज के साथ अपना नाम जोड़ता है.

ट्रंप के जीवनी लेखकों को शक है कि उनकी कोई गहरी राजनीतिक प्रतिबद्धता है. इस विचार को इस बात से भी बल मिलता है कि रिपब्लिकन उम्मीदवार ने अतीत में स्वतंत्र और वामपंथी विचारों का भी समर्थन किया है. इस समय उन्होंने कंजरवेटिव पार्टी का सहारा इसलिए लिया है कि उन्होंने वहां संभावना देखी, हालांकि उनका बराक ओबामा से भी वैर दिखता है. ब्लेयर बताती हैं कि 2011 में वे उस अभियान के साथ जुड़े जिसने ओबामा के अमेरिका में नहीं जन्मे होने का मुद्दा उठाया था. “यह वही समय था जब वे अपने कुछ हद तक उदारवादी राजनीतिक रवैये से अलग हटे. तब उन्होंने दक्षिणपंथ की ओर रुख किया.”
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About drsandeepkohli

तमाम लोगों को अपनी-अपनी मंजीलें मिली.. कमबख्त दिल हमारा ही हैं जो अब भी सफ़र में हैं… पत्रकार बनने की कोशिश, कभी लगा सफ़ल हुआ तो कभी लगा …..??? चौदह साल हो गए पत्रकार बनने की कोशिश करते। देश के सर्वोतम संस्थान (आईआईएमसी) से 2003 में पत्रकारिता की। इस क्षेत्र में कूदने से पहले शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा था, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में रिसर्च कर रहा था। साथ ही भारतीय सिविल सेवा परिक्षा की तैयारी में रात-दिन जुटा रहता था। लगा एक दिन सफ़ल हो जाऊंगा। तभी भारतीय जनसंचार संस्थान की प्रारंभिक परिक्षा में उर्तीण हो गया। बस यहीं से सब कुछ बदल गया। दिल्ली में रहता हूं। यहीं पला बड़ा, यहीं घर बसा। और यहां के बड़े मीडिया संस्थान में पत्रकारिता जैसा कुछ करने की कोशिश कर रहा हूं। इतने सालों से इस क्षेत्र में टिके रहने का एक बड़ा और अहम कारण है कि पहले ही साल मुझे मेरे वरिष्ठों ने समझा दिया गया था कि हलवाई बनो। जैसा मालिक कहे वैसा पकवान बनाओ। सो वैसा ही बना रहा हूं, कभी मीठा तो कभी खट्टा तो कभी नमकीन, इसमें कभी-कभी कड़वापन भी आ जाता है। सफ़र ज्यादा लम्बा नहीं, इन चौदह सालों के दरम्यां कई न्यूज़ चैनलों (जी न्यूज़, इंडिया टीवी, एनडीटीवी, आजतक, इंडिया न्यूज़, न्यूज़ एक्सप्रेस, न्यूज़24) से गुजरना हुआ। सभी को गहराई से देखने और परखने का मौका मिला। कई अनुभव अच्छे रहे तो कई कड़वे। पत्रकारों को ‘क़लम का सिपाही’ कहा जाता है, क़लम का पत्रकार तो नहीं बन पाया, हां ‘कीबोर्ड का पत्रकार’ जरूर बन गया। अब इस कंप्यूटर युग में कीबोर्ड का पत्रकार कहलाने से गुरेज़ नही। ख़बरों की लत ऐसी कि छोड़ना मुश्किल। अब मुश्किल भी क्यों न हो? सारा दिन तो ख़बरों में ही निकलता है। इसके अलावा अगर कुछ पसंद है तो अच्छे दोस्त बनना उनके साथ खाना, पीना, और मुंह की खुजली दूर करना (बुद्धिजीवियों की भाषा में विचार-विमर्श)। पर समस्या यह है कि हिन्दुस्तान में मुंह की खुजली दूर करने वाले (ज्यादा खुजली हो जाती है तो लिखना शुरू कर देते हैं… साथ-साथ उंगली भी करते हैं) तो प्रचुर मात्रा में मिल जाएंगे लेकिन दोस्त बहुत मुश्किल से मिलते हैं। ब्लॉगिंग का शौक कोई नया नहीं है बीच-बीच में भूत चढ़ जाता है। वैसे भी ब्लॉगिंग कम और दोस्तों को रिसर्च उपलब्ध कराने में मजा आता है। रिसर्च अलग-अलग अखबारों, विभिन्न वेवसाइटों और ब्लॉग से लिया होता है। किसी भी मित्र को जरूरत हो किसी तरह की रिसर्च की… तो जरूर संपर्क कर सकते हैं।
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