#IndusWatersTreaty: जानिए #India #Pakistan के बीच हुए इस समझौते की पूरी ABCD…

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उरी हमले के बाद से भारत का गुस्सा पाकिस्तान को लेकर चरम पर है, इस बात को पीएम मोदी भी अच्छी तरह से जानते हैं। इसीलिए पहले उन्होंने शनिवार को पाकिस्तान को सीधे शब्दों में कड़ी चेतावनी दी और आज पीएम मोदी एक बड़ा फैसला लेने जा रहा है। फैसला जो पाकिस्तान को बना सकता है रेगिस्तान। फैसला तो पाकिस्तान को पानी की एक-एक बूंद का मौहताज कर सकता है। जी हां पीएम मोदी आज दोपहर 12 बजे सिंधु जल समझौता पर बैठक लेने जा रहे हैं। बैठक में जल संसाधन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। पीएम इन सीनियर अफसरों से समझौते पर ब्रीफिंग लेंगे। माना जा रहा है कि पीएम सिंधु जल समझौते पर सख्त फैसला ले सकते हैं।

भारत समझौता तोड़ सकता है, विदेश मंत्रालय कर चुका है इशारा-22 सितंबर को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने सिंधु जल समझौते पर पूछे गए सवाल पर कहा था, किसी भी समझौते के लिए आपसी भरोसा और सहयोग जरूरी होता है। जब उनसे बयान को स्पष्ट करने को कहा गया तो उन्होंने कहा कि कूटनीति में कई बातें पूरी तरह से साफ-साफ नहीं कही जाती हैं। फिलहाल वर्तमान में पाकिस्तान के साथ जो स्थिति है उसमें भरोसा और सहयोग दोनों ही दूर-दूर तक नहीं दिखते। अगर भारत सिंधु जल समझौता तोड़ देता है तो पाकिस्तान पानी के लिए तरस जाएगा। पाकिस्तान का पश्चिमी प्रांत रेगिस्तान बन जाएगा। यही कारण है कि भारत से पाकिस्तान की जंग कश्मीर और कश्मीरियों के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ पानी के लिए है। आइए जानते हैं आखिर क्या है सिंधु जल समझौता…

क्या है सिंधु जल समझौता…

– सिंधु जल समझौता 19 सितंबर 1960 में छह नदियों के पानी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था।
– समझौता पर भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाक राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे।
– सिंधु नदी संधि विश्व के इतिहास का सबसे उदार जल बंटवारा माना जाता है।
– अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति ने 2011 में इस संधि को दुनिया की सफलतम संधि करार दिया था।
– समझौते के तहत छह नदियां आती हैं सिंधु, चेनाब, झेलम ब्यास, रावी और सतलुज।
– इसके तहत पाकिस्तान को 80.52 फीसदी पानी यानी 167.2 अरब घन मीटर पानी सालाना दिया जाता है।
– समझौते के अंतर्गत सिंधु नदी की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में विभाजित किया गया।
– सतलुज, ब्यास और रावी नदियों को पूर्वी जबकि झेलम, चेनाब और सिंधु को पश्चिमी नदी बताया गया।
– भारत पूर्वी नदियों सतलुज, ब्यास और रावी के पानी को पूर्ण रूप से इस्तेमाल कर सकता है।
– जबकि पश्चिमी नदियों झेलम, चेनाब और सिंधु का पानी किसी रुकावट पाकिस्तान को देना स्वीकार किया।
– लेकिन साथ ही भारत पश्चिमी नदियों का पानी बिजली, सिचांई और भंडारण के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
– समझौते के अंतर्गत एक स्थायी सिंधु आयोग की स्थापना की गई, जिसमें दोनो देशों ने कमिश्नर नियुक्त किए।
– अगर कोई देश किसी प्रोजेक्ट पर काम करता है और दूसरे देश को उसकी जानकारी देनी होगी।
– अगर किसी देश को कोई आपत्ति है तो दोनों देशों के कमिश्नर बैठक कर उसका हल निकालेंगे।
– अगर आयोग समस्या का हल नहीं ढूंढ़ पाती हैं तो सरकारें उसे सुलझाने की कोशिश करेंगी।
– अगल मामला नहीं सुलझता तो कोर्ट ऑफ आर्ब्रिट्रेशन में जाने का भी रास्ता खुला है।

पाकिस्तान को क्या फायदा मिल रहा है…
– इन छह नदियों के पानी से पाकिस्तान में कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
– इन्हीं नदियों की वजह से पाकिस्तान का उत्तरी और पश्चिमी भाग हरा-भरा है।
– इन्हीं नदियों ने पाकिस्तान के 65 फीसदी भू-भाग इस्लामाबाद से कराची तक को उपजाऊ बना रखा है।
– इन्हीं नदियों बेसिन में पाकिस्तान का 70 फीसदी अनाज उगता है।
– 2.6 करोड़ एकड़ कृषि भूमि सिंचाई के लिए इन नदियों के जल पर निर्भर है।
– इन्हीं नदियों बेसिन में पाकिस्तान की 36 फीसदी बिजली का उत्पादन होता है।
– यूनेसको के सर्वे के अनुसार 20 करोड़ की आबादी में से 15 करोड़ लोग सिंधु नदी बेसिन में रहते हैं।
– यहीं नहीं पाकिस्तान के दोनों बड़े न्यूक्लियर प्लांट चश्मा और खुशाब भी इन्हीं नदियों के किनारे पर लगे हैं।
– चश्मा के चारों न्यूक्लियर प्लांट पंजाब के मिंयावली में सिंधु नदी के किनारे लगे हैं।
– ऐसे ही खुशाब के चारों न्यूक्लियर प्लांट पंजाब के सरगोधा में चेनाब नदी के किनारे लगे हैं।

पाकिस्तान पर क्या होगा असर…
– अगर यह समझौता भारत रद्द कर देता है तो पाकिस्तान का 65 फीसदी भू-भाग बंजर हो जाएगा।
– पाकिस्तान की दो तिहाई आबादी पानी के लिए त्राहिमाम-त्राहिमान करने लगेगी।
– सिंधु और उसकी सहायक पांच नदियां पाकिस्तान के एक बड़े हिस्से की प्यास बुझाती हैं।
– पाकिस्तानी अखबार ट्रिब्यून ने भी माना है कि सिंधु के पानी के बगैर देश का एक हिस्सा रेगिस्तान बन जाएगा।
– सिंधु, झेलम और चेनाब के पानी से पाकिस्तान में 36 फीसदी बिजली बनाई जाती है।
– अगर यह समझौता रद्द हो गया तो पाकिस्तान में बिजली को लेकर हाहाकार मच जाएगा।
– इसके अलावा इन तीनों नदियों से सिंचाई भी की जाती है, 70 फीसदी अनाज उगता है।
– अगर यह समझौता रद्द हो गया तो पाकिस्तान में आकाल के हालात पैदा हो जाएंगे।
– यही नहीं पाकिस्तान के दोनों बड़े न्यूक्लियर प्लांट चश्मा और खुशाब ठप पड़ जाएंगे।
– कर्ज में गले तक डूबे पाकिस्तान के लिए यग झटका सहन करना आसान नहीं है।

कई बार इंटरनेशनल कोर्ट के चक्कर लगा चुका है पाकिस्तान…
– चेनाब नदी पर बगलिहार और स्वलाकोते जलविद्युत परियोजनायें बन रही हैं।
– वहीं झेलम की सहायक नदियों पर दुलहस्ती और किशनगंगा परियोजनायें चल रही हैं।
– किशनगंगा प्रोजेक्ट को लेकर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत हेग जा चुका है।
– 17 मई 2010 को भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत का रुख किया था।
– जिस पर 2013 को भारत के पक्ष में फैसला देते हुए पाकिस्तान की आपत्तियों को खारिज कर दिया।
– किशनगंगा प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है और सिर्फ कमीशन किया जाना बाकि है।
– किशनगंगा के अलावा भारत बगलिहार वूलर बैराज व तुलबुल परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है।

क्या भारत समझौता रद्द कर सकता है…

क्यों कर सकता है समझौता रद्द-
इस संधि को तोड़ने की मांग भारत में कई बार उठ चुकी है। 2005 में इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट और टाटा वाटर पॉलिसी प्रोग्राम ने भी इसे खत्म करने की मांग की थी। इनकी रिपोर्ट के मुताबिक संधि के चलते जम्मू-कश्मीर को हर साल 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। अकूत जल संसाधन होने के बावजूद इस संधि के चलते घाटी को बिजली नहीं मिल पा रही है। घाटी 20 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता रखती है, लेकिन उत्पादन हो रहा है सिर्फ 3200 मेगावाट।

– पूर्व वित्त और रक्षा मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने न्यूज 24 से किया खुलासा।
– यशवंत सिन्हा के मुताबिक भारत को पाकिस्तान से सिंधु जल समझौता रद्द कर देना चाहिए।
– क्योंकि किसी भी तरह के समझौते दोस्तों के बीच होते हैं ना कि दुश्मनों के बीच।
– यशवंत सिन्हा ने समझौता रद्द करने के लिएपांच मुख्य वजहें भी बताई है।
– पहली- 1972 शिमला समझौता, जिसे पाकिस्तान ने किया लेकिन आजतक पालन नहीं कर रहा।
– दूसरा- 1999 लाहौर समझौता, दोस्ती के बड़े हाथ की जगह करगिल में घुसपैठ कर पीठ में मारा चाकू।
– तीसरा- 2003 सीजफायर समझौते का उल्लंघनः पाक सेना लगातार सीमा पर फायरिंग करती रहती है।
– चौथा- 2004 इस्लामाबाद समझौते का उल्लंघनः पाकिस्तान ने माना था कि उसकी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी करते हैं।
– पांचवां- 2015 ऊफा समझौते का उल्लंघनः द्पक्षीय वार्ता में कश्मीर मुद्दा नहीं उठेगा, लेकिन पाकिस्तान ने नहीं माना।

क्यों नहीं कर सकता है समझौता रद्द-
– सिंधु नदी का उद्गम चीन से होता है, इसलिए इसमें तीन पार्टियां हैं।
– भारत पाकिस्तान के अलावा चीन भी शामिल है ऐसे में भारत एकतरफा कदम उठाने के बारे में नहीं सोच सकता है।
– 1965, 1971 और 1999 के करगिल युद्ध हों या कश्मीर में आतंकवाद, यह समझौता आज तक नहीं टूटा।
– 1960 में वर्ल्ड बैंक ने सिंधु जल समझौते में मध्यस्थता की थी, इस तरह से भारत, पाक के अलावा इस समझौते का एक तीसरा पक्ष भी है।
– सामरिक मामलों के विशेषज्ञ कहते हैं, यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका मतलब है कि भारत अकेले इसे खत्म नहीं कर सकता
– अगर ऐसा हुआ तो इसका मतलब यह होगा कि हम कानूनी रूप से लागू संधि का उल्लंघन कर रहे हैं
– विशेषज्ञों का कहना है कि सिंधु जल समझौते की वजह से ही भारत इन नदियों पर कई प्रॉजेक्टस चला रहा है।
– इसकी मदद से भारत को जम्मू-कश्मीर में 1999 में बगलिहार डैम के लिए हरी झंडी मिली।
– इसी से 2007 में किशनगंगा प्रॉजेक्ट में भारत को पॉवर जेनरेशन करने का अधिकार मिला।
– पाकिस्तान यह मामला हेग की इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में ले गया, जहां इस संधि के आधार पर फैसला भारत के पक्ष में आया।

Western Rivers

सिंधु नदी- सिंधु को Indus River भी कहा जाता है। इस नदी का उद्गम तिब्बत स्थित मानसरोवर झील से हुआ है। ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम स्थल भी यही है। सिंधु नदी तिब्बत, भारत तथा पाकिस्तान में बहते हुए अरब सागर में मिल जाती है। सिंधु नदी की कुल लंबाई लगभग 2880 किमी है तथा यह भारत में 992 किमी लम्बी है। हिमालय से गुजरती हुई, कश्मीर और गिलगिट से होती यह पाकिस्तान में प्रवेश करती है और मैदानी इलाकों में बहती हुई 1610 किमी का रास्ता तय करती हुई कराची के दक्षिण में अरब सागर से मिलती है। सिंधु दुनिया की 21 सबसे बड़ी नदियों में से एक है। सिंधु को Indus भी कहा जाता है जिसके नाम पर हमारे देश का नाम India पड़ा। तिब्बत, भारत और पाकिस्तान से होकर बहने वाली इस नदी में कई अन्य नदियां आकर मिलती हैं, जिनमें झेलम, चिनाब, रावी और सतलुज, व्यास सतलुज में मिलकर सिंधु तक पहुंचती है। 5500 से 8000 साल पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता भी इसी सिंधु नदी के किनारे विकसित हुई थी। जम्मू कश्मीर होकर पाकिस्तान में बहने वाली सिंधु नदी के आसपास आज भी करीब 30 करोड़ की आबादी बसती है। पाकिस्तान की आधी से ज्यादा आबादी इसी नदी पर निर्भर है। पीने से लेकर खेती और बिजली के लिए पाकिस्तान को सिंधु का ही सहारा है। 

45 MW Nimoo-Bazgo Hydroelectric- power project on the Indus River situated at Alchi village, 75KM from Leh, PM Modi inaugurated on Aug 2014.

44 MW  Chutak Hydroelectric Plant- power project on the Suru River (a tributary of Indus) in Kargil, PM Modi inaugurated on Aug 2014.

झेलम नदी- झेलम नदी का उद्गम कश्मीर घाटी की शेषनाग झील के निकट बेरनाग नामक स्थान से हुआ है। वूलर झील में मिलने के बाद यह पाकिस्तान में प्रवेश करती हैं तथा चेनाब नदी में मिल जाती है। झेलम नदी की की कुल लंबाई 724 किमी है एवं भारत में इसकी लंबाई 400 किमी है

480 MW Uri Dam- hydroelectric power station on the Jhelum River near Uri in Baramula of J&K, located very near to the Line of Control, project was awarded by the National Hydroelectric Power Corporation in October 1989. On 4 July 2014 a 240 MW Uri-II power project was inaugurated.

330 MW Kishanganga Hydroelectric Plant-hydroelectric Projectthat is designed to divert water from the Kishanganga River to a power plant in the Jhelum River basin. It is located 5 km (3 mi) north of Bandipore in Jammu and Kashmir, India and will have an installed capacity of 330 MW. Construction on the project began in 2007. Project includes a 37 m (121 ft) tall concrete-face rock-fill dam which will divert a portion of the Kishanganga River south through a 24 km (15 mi) tunnel.

चेनाब नदी- चेनाब नदी हिमाचल प्रदेश के लाहौल के बारालाचा दर्रे से निकलती हैं। यह पीर पंजाल के समांतर बहते हुए किशतबार के निकट पीर पंजार में गहरा गार्ज बनाती है। भारत में चेनाब नदी की लंबाई 1180 किमी है। यह पाकिस्तान में जाकर सतलज नदी में मिल जाती है।

The government wants to expedite work on three hydro power projects in Sawalkote, Pakal Dul and Bursar on the Chenab and its tributary in Jammu and Kashmir after it reviewed the Indus Waters Treaty on Monday following the Uri attack and deterioration of ties with Pakistan.

1856 MW Sawalkot Dam- The biggest of three is the Sawalkote project in Ramban district on the Chenab river with a 192.5-metre dam and an expected power generation capacity of 1856 MW . The project is being constructed by Jammu and Kashmir State Power Development Corporation (JKSPDC).

1000 MW Pakal-Dul Dam- The Pakal Dul project has an estimated capacity of 1000 MW and is to be constructed on the Marusudar, the main tributary of the Chenab at village Drangdhuran about 45kms from Kishtwar town. It is being constructed by Chenab Valley Power Projects Limited, a joint venture of JKSPDC, NHPC and Power Trading Corporation (PTC). The project envisages a 167-metre high dam and an underground power house near village Dul.

800 MW Bursar Dam- Bursar Hydroelectric Project, has an estimated capacity of 800 MW and is to be constructed on the Marusudar, the main tributary of the Chenab at Doda district. which is to be constructed by the NHPC, is a “storage project” planned in Kishtwar district but is currently under survey and investigation for preparation of a detailed report. Marusudar is the biggest tributary of the ChenabMarusudar

690 MW Salal Hydroelectric Project- Salal – I & II Hydroelectric Project is constructed on river Chenab near Reasi in Udhampur district. project commenced in 1961 by the state government of J&K and construction was started in 1970 by Central Hydroelectric Project Control Board under Ministry of Irrigation and Power.

900 MW Baglihar Dam- Baglihar Hydroelectric Power ProjecT on the Chenab River in the southern Doda district  with a 144 metre dam and an expected power generation capacity of 900 MW. This project was conceived in 1992, approved in 1996 and construction began in 1999. The project is estimated to cost USD $1 billion. The first phase of the Baglihar Dam was completed in 2004. With the second phase completed on 10 October 2008, Prime Minister Manmohan Singh of India dedicated the 900-MW Baglihar hydroelectric power project to the nation.

Eastern Rivers

रावी नदी- रावी नदी हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे से निकलती है एवं पाकिस्तान के मुल्तान के समीप चेनाब नदी में मिल जाती है। इस नदी की लंबाई 720 किमी है।

व्यास नदी- इस नदी का उद्गम हिमालय के रोहतांग दर्रे के समीप व्यास कुण्ड से हुआ है । यह कुल लंबाई 470 किमी तय करते हुए पंजाब में सतलज नदी में मिल जाती है।

सतलुज नदी- सतलज नदी का उद्गम तिब्बत स्थित मानसरोवर झील के निकट राक्षसताल से हुआ है। यह नदी अपने उद्गम स्थल से 1500 किमी दूरी तय करके पाकिस्तान में चेनाब नदी में मिल जाती है। भारत में सतलज नदी की लंबाई 1050 किमी है। प्रसिद्ध भाखड़ा – नागल बांध सतलज नदी पर ही बना है।

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About drsandeepkohli

तमाम लोगों को अपनी-अपनी मंजीलें मिली.. कमबख्त दिल हमारा ही हैं जो अब भी सफ़र में हैं… पत्रकार बनने की कोशिश, कभी लगा सफ़ल हुआ तो कभी लगा …..??? चौदह साल हो गए पत्रकार बनने की कोशिश करते। देश के सर्वोतम संस्थान (आईआईएमसी) से 2003 में पत्रकारिता की। इस क्षेत्र में कूदने से पहले शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा था, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में रिसर्च कर रहा था। साथ ही भारतीय सिविल सेवा परिक्षा की तैयारी में रात-दिन जुटा रहता था। लगा एक दिन सफ़ल हो जाऊंगा। तभी भारतीय जनसंचार संस्थान की प्रारंभिक परिक्षा में उर्तीण हो गया। बस यहीं से सब कुछ बदल गया। दिल्ली में रहता हूं। यहीं पला बड़ा, यहीं घर बसा। और यहां के बड़े मीडिया संस्थान में पत्रकारिता जैसा कुछ करने की कोशिश कर रहा हूं। इतने सालों से इस क्षेत्र में टिके रहने का एक बड़ा और अहम कारण है कि पहले ही साल मुझे मेरे वरिष्ठों ने समझा दिया गया था कि हलवाई बनो। जैसा मालिक कहे वैसा पकवान बनाओ। सो वैसा ही बना रहा हूं, कभी मीठा तो कभी खट्टा तो कभी नमकीन, इसमें कभी-कभी कड़वापन भी आ जाता है। सफ़र ज्यादा लम्बा नहीं, इन चौदह सालों के दरम्यां कई न्यूज़ चैनलों (जी न्यूज़, इंडिया टीवी, एनडीटीवी, आजतक, इंडिया न्यूज़, न्यूज़ एक्सप्रेस, न्यूज़24) से गुजरना हुआ। सभी को गहराई से देखने और परखने का मौका मिला। कई अनुभव अच्छे रहे तो कई कड़वे। पत्रकारों को ‘क़लम का सिपाही’ कहा जाता है, क़लम का पत्रकार तो नहीं बन पाया, हां ‘कीबोर्ड का पत्रकार’ जरूर बन गया। अब इस कंप्यूटर युग में कीबोर्ड का पत्रकार कहलाने से गुरेज़ नही। ख़बरों की लत ऐसी कि छोड़ना मुश्किल। अब मुश्किल भी क्यों न हो? सारा दिन तो ख़बरों में ही निकलता है। इसके अलावा अगर कुछ पसंद है तो अच्छे दोस्त बनना उनके साथ खाना, पीना, और मुंह की खुजली दूर करना (बुद्धिजीवियों की भाषा में विचार-विमर्श)। पर समस्या यह है कि हिन्दुस्तान में मुंह की खुजली दूर करने वाले (ज्यादा खुजली हो जाती है तो लिखना शुरू कर देते हैं… साथ-साथ उंगली भी करते हैं) तो प्रचुर मात्रा में मिल जाएंगे लेकिन दोस्त बहुत मुश्किल से मिलते हैं। ब्लॉगिंग का शौक कोई नया नहीं है बीच-बीच में भूत चढ़ जाता है। वैसे भी ब्लॉगिंग कम और दोस्तों को रिसर्च उपलब्ध कराने में मजा आता है। रिसर्च अलग-अलग अखबारों, विभिन्न वेवसाइटों और ब्लॉग से लिया होता है। किसी भी मित्र को जरूरत हो किसी तरह की रिसर्च की… तो जरूर संपर्क कर सकते हैं।
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