बिना मर्दों के होगी दुनिया!!!

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मर्दों के बगैर दुनिया की कल्पना कीजिए… चारों और महिलाएं… घर में महिलाएं, ऑफिस में महिलाएं, सड़क पर महिलाएं, दुकानों में महिलाएं, राजनीति, पुलिस, सेना हर जगह सिर्फ महिलाएं ही महिलाएं… अब कैसे चलेगी दुनिया बिना मर्दों केचरम पर होगी समलैंगिकता। अब तो वैज्ञानिकों ने भी बिना मर्दों के बिना बच्चे पैदा करने की विधि खोज ली है। सो अब इस दुनिया में मर्दों की जरूरत क्या

ऑस्ट्रेलिया की एक विज्ञानी के दावे पर गौर किया जाए तो मर्दो की प्रजाति आने वाले कुछ सालों में लुप्तप्राय हो जाएगी और सबसे बुरी बात ये हैं कि लुप्तप्राय होने की ये प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

ऑस्ट्रेलिया के साइंटिस्ट प्रोफेसर जेनी ग्रेव्स का दावा

  • ऑस्ट्रेलिया की जानी मानी साइंटिस्ट प्रोफेसर जेनी ग्रेव्स ने दावा किया है कि पुरुष प्रजाति लुप्तप्राय होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जेनी ने ये दावा पुरुष और महिला प्रजाति के क्रोमोजोम की गणना के आधार पर किया है।
  • जेनी का कहना है कि आश्चर्य की बात ये है कि सेक्स क्रोमोजोम के अस्तित्व की ये लड़ाई महिलाओं के पक्ष में जाएगी। दरअसल पुरुषों में पाया जाने वाला ‘वाई’ सेक्स क्रोमोजोम यानी गुणसूत्र का आणुवांशिक रूप इतनी तेजी से नष्ट हो रहा है कि आने वाले पचास लाख सालों में वो पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
  • जेमी कहती हैं‌ कि पुरुषों के अस्तित्व पर खतरा इसलिए मंडरा रहा है क्योंकि एक तरफ औरतों में दो एक्स क्रोमोजोम होते हैं, वहीं परुषों में एक ही वाइ क्रोमोजोम होता है। महिलाओं में एक एक्स क्रोमोजोम दूसरे एक्स क्रोमोजोम से मिलकर शक्तिशाली बनता है।
  • अफसोस जनक बात ये है कि पुरुषों में ऐसा नहीं हो पाता। पुरुषों में मौजूद वाई क्रोमोजोम दूसरे वाई क्रोमोजोम से जुड़ नहीं पाता और दोनों ही क्रोमोजोम पतन की ओर अग्रसर हो जाते हैं। यही कारण है कि न जुड़ने के कारण दोनों ही कमजोर रहकर नष्ट हो जाते हैं।
  • हालांकि कई अन्य वैज्ञा‌निक जेनी के इस दावे को गलत बताते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। प्रोफेसर रॉबिन लॉवेल वेड ने पुरुषों के खत्म होने की बात को दरकिनार करते हुए कहा है कि ये दावा बढ़ा चढ़ा कर पेश किया गया लगता है।

क्रोमोजोम एक्सपर्ट का क्या कहना है

  • रॉबिन सेक्स क्रोमोजोम एक्सपर्ट हैं और उनका कहना है कि हालांकि वाई क्रोमोजोम एक्स की तुलना में कमजोर है लेकिन इसके पतन की प्रक्रिया इतनी जल्द शुरू नहीं हो रही है। रॉबिन का कहना है कि वाई क्रोमोजोम का पतन एक उम्र में बहुत तेजी से होता है लेकिन एक उम्र और समय सीमा के बाद ये पतन रुक जाता है। इसलिए पुरुषों को घबराने की जरूरत नहीं है। रॉबिन ने दावा किया कि पिछले 25 लाख सालों से वाई क्रोमोजोम के एक भी जीन का पतन नहीं हुआ है।

The end of men? Expert predicts males will be extinct in five million years… and the process has already started!

  • Leading Australian expert says ‘inherent fragility’ of the male sex chromosome will lead to male demise
  • Says the research is ‘very bad news’ for all men

Men are living on borrowed time, according to a leading female scientist. Professor Jenny Graves even claims the male of the species is heading for extinction. And chaps, the bad news doesn’t end there, because the process may have already started.

ImageProfessor Graves, one of Australia’s most influential scientists, believes that women will win the battle of the sexes – and in the most definitive way possible. She says that the inherent fragility of the male sex chromosome, the Y sex chromosome, means that men are sliding towards extinction. Professor Graves’s prediction hinges around the number of genes on the male and female sex chromosomes.

Battle of the sexes: Researchers say the Chromosomes, shown here in a computer simulation, could lead to men becoming extinct – in millions of years

The female, or X, chromosome, contains a healthy 1,000 or so genes.   What’s more, girls and women have two of them. The Y chromosome started off with as many genes as its female counterpart.  But over hundreds of millions of years it has crumbled away, leaving fewer than 100 genes in modern man.

This includes the SRY gene, the ‘male master switch’ that determines whether an embryo is male or female. What is more, while women have two X chromosomes, men have just one, ‘wimpy’, Y. This is key, as the pairing allows the X to make crucial repairs.   Lacking a mate, the Y chromosome finds it more difficult to patch up mistakes and so decays away.

Professor Graves, of CanberraUniversity, said: ‘The X chromosome is all alone in the male but in the female it has a friend, so it can swop bits and repair itself. ‘If the Y gets hit, it’s a downward spiral.’ Giving a public lecture, the professor said: ‘It is very bad news for all the men here.’

And there is more bad news.

In her talk at the AustralianAcademy of Science, the professor described the remaining genes on the Y chromosome as being mostly ‘junk’. She said: ‘It’s a lovely example of what I call dumb design. ‘It’s an evolutionary accident.’ However,  there is some good news.

Professor Graves estimates that it will take five million years for the Y chromosome, and the men it produces, to disappear all together. Other experts urged men not to panic.

Professor Robin Lovell-Badge, a sex chromosome expert from the National Institute for Medical Research in London, said that studies have shown the decay to occur in bursts.

And the Y chromosome has not lost any genes for at least 25 million years.

He said: ‘I would say this is of no concern whatsoever.’

Professor Chris Mason, of University College London, said that even if the Y chromosome does crumble away in the next few million years, medicine will have plenty of time to catch up.

He said: ‘Five or six million years should be plenty of time for medical science to produce a fix and probablImagey a Nobel Prize.’

Professor Graves has her own solution.

She says that when Y chromosome falls to pieces, another chromosome could take on the role of the missing Y, leading to the creation of a new species of human.

There is already a precedent for this in nature, in the form of a Japanese spiny rat which has survived the loss of its Y chromosome. In fact, the  process may already be underway in some isolated groups of people, said the professor. She said: ‘We would not even suspect it without checking the chromosomes.’

दुनिया भर के मर्दों की मर्दानगी खतरे में है। संभव है कि अगले 40-50 सालों में दुनिया भर के सभी मर्द नपुंसक हो जाएं। वजह है बढ़ता तनाव, मोटापा और पलूशन। अलग-अलग स्टडीज़ के मुताबिक मर्दों के स्पर्म काउंट में तेजी से गिरावट आ रही है। पिछले 50 साल में इसमें 50 पर्सेंट तक गिरावट दर्ज की गई है।

  • भारतीयों के लिए रिप्रॉडक्टिव टेक्नीक गाइडलाइंस पर काम करने वाले डॉक्टर पी. एम. भार्गव के मुताबिक स्पर्म में आ रही यह गिरावट पश्चिम देशों में 90 के मध्य में नोटिस की गई थी। भारत के जाने – माने साइंटिस्ट भार्गव का कहना है कि भारत में कुछ डॉक्टरों का मानना है कि स्पर्म में स्थानीय स्तर पर भी गिरावट आ रही है।
  • उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में की गई स्टडी बताती है कि स्पर्म काउंट में हर साल 2 प्रतिशत की दर से गिरावट आ रही है। अगर यही हाल रहा तो अगले 40-50 सालों में दुनिया में सभी नपुंसक हो जाएंगे।
  • उनके मुताबिक कुछ साल पहले स्कॉटलैंड में साढ़े सात हजार लोगों पर एक स्टडी गई गई थी। इसमें 1989 और 2002 में औसत स्पर्म काउंट में 30 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई। कोपेनहेगन में की गई स्टडी में इसकी वजह अल्कोहल, स्मोकिंग और बढ़ते मोटापे को बताया गया।
  • भार्गव के मुताबिक रोजमर्रा की इस्तेमाल होने वाली चीजों जैसे बाल्टी आदि से फीमेल हार्मोन ऐस्ट्रोजन जैसे केमिकल निकलते हैं। उनके मुताबिक स्पर्म में गिरावट की वजह यह केमिकल भी हो सकता है। हालांकि इससे कई लोग इत्तफाक नहीं रखते हैं।

मानव कोषिकाओं में 23 जोड़ी क्रोमोजोम होते हैं जिनमें एक सेट सेक्सक्रोमोजोम की होती है

नहीं गायब होंगे मर्द… एक नए अध्ययन के मुताबिक दुनिया से पुरुषों के विलुप्त होने का खतरा नहीं है. पहले के अध्ययनों के अनुसार पुरुषों में पाई जाने वाली ‘वाई’ सेक्स क्रोमोजोम यानी गुणसूत्र का आणुवांशिक रूप से इस गति से विनाश हो रहा है कि वो पचास लाख साल में पूरी तरह खत्म हो जाएगा.

क्रोमोसोम के अंदर ये जीन एक स्विच की तरह काम करते हैं जिससे वीर्यकोष का विकास होता है और पुरुषों के हॉर्मोन का स्राव होता है. लेकिन ‘नेचर’ के नए अध्ययन के मुताबिक क्रोमोजोम का ये विनाश लगभग थम चुका है. ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्वविधालय के प्रोफेसर जेनिफर ग्रेव्स ने पहले बताया था कि वाइ क्रोमेजोम का जिस गति से विनाश हो रहा है कि वो पचास लाख साल में पूरी तरह खत्म हो जाएगा.

आणुवांशिक विज्ञान के प्रोफेसर ब्रायन साइक्स ने वर्ष 2003 में अपनी किताब ‘एडम्स कर्स: ए प्यूचर विदाउट मेन’ में लिखा था कि एक लाख साल में ही वाइ क्रोमोजोम नष्ट हो जाएंगे. इन भविष्यवाणियों का आधार एक्स और वाइ क्रोमोजोम का तुलनात्मक अध्ययन था. माना जाता था कि स्तनपाईयों के आरंभिक इतिहास में एक्स और वाइ क्रोमोजोम एक जैसे थे. लेकिन अब एक्स क्रोमोजोम में लगभग 800 जीन हैं जबति वाइ क्रोमोजोम में सिर्फ 78 जीन हैं.

चुनौती

कैंब्रिज के व्हाइटफील्ड इंस्टीट्यूट के जेनीफर ह्यूज और उनके सहकर्मी ने खोज करना चाहा है कि क्या वाइ क्रोमोजोम के पतन की कहानी बढ़ा चढ़ा कर तो नहीं की जा रही है.

वर्ष 2005 में नेचर में एक पेपर में उन्होंने मनुष्य और चिंपाजी के वाइ क्रोमोजोम की तुलना की. चिपाजी और मानव की वंशावली 60 लाख साल पहल अलग हो गई थी.

अपनी ताजा अध्ययन में उन्होंने मानव और ‘रिसस’ बंदर के वाइ क्रोमोजोमों की तुलना की है जिवकी वंशावली 2.5 करोड़ साल पहले अलग हो गई थी. इन दोनों अध्ययनों के तुलनात्मक विश्लेषण से ये पता चलता है कि आणुवांशिक पतन में हाल के इतिहास में कमी आई है.

मनुष्य के क्रोमोजोम ने पिछले 60 लाख साल में कोई भी जीन नहीं गंवाया है जबकि पिछले 2.5 करोड़ साल में सिर्फ एक जीन कम हुआ है. जेनीफर ह्यूज ने बीबीसी को बताया, “जीन का पतन संभवत: रूक गया है और वाइ क्रोमोजोम कहीं नहीं जा रहे. हम पूरी तरह से मना नहीं कर रहे हैं लेकिन जो जीन वाइ क्रोमोजोम में बचे हैं वो बने रहेंगे.”

वाइ की ‘कमजोरी’

ज्यादातर मनुष्य कोषिकाओं में क्रोमोजोम के 23 सेट होते हैं जिनमें एक जोड़ी सेक्स क्रोमोजोम की होती है. महिलाओं की सेट में दो एक्स क्रोमोजोम होते हैं जबकि पुरुषों में एक एक्स और एक वाइ क्रोमोजोम होता है. वाइ क्रोमोजोम में मौजूद एक जीन ही भ्रूण में पुरुषों के वीर्यकोष का विकास और हॉर्मोन के स्राव का जिम्मेदार होता है.

वाइ क्रोमोजोम का आणुवांशिक नाश की वजह क्या इस बारे में डॉ ह्यूज बताती हैं, “एक्स को कोई खतरा नहीं है क्योंकि महिलाओं में उसे दूसरे एक्स क्रोमोजोम के साथ जुड़ने का मौका मिलता है. लेकिन वाइ क्रोमोजोम को दूसरे वाइ से जुड़ने का लगभग मौका नहीं मिलता है जिससे वाइ क्रोमोजोम पतन के कारकों के लिए संवेदनशील हो जाता है.”

इस पेपर पर टिपण्णी देते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रोफेसर मार्क पैगेल कहते हैं, “ये बहुत बढ़िया काम है जिससे बता चलता है कि वाइ क्रोमोजोम का पुरुष विशिष्ठ हिस्सा का पहले तो बहुत तेजी से नाश होता है लेकिन बाद में वो एक मंज़िल पर पंहुचता है जहां ये प्रक्रिया रूक जाती है.” पैगेल कहते हैं कि इससे पता चलता है कि पुरुषो का भविष्य एक लंबे समय तक सुरक्षित है.

वाइ क्रोमोजोम क्या है

वाइ क्रोमोजोम (गुणसूत्र) किसी भी स्तनधारी श्रेणी के मनुष्य लिंग की पहचान देने वाला एक क्रोमोजोम है। स्तनधारी जीवों में केवल ऐसे दो लिंग-भेद करने वाले क्रोमोजोम होते हैं – एक्स गुण सूत्र और वाई गुण सूत्र। इनका नाम अंग्रेज़ी के “X” और “Y” अक्षरों पर पड़ा है क्योंकि इनके आकार उनसे मिलते-जुलते हैं। मर्दों में एक वाई और एक एक्स क्रोमोजोम होता है, जबकि औरतों में दो एक्स गुण सूत्र होते हैं। साधारण तौर पर किसी भी पिता का यह इकलौता वाई क्रोमोजोम बिना किसी बदलाव के उसके पुत्रों में जाता है। इसलिए वाई क्रोमोजोम के अध्ययन से किसी भी पुरुष के पितृवंश समूह का पता लगाया जा सकता है। वाई क्रोमोजोम पर एक एस॰आर॰वाई॰ (SRY) नाम की जीन मौजूद होती है जो नर की विकास-आयु में शरीर को अंडकोषों में विकसित करता है।

Sex Ratio in India

 

Women per 1000 men 2001

Women per 1000 men 2011

Increase in Sex ratio (Difference between 2011 and 2001)

INDIA

933

940

+7

Indian states and territories ranking by sex ratio

Rank

State

Women per 1000 men 2001

Women per 1000 men 2011

Increase in Sex ratio (Difference between 2011 and 2001)

1 Kerala 1,058 1,084 +26
2 Puducherry 990 1,031 +41
3 Tamil Nadu 986 995 +9
4 Andhra Pradesh 978 992 +14
5 Chattisgarh 990 991 +1
6 Manipur 978 987 +9
7 Meghalaya 975 986 +11
8 Odisha 972 978 +6
9 Mizoram 938 975 +37
10 Himachal Pradesh 970 974 +4
11 Karnataka 964 968 +4
12 Goa 960 968 +8
13 Uttarakhand 964 963 -1
14 Tripura 950 961 +11
15 Assam 932 954 +22
16 Lakshadweep 947 946 -1
17 Jharkhand 941 947 +6
18 West Bengal 934 947 +13
19 Maharashtra 922 946 +24
20 Nagaland 909 931 +22
21 Madhya Pradesh 920 930 +10
22 Rajasthan 922 926 +4
23 Arunachal Pradesh 901 920 +19
24 Gujarat 921 918
-3
25 Bihar 921 916 -5
26 Uttar Pradesh 898 908 +10
27 Punjab 874 893 +19
28 Sikkim 875 889 +14
29 Jammu & Kashmir 900 883 -17
30 Andaman & Nicobar Islands 846 878 +32
31 Haryana 861 877 +16
32 Delhi 821 866 +45
33 Chandigarh 773 818 +45
34 Dadra & Nagar Haveli 811 775 -36
35 Daman & Diu 709 618 -91

Global Adult Sex Ratio

In 2010, the global adult sex ratio was 986 females per 1,000 males and trended to reduce to 984 in 2011.

  • America’s sex ratio also fell from 1,029 in 2001 to 1,025 in 2011.
  • China sex ratio in 2001 was 944, and it fell to 926 in 2011.
  • Japan’s sex ratio improved from 1, 041 (2001) to 1055 (2011),
  • Russia’s improved from 1, 140 (2001) to 1, 167 (2011)
  • Pakistan’s from 938 (2001) to 943 (2011).
  • Bhutan’s sex ratio saw a major drop: from 919 in 2001 to 897 in 2011.
  • Bangladesh, the sex ratio was 958 in 2001, which increased to 978 in 2011.
  • Indonesia’s overall sex ratio fell from 1, 004 (2001) to 988 (2011),
  • Sri Lanka’s sex ratio stood at 1,034 in 2011 as compared to 1, 010 in 2001,
  • Nepal’s sex ratio also improved from 1, 005 females per 1, 000 males in 2001 to 1,014 in 2011
  • Myanmar’s was 1,011 (2001) as against 1,048 (2011).
  • Brazil too saw an increase – from 1, 025 (2001) to 1, 042 (2011).
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About drsandeepkohli

तमाम लोगों को अपनी-अपनी मंजीलें मिली.. कमबख्त दिल हमारा ही हैं जो अब भी सफ़र में हैं… पत्रकार बनने की कोशिश, कभी लगा सफ़ल हुआ तो कभी लगा …..??? चौदह साल हो गए पत्रकार बनने की कोशिश करते। देश के सर्वोतम संस्थान (आईआईएमसी) से 2003 में पत्रकारिता की। इस क्षेत्र में कूदने से पहले शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा था, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में रिसर्च कर रहा था। साथ ही भारतीय सिविल सेवा परिक्षा की तैयारी में रात-दिन जुटा रहता था। लगा एक दिन सफ़ल हो जाऊंगा। तभी भारतीय जनसंचार संस्थान की प्रारंभिक परिक्षा में उर्तीण हो गया। बस यहीं से सब कुछ बदल गया। दिल्ली में रहता हूं। यहीं पला बड़ा, यहीं घर बसा। और यहां के बड़े मीडिया संस्थान में पत्रकारिता जैसा कुछ करने की कोशिश कर रहा हूं। इतने सालों से इस क्षेत्र में टिके रहने का एक बड़ा और अहम कारण है कि पहले ही साल मुझे मेरे वरिष्ठों ने समझा दिया गया था कि हलवाई बनो। जैसा मालिक कहे वैसा पकवान बनाओ। सो वैसा ही बना रहा हूं, कभी मीठा तो कभी खट्टा तो कभी नमकीन, इसमें कभी-कभी कड़वापन भी आ जाता है। सफ़र ज्यादा लम्बा नहीं, इन चौदह सालों के दरम्यां कई न्यूज़ चैनलों (जी न्यूज़, इंडिया टीवी, एनडीटीवी, आजतक, इंडिया न्यूज़, न्यूज़ एक्सप्रेस, न्यूज़24) से गुजरना हुआ। सभी को गहराई से देखने और परखने का मौका मिला। कई अनुभव अच्छे रहे तो कई कड़वे। पत्रकारों को ‘क़लम का सिपाही’ कहा जाता है, क़लम का पत्रकार तो नहीं बन पाया, हां ‘कीबोर्ड का पत्रकार’ जरूर बन गया। अब इस कंप्यूटर युग में कीबोर्ड का पत्रकार कहलाने से गुरेज़ नही। ख़बरों की लत ऐसी कि छोड़ना मुश्किल। अब मुश्किल भी क्यों न हो? सारा दिन तो ख़बरों में ही निकलता है। इसके अलावा अगर कुछ पसंद है तो अच्छे दोस्त बनना उनके साथ खाना, पीना, और मुंह की खुजली दूर करना (बुद्धिजीवियों की भाषा में विचार-विमर्श)। पर समस्या यह है कि हिन्दुस्तान में मुंह की खुजली दूर करने वाले (ज्यादा खुजली हो जाती है तो लिखना शुरू कर देते हैं… साथ-साथ उंगली भी करते हैं) तो प्रचुर मात्रा में मिल जाएंगे लेकिन दोस्त बहुत मुश्किल से मिलते हैं। ब्लॉगिंग का शौक कोई नया नहीं है बीच-बीच में भूत चढ़ जाता है। वैसे भी ब्लॉगिंग कम और दोस्तों को रिसर्च उपलब्ध कराने में मजा आता है। रिसर्च अलग-अलग अखबारों, विभिन्न वेवसाइटों और ब्लॉग से लिया होता है। किसी भी मित्र को जरूरत हो किसी तरह की रिसर्च की… तो जरूर संपर्क कर सकते हैं।
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